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सवर्ण महिलाओं से औसतन 14 साल कम जीती हैं दलित महिलाएं: रिपोर्ट

गरीबी, साफ-सफाई, पानी की कमी, कुपोषण, स्वास्थ्यगत समस्याओं की वजह से दलित महिलाएं कम जी पाती हैं.

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भारत की दलित महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र ने जारी की है रिपोर्ट
भारत की दलित महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र ने जारी की है रिपोर्ट

भारत में महिलाओं की आयु भी उनके जाति पर भी निर्भर करती है. सवर्ण महिलाओं की तुलना में दलित महिलाएं औसतन 14.6 साल कम जीती हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.

गरीबी, साफ-सफाई, पानी की कमी, कुपोषण, स्वास्थ्यगत समस्याओं की वजह से दलित महिलाएं कम जी पाती हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है, ' भारत में दलित महिला की मौत औसतन ऊंची जाति की महिलाओं से 14.6 साल पहले हो जाती है.'

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट 'टर्निंग प्रॉमिसेज इन्टू एक्शन, जेंडर इक्वलिटी इन 2030' को तैयार करने में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दलित स्टडीज के एक अध्ययन को आधार बनाया है.

40 साल से कम उम्र में मौत

रिपोर्ट के अनुसार दलित महिलाओं की मौत औसतन 39.5 साल की उम्र में ही हो जाती है, जबकि सवर्ण महिलाओं की मौत औसतन 54.1 साल में होती है. इस रिपोर्ट में करीब 89 देशों की महिलाओं के बारे में जानकारी दी गई है और इसे संयुक्त राष्ट्र के 2030 के एजेंडा स्वीकार करने से ढाई साल बाद जारी किया गया है. इन 89 देशों में करीब 33 करोड़ महिलाएं गरीब हैं.

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रिपोर्ट के अनुसार भारत में सवर्ण महिलाओं और दलित महिलाओं की विभि‍न्न दशाएं एक हों, फिर भी दलित महिला की मौत जल्दी हो जाती है. स्वच्छता, पेयजल जैसी सामाजिक दशाएं यदि समान हों तो भी एक दलित महिला और ऊंची जाति की महिला की मौत के बीच औसतन 11 साल का अंतर रहता है.

रिपोर्ट के अनुसार संपन्नता और इलाके का भी महिलाओं की आयु पर काफी असर पड़ता है. गरीब महिलाओं की शादी 18 साल से पहले होने की प्रायिकता ज्यादा होती है. ऐसी पास खुद पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं होते. दलित महिलाएं भूमिहीन होती हैं, इसलिए उनकी गरीबी बनी रहती है. यही नहीं, दलित महिला की कम शिक्षा या सामाजिक भेदभाव की वजह से भी उसका शोषण होता है, पर्याप्त तनख्वाह नहीं मिलती.

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