पिछले दिनों सेना पर जारी कैग की रिपोर्ट को लेकर सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि यह रिपोर्ट 2015-16 की है, जो पुरानी है. जनरल नरवणे कि मैं लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि आज के समय में हम बहुत अच्छी तरह से तैयार हैं और हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सेना की जरूरतें पूरी हों.
सेना के बजट पर जनरल नरवणे ने कहा, साल दर साल इस बजट में 8 फीसदी की बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस बजट का पूर्ण उपयोग कैसे हो, लेह, लद्दाख और सियाचिन जैसे बेहद ऊंचे और दुर्गम स्थानों में तैनात भारतीय सैनिकों को कपड़े, जूते, स्लीपिंग बैग और सन ग्लासेज की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ा है.
CAG ने खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा है कि जवानों को चार सालों तक बर्फीले स्थानों पर पहने जाने वाले कपड़ों और दूसरे सामानों की तंगी झेलनी पड़ी है.
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भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(CAG) ने सोमवार को संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि बर्फीले इलाके में तैनात सैनिकों को स्नो बूट (snow boot) न मिल पाने की वजह से सैनिकों को पुराने जूते रिसाइकल कर पहनना पड़ा है. देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों को पर्याप्त मात्रा में कैलरी भी नहीं मिल पा रही है.
Army Chief General Manoj Mukund Naravane on defence budget allocation: We will continue to modernize notwithstanding what budget allocations are made. Last year itself we had inducted 4-5 different types of weapon systems & platforms. Modernization has never been an issue.
— ANI (@ANI)
सेना के पास नहीं है पर्याप्त बजट: CAG
भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के मुताबिक मार्च 2019 में की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि बजट की तंगी और आर्मी की जरूरतों में बढ़ोतरी की वजह से जवानों को ये किल्लत हुई.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में बर्फीले इलाकों में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों और इस वजह से सेना मुख्यालय में इन सामानों की कमी हो गई. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने कहा कि धीरे-धीरे इन कमियों को पूरा कर लिया जाएगा.
9000 फीट ऊंचाई पर राशन की किल्लत
भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का दावा है कि 9000 फीट ऊंचे स्थान पर रहने के लिए दिए जाने वाले विशेष राशन और बता दें कि लेह लद्दाख और सियाचिन में रहने वाले जवानों को कैलरी की कमी पूरा करने के लिए विशेष खाना दिया जाता है. कैग के मुताबिक उन्हें इसके इस्तेमाल में भी कंजूसी करनी पड़ी.