एक संसदीय पैनल का कहना है कि 20 अति संवेदनशील भारतीय हवाई अड्डों पर, विशेषकर उनके संपर्क मार्गों के संदर्भ में एंटी टेररिज्म इमरजेंसी योजना का अभाव है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उनमें से आठ पर तो सीआईएसएफ सुरक्षा भी नहीं है.
पैनल के अनुसार कोई अप्रिय घटना हो, उससे पहले ही विमानन सुरक्षा नीति बनाना जरूरी है. परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि वह यह जानकर चौंक गयी कि हमारे अति संवेदनशील हवाई अड्डों में से आठ पर और संवेदनशील हवाई अड्डों में से 19 पर सीआईएसएफ सुरक्षा भी नहीं है जब यह बल ही विमानन सुरक्षा के लिए अब एकमात्र विशिष्ट बल बन गया है.
पैनल ने कहा, अब सवाल यह है कि तब इन हवाई अड्डों की रखवाली कौन कर रहा है और ये हवाई अड्डे कितने सुरक्षित हैं? उसे कई हवाई अड्डों पर अहम सुरक्षा उपकरणों में कई गंभीर खामियां भी नजर आयीं और उसने लिखा कि विमानन सुरक्षा पर उतना ध्यान और महत्व नहीं दिया गया है जितना दिया जाना चाहिए. तृणमूल सांसद के डी सिंह की अगुवाई वाले पैनल ने शीतकालीन सत्र में संसद में पेश रिपोर्ट में कहा है, संपर्क मार्गों पर सीआईएसएफ की आतंकवाद निरोधक आकस्मिक योजना बस दिल्ली और मुम्बई में ही उपलब्ध है. ऐसा ही 20 और अंतररराष्ट्रीय एवं अतिसंवेदनशील हवाई अड्डों पर किये जाने की जरूरत है.
समिति सिफारिश करती है कि हवाई अड्डा सुरक्षा बिल्कुल पक्की होनी चाहिए. समिति ने कहा, देश इस स्थिति को जारी नहीं रख सकता. समिति का मानना है कि विमानन सुरक्षा पर उतना ध्यान एवं महत्व नहीं दिया गया जितना दिया जाना चाहिए. समिति का कहना है कि देश में कोई बड़ी अप्रिय घटना हो जाए, उससे पहले ही हवाई अड्डों की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विमानन सुरक्षा नीति बना लेने की सख्त आवश्यकता है.
देश में फिलहाल 98 चालू हवाई अड्डे हैं जिनमें 26 अतिसंवेदनशील और 56 संवेदनशील श्रेणी में आते हैं. अतिसंवेदनशील हवाई अड्डों में 18 ही सीआईएसएफ सुरक्षा के अंतर्गत आते हैं जबकि संवेदनशील हवाई अड्डों मे से 37 पर ही सीआईएसएफ की तैनाती है. समिति ने कुछ हवाई अड्डों पर सुरक्षा उपकरणों की कमी का उल्लेख किया गया है और कहा कि सुरक्षा उपकरण में त्रुटि और सीसीटीवी कैमरे लगाने के मुद्दे को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए ताकि ऐसी खामी भारतीय हवाई अड्डा सुरक्षा प्रणाली के लिए चिंता की वजह न बन जाए.