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राजस्थान: छापों के डर से कांग्रेस छोड़ बीजेपी कैंप पहुंचे विधायक

पुलिस ने जोधपुर से लेकर श्रीगंगानगर तक ऐसी छापेमारी की कि पार्टी के दो विधायक कामिनी जिंदल और सोना देवी बावरी कांग्रेस के खेमे से भागकर मुख्यमंत्री निवास 13 सिविल लाईन्स पहुंची जहां से दोनों को बाकि के विधायकों के साथ जयपुर ग्रीन्स होटल में बंद किया गया है.

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विधायकों में छापेमारी का डर
विधायकों में छापेमारी का डर

राज्यसभा की चार सीटों के लिए राजस्थान में हो रहे चुनाव ने बीजेपी की नींद उड़ा रखी है. बीजेपी ने अपने 160 विधायकों और 4 निर्दलीय विधायकों को अजमेर रोड के जयपुर ग्रीन्स होटल में बंद कर रखा है. इसके बाद भी पार्टी में भीतरघात का खौफ बना हुआ है.

जमींदारा पार्टी के दो विधायकों को अपने साथ लाने के लिए पार्टी के अध्यक्ष बीडी अग्रवाल पर सवा साल पहले के एक मुकदमे में अचनाक रात में सात जगहों पर छापा मारकर भतीजा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. बीडी अग्रवाल भाग छूटे. शाम तक पुलिस ने जोधपुर से लेकर श्रीगंगानगर तक ऐसी छापेमारी की कि पार्टी के दो विधायक कामिनी जिंदल और सोना देवी बावरी कांग्रेस के खेमे से भागकर मुख्यमंत्री निवास 13 सिविल लाईन्स पहुंची जहां से दोनों को बाकि के विधायकों के साथ जयपुर ग्रीन्स होटल में बंद किया गया है.

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सवा साल पहले निगम ने जमींदारा पार्टी के अध्यक्ष पर एक करोड़ 60 लाख के ग्वार के बीज घोटाले का मुकदमा दर्ज किया था. बीजेपी की तरफ से केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकया नायडू, ओम माथुर, हर्षवर्धन सिंह और आर.के. वर्मा हैं. दरअसल कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार कमल मोरारका को कांग्रेस के 24, बीएसपी के 3, राजपा के 4, जमींदारा पार्टी के 2 और 3 निर्दलीय का समर्थन प्राप्त था यानि 5 वोट कम पड़ रहे थे. अगर बीजेपी या उनके समर्थित निर्दलीय में से 3-4 का वोट भी रद्द हो जाता तो कमल मोरारका जीत सकते थे.

जमींदारा पार्टी के अध्यक्ष पर पुलिस छापेमारी कर होटल में कैद करने को कांग्रेस के विधायक दल के नेता रामेश्वर डूडी ने लोकतंत्र की हत्या बताया है. वहीं कमल मोरारका ने इसे बीजेपी की नैतिक हार करार दिया है.

उधर होटल में सभी विधायकों का मोबाईल ले लिया गया है. इंटरनेट की व्यवस्था बंद कर दी गई है. केवल मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए बीएसएनएल ने एक सप्लाई डाली है. किसी भी विधायक या मंत्री तक घरवालों समेत किसी से भी संपर्क की इजाजत नही है. यानि सरकार पूरी तरह से तीन दिन के लिए अफसरों के हाथ में दे दी गई है.

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