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पंजाब में बिजली संकट: 12-14 घंटे के पावर कट, खेतों में सूख रही धान की फसल; मोगा में किसानों ने जाम किए हाईवे

पंजाब में कोयले की कमी और तकनीकी खराबी के कारण बिजली उत्पादन 1,915 मेगावाट तक गिर गया है, जिससे लुधियाना, मोहाली, जालंधर जैसे औद्योगिक शहरों में 12 से 14 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है. किसानों को भी बिजली और नहरी पानी की कमी से फसल नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

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पंजाब में गहराया बिजली संकट. (photo: ITG)
पंजाब में गहराया बिजली संकट. (photo: ITG)

पंजाब में गंभीर बिजली संकट गहराने के कारण राज्य के उद्योगों, कृषि और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. शनिवार को पीक बिजली मांग 16,519 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि राज्य की 1,915 मेगावाट उत्पादन क्षमता तकनीकी खराबी और कोयले की भारी कमी से ठप पड़ी है.

इसके चलते लुधियाना, मोहाली और जालंधर जैसे औद्योगिक शहरों में 12 से 14 घंटे तक बिजली काटी जा रही है. वहीं, मोगा जिले में 8 घंटे के बजाय महज एक घंटा बिजली मिलने से नाराज किसानों ने प्रमुख हाईवे जाम कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दे रहे हैं.

उद्योगों में 14 घंटे तक ब्लैकआउट

राज्य में उद्योगों के लिए पिछले हफ्ते तय 4 घंटे के कट अब बढ़कर 12 से 14 घंटे तक पहुंच गए हैं. लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, मोहाली और राजपुरा में श्रेणी 2 और 3 की औद्योगिक यूनिटों की बिजली शनिवार शाम 4:30 बजे से रविवार सुबह 6 बजे तक बंद रही. वहीं, आम घरेलू उपभोक्ताओं को भी रोजाना 4 से 5 घंटे के अघोषित कट झेलने पड़ रहे हैं.

मोहाली में इंडस्ट्री ठप

मोहाली इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव दिलप्रीत सिंह ने बताया कि ट्रैक्टर फैक्टरियों को सप्लाई करने वाली मेटल यूनिट अंधेरे में डूबी हैं और डिलीवरी समय पर नहीं हो पा रही. अमेया इंडस्ट्री के जसविंदर सिंह ने कहा कि 10 लीटर प्रति घंटा डीजल की खपत से जनरेटर चलाना पड़ रहा है. उधर जालंधर में 10-11 घंटे लंबे कट से गुस्साए लोगों ने रात 11:30 बजे सोढल चौक पर जाम लगाकर पीएसपीसीएल के खिलाफ नारेबाजी की.

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मांग 16,519 मेगावाट पार

वहीं, शनिवार को पंजाब में बिजली की पीक डिमांड 16,519 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह 12,489 मेगावाट थी. निजी नाभा पावर (राजपुरा, 700 मेगावाट) और तलवंडी साबो (660 मेगावाट) की एक-एक यूनिट बंद है. थर्मल और हाइडल मिलाकर 1,915 मेगावाट उत्पादन ठप है. पीएसपीसीएल का अपना उत्पादन 4,162 से 4,300 मेगावाट रहने से राज्य को उत्तरी ग्रिड से 11,000 मेगावाट से ज्यादा बिजली खींचनी पड़ रही है.

निजी प्लांटों में कोयले का संकट

राजपुरा और तलवंडी साबो जैसे निजी बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक अनिवार्य 20 दिनों के बफर से काफी नीचे पहुंच चुका है. इसके विपरीत लहरा मोहब्बत, गोइंदवाल और रोपड़ स्थित सरकारी बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है. निजी प्लांटों में कोयला आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन बुरी तरह चरमरा गया है.

इसके अलावा धान की सिंचाई के लिए बिजली न मिलने से मोगा में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. किसान यूनियनों ने बाघापुराना मुख्य चौक, निहाल सिंह वाला चौक, अजीतवाल में फिरोजपुर-लुधियाना रोड, धर्मकोट के कडियाल पावर ग्रिड और समालसर के पास मोगा-कोटकपूरा रोड को जाम कर दिया. किसानों ने आरोप लगाया कि 8 घंटे के वादे के बदले केवल एक घंटा बिजली मिल रही है और नहरी पानी भी नहीं है.

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बर्बाद हो रही है फसल: किसान

सिंघावाला गांव के किसान जगदीप सिंह ने बताया कि 11 एकड़ धान पानी के बिना बर्बाद हो रहा है. केबल सिंह ने बताया कि उनके पास 20 एकड़ में धान की फसल है जो बिजली न मिलने के कारण खराब हो रही है. उन्होंने बताया कि एक एकड़ में धान की बिजाई पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए हैं, जबकि 80 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेका भी देना है. इस वक्त फसल को पानी की सख्त जरूरत है, लेकिन बिजली नहीं मिलने के कारण खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है. ऐसे में उन्हें चिंता है कि अगर फसल खराब हुई तो उनका पूरा खर्च भी नहीं निकल पाएगा और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.

इसी तरह छोटे किसान गुरप्रीत और बलजीत ने भी फसल मुरझाने की बात कही. किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार के 8 घंटे बिजली और नहरी पानी उपलब्ध करवाने के दावे जमीनी हकीकत से दूर हैं. खेतों में न तो 8 घंटे बिजली मिल रही है और न ही नहरी पानी उपलब्ध हो रहा है.

बीकेयू (एकता उगराहां) के इकबाल सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को 8 घंटे बिजली और नहरी पानी उपलब्ध करवाने के किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर है. पावर कट के नाम पर किसानों के खेतों की बिजली बंद कर दी जाती है. इस समय धान की फसल को पानी की सख्त जरूरत है, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण फसल खराब होने लगी है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने का डर है और फसल की लागत तक पूरी नहीं हो पाएगी.

उन्होंने समस्या का समाधान न होनो पर अनिश्चितकाल तक धरना करने की चेतावनी देते हुए कहा कि पिछले दिन भी बिजली की मांगो को लेकर मोगा और अजीतवाल में रोड जाम किया गया था, पर कोई हाल नहीं हुआ. आज भी मोगा में तीन जगह पर धरना हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं करवाई गई तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा.

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बिजली मंत्री ने दी सफाई

पंजाब के बिजली मंत्री तरणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि ये राष्ट्रीय कोयला संकट है और देश के कई निजी प्लांट 3-4 दिन के स्टॉक पर चल रहे हैं. नाभा और तलवंडी साबो केंद्र के आवंटन पर निर्भर हैं. टीमों को लगाकर 24 से 48 घंटे में दो यूनिट चालू कराई जा रही हैं. उन्होंने केंद्रीय बिजली मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब के हिस्से की 1,000 मेगावाट बिजली मांगी है. वहीं, बिजली अधिकारी बलबीर सिंह ने स्थिति जल्द सामान्य होने का आश्वासन दिया है.

शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर बादल ने सवाल किया कि भगवंत मान द्वारा दावा की गई 12 घंटे की कृषि बिजली कहां है. कांग्रेस नेता गुरमीत राणा सोढ़ी और राज कुमार वेरका ने आप पर राज्य को अंधेरे में धकेलने का आरोप लगाया. जबकि बीजेपी के अनिल सरीन और महिला मोर्चा की जय इंदर कौर ने भी सरकार को घेरा.

विपक्ष के आरोपों के बीच AAP पंजाब प्रमुख अमन अरोड़ा ने समस्या को स्वीकार किया, लेकिन जोर दिया कि मान सरकार ने पहले साढ़े चार साल तक निर्बाध आपूर्ति दी थी और अब केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने से दिक्कत आई है.

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