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सेना को पसंद नहीं आया पंजाब के मिल्कफेड का दूध... 125 टन मिल्क पाउडर की खेप रिजेक्ट, AAP सरकार घिरी

पंजाब के सरकारी डेयरी ब्रांड Verka के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है. भारतीय सेना ने इसके 125 मीट्रिक टन 'होल मिल्क पाउडर' की खेप को मानकों पर खरा न उतरने के कारण रिजेक्ट कर दिया है. इस घटना के बाद पंजाब की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

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वेरका के 125 टन मिल्क पाउडर की खेप रिजेक्ट.(Photo: Representational)
वेरका के 125 टन मिल्क पाउडर की खेप रिजेक्ट.(Photo: Representational)

पंजाब की सहकारी संस्था मिल्कफेड (Milkfed) एक बड़े विवाद में घिर गई है. जम्मू स्थित 'आर्मी सर्विस कोर' (ASC) ने सेना के लिए भेजी गई लगभग 125 मीट्रिक टन  होल मिल्क पाउडर की खेप को यह कहते हुए लौटा दिया है कि नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं. मिल्कफेड अपने उत्पादों को प्रसिद्ध ब्रांड 'वेरका' के नाम से बेचती है औरसेना को होल मिल्क पाउडर, पनीर, फ्लेवर्ड दूध, टेट्रा पैक दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की आपूर्ति करती है.

दरअसल, सेना को दो अलग-अलग लॉट (58.338 MT और 66.654 MT) में दूध पाउडर की आपूर्ति की गई थी. जांच के बाद सेना के कमांडिंग अधिकारी ने लुधियाना जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को पत्र भेजकर खेप को अस्वीकार करने की सूचना दी. इसकी प्रति रक्षा मंत्रालय के मुख्य खरीद निदेशक को भी भेजी गई है.

मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक (MD) राहुल गुप्ता ने बचाव करते हुए कहा कि वेरका उत्पादों की क्वालिटी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि प्रोडक्ट्स को सेना के पास भेजने से पहले NABL-अप्रूव्ड लैब में जांचा गया था.

अब इन नमूनों को दोबारा जांच के लिए गुजरात स्थित NDDB की प्रतिष्ठित लैब 'CALF' भेजा जाएगा. यह पता लगाने के लिए एक 'फैक्ट फाइंडिंग कमेटी' बनाई गई है कि सेना ने इसे आखिर किस आधार पर रिजेक्ट किया.

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विपक्ष का तीखा हमला

इस बीच, विपक्षी दलों के नेताओं ने दूध पाउडर की खेप को अस्वीकार किए जाने के मुद्दे पर AAP सरकार पर जमकर निशाना साधा. शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे पर भगवंत मान सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सशस्त्र बलों की ओर से इतनी बड़ी मात्रा में खेप को अस्वीकार किया जाना, किसी राज्य-संचालित संस्था में क्वालिटी कंट्रोल की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

उन्होंने एक बयान में दावा किया, "यह न सिर्फ करोड़ों रुपये का नुकसान है, बल्कि पंजाब की साख और विश्वसनीयता को भी एक गहरा आघात है." 

मजीठिया ने आरोप लगाया, "इस घटनाक्रम ने सरकार की नाकामी को उजागर कर दिया है, खासकर तब जब वही दूध के उत्पाद पंजाब में उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे हैं. जरा सोचिए, जो चीज हमारे सैनिकों के लिए अस्वीकार कर दी गई, वही पंजाब के लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. यह पूरी तरह से जवाबदेही की कमी और जन-स्वास्थ्य के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है," 

कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इसे मान सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी बताया. रंधावा ने X पर एक पोस्ट में पूछा, ''यह कोई छोटी-मोटी चूक नहीं है; यह क्वालिटी कंट्रोल और जवाबदेही की पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है. जब हमारे सशस्त्र बलों के लिए आपूर्ति की बात आती है, तो इसमें जरा भी समझौता नहीं किया जा सकता. पंजाब सरकार को जवाब देना होगा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या कार्रवाई की जाएगी?"

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