देश के 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होगा. आंध्र प्रदेश से लेकर गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की राज्यसभा सीटों पर चुनाव है तो महाराष्ट्र और तमिलनाडु की दो सीटों पर उपचुनाव है. गुजरात में कांग्रेस को झटका लगेगा तो कर्नाटक में बीजेपी को नुकसान होगा. आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के लिए सियासी मुश्किल दिख रही है.
राज्यसभा के लिए कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार सीटों, राजस्थान, मध्य प्रदेश की तीन-तीन सीटों, झारखंड की दो और मेघालय, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट पर चुनाव है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर दिग्विजय सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन सहित 24 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा.
वहीं, महाराष्ट्र में एनसीपी की नेता सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने और तमिलनाडु में एआईएडीएमके नेता सीवी शणमुगम के विधायक चुने जाने के बाद दोनों सीटें खाली हुई हैं. इन चुनावों के नतीजे सिर्फ राज्यसभा का गणित नहीं बदलेंगे, बल्कि कई दिग्गज नेताओं की भी छुट्टी हो जाएगी. ऐसे में देखना है कि किसकी राज्यसभा में वापसी होती है और किसकी नहीं?
कर्नाटक में कांग्रेस को लाभ, देवगौड़ा पर सस्पेंस
राज्यसभा के लिए जिन 26 सीटों पर 18 जून को चुनाव है, उसमें से 12 सीटें सिर्फ तीन राज्य की हैं. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. कर्नाटक में बीजेपी को झटका तो कांग्रेस को स्पष्ट फायदा मिलता दिख रहा है. मौजूदू समय में बीजेपी के दो, जेडीएस और कांग्रेस के पास एक-एक राज्यसभा सीटें है, लेकिन विधानसभामें मजबूत संख्या बल के कारण समीकरण बदल गए हैं.
कर्नाटक में बीजेपी से नारायण कोरगप्पा और इरन्ना कडाडी, जेडीएस से एचडी देवेगौड़ा और कांग्रेस से मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल खत्म हो रहा. विधायकों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस दो से तीन सीटें जीत सकती है जबकि बीजेपी एक से दो सीटें जीत सकती है. इस लिहाज से खड़गे की वापसी राज्यसभा में तय है, पर देवगौड़ा के लिए जेडीएस के दम पर वापसी करना आसान नहीं है. देवेगौड़ा को अगर बीजेपी के समर्थन करती है तो फिर उनके राज्यसभा जाने का रास्ता बन सकता है.
आंध्र प्रदेश और गुजरात में किसे होगा नुकसान
आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. आंध्र प्रदेश की चार सीटों में से अभी तीन सीट वाईएसआर कांग्रेस का और एक सीट पर टीडीपी के पास है. वाईएसआर कांग्रेस से अयोध्या रामी रेड्डी अल्ला, परिमल नथवानी, पिल्ली सुभाष चंद्र बोस हैं जबकि टीडीपी से साना सतीश बाबू हैं. लेकिन राज्य में सियासी समीकरण 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद बदल गए हैं, जिसके चलते वाईएसआर कांग्रेस को तगड़ा झटका लगेगा. विधायकों की संख्या के आधार पर दो सीटें टीडीपी, एक सीट जनसेना और एक सीट बीजेपी के खाते में जा सकती है.
वहीं, गुजरात की चार राज्यसभा सीट पर चुनाव हो रहे हैं, जिसमें से तीन सीटें बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के पास है. बीजेपी से रामभाई हरजीभाई मोकरिया, अमीन नरहरी हिराभाई, रमिला बेचारभाई और कांग्रेस से शक्ति सिंह गोहिल राज्यसभा सदस्य हैं. गुजरात में कांग्रेस को सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान गुजरात होगा और बीजेपी क्लीन स्वीप कर सकती हैं.
विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को बुरी तरह कमजोर किया था. अब मौजूदा विधायकों की संख्या को देखते हुए गुजरात से कांग्रेस का कोई राज्यसभा सांसद नहीं पहुंच पाएगा. बीजेपी चारों राज्यसभा सीटें जीत सकती है. इस तरह शक्ति सिंह गोहिल की संसद में वापसी नहीं हो पाएगी.
राजस्थान और मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव
मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव है. एमपी और राजस्थान दोनों ही राज्य में बीजेपी के दो-दो और कांग्रेस के एक-एक सदस्य का टर्म खत्म हो रहा है. मध्य प्रदेश में बीजेपी से जॉर्ज कुरियन, सुमेर सिंह सोलंकी तो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह राज्यसभा सदस्य हैं. राजस्थान से कांग्रेस नीरज डांगी, बीजेपी से राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू हैं.
मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा की संख्या के आधार पर राज्यसभा पहले ही जैसी ही स्थिति रहेगी, लेकिन सवाल यह है कि बीजेपी और कांग्रेस अपने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों की दोबारा मौका देगी या फिर किए नए चेहरे को लाएगी. कांग्रेस में कई बड़े नेता राज्यसभा के दावेदार माने जा रहे हैं. मोदी सरकार के दो मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, अगर उन्हें फिर से राज्यसभा नहीं मिलती है तो मंत्री पद चला जाएगा. वहीं, कांग्रेस की स्थिति एक अनार और सौ बिमार वाली है. ऐसे में सभी की निगाहें दिग्विजय सिंह पर लगी हुई है कि उन्हें राज्यसभा में मौका मिलता है कि नहीं?
पूर्वोत्तर की तीन राज्यसभा सीट पर चुनाव
पूर्वोत्तर के तीन राज्यों की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. मिजोरम, मणिपुर और मेघालय में एक-एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव है. मिजो नेशनल फ्रंट के के वनलालवेना, मणिपुर में बीजेपी के महाराजा सनाजाओबा लेइसेंबा, मेघालय में एनपीपी के वानवेइरोय खारलुखी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. विधायकों की संख्या के आधार पर तीनों ही राज्य में सियासी स्थिति पहले की तरह ही बरकरार रहने वाली है. बीजेपी मणिपुर में अपनी सीट बचा लेगी तो मेघालय और मिजोरम में क्षेत्रीय पार्टियां अपना दबदबा बनाए रख सकती है.
तमिलनाडु और महाराष्ट्र की एक-एक सीट पर राज्यसभा चुनाव है, महाराष्ट्र में एनसीपी अपनी सीट बचा लेगी तो तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के चलते विजय की पार्टी टीवीके राज्यसभा पहुंच सकती है. अब देखना है कि एनसीपी किसे राज्यसभा में भेजने का फैसला लेती है?
किस पार्टी को हो सकता है ज्यादा नुकसान
12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में सबसे बड़ा झटा आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस को लग सकता है. मौजूदा समय में बीजेपी के पास 11 सीटें है तो कांग्रेस के पास चार सीटें है. अभी एनडीए के पास 15 और विपक्षी इंडिया ब्लॉक पास पांच सीटें हैं. इसके अलावा तीन सीटें जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पास हैं, एक सीट मिजो नेशनल फ्रंट के पास हैं.
विधायकों की संख्या के हिसाब से 26 सीटों में से एनडीए को 18 सीटें और विपक्ष को 8 सीटें मिलने के आसार हैं. बीजेपी को लाभ मिल सकता है तो कांग्रेस भी फायदे में होगी, लेकिन सवाल है कि कौन राज्यसभा सदस्य अपनी वापसी कर पाएगा. कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का दोबारा राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा से लेकर दिग्विजय सिंह, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन पर सस्पेंस बना हुआ है.