एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट और बगावत से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने की कवायद भी तेज हो गई है. टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच करीब 90 मिनट तक चली इस बैठक में INDIA ब्लॉक के रोडमैप और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह मुलाकात टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच हुई बैठक के ठीक एक दिन बाद हुई है.
टीएमसी के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी ने दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की बैठक में उठाए गए मुद्दों और हैदराबाद में होने वाली अगली प्रस्तावित बैठक की तैयारियों पर चर्चा की. दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले महीनों में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विपक्षी दल कैसे अधिक तालमेल के साथ काम कर सकते हैं.
इस बीच, कांग्रेस और टीएमसी के बीच बढ़ती नजदीकियों को देखकर दोनों पार्टियों के विलय की अटकलें भी तेज हो गईं, जिसे टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने पूरी तरह आधारहीन बताया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सोनिया-ममता मुलाकात को लेकर आ रही कुछ खबरें पूरी तरह गलत हैं और दोनों नेताओं के बीच केवल सौहार्दपूर्ण और व्यक्तिगत बातें हुईं.
एक तरफ दिल्ली में विपक्षी एकजुटता की तस्वीर सामने आई, वहीं दूसरी ओर टीएमसी का आंतरिक संकट लगातार गहराता जा रहा है. बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया. इस सप्ताह पार्टी छोड़ने वाली वह दूसरी सांसद हैं. इससे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय भी टीएमसी और राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं. इसके अलावा 19 लोकसभा सांसदों ने भी बागी तेवर इख्तियार कर लिए हैं.
टीएमसी की मुश्किलें केवल संसद तक सीमित नहीं हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. पिछले सप्ताह 80 में से 58 विधायक पार्टी नेतृत्व से अलग हो गए और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधानसभा में मुख्य विपक्षी गुट के रूप में मान्यता प्राप्त कर ली. बागी गुट अब दावा कर रहा है कि उसके साथ विधायकों की संख्या और बढ़ चुकी है.