संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अब यह सिद्धियों को भरने का वक्त है. उन्होंने कहा, जहां तर्क, तथ्य होते हैं, वहां शोर-शराबे की कोई जरूरत नहीं होती.अगर आपके तर्क और तथ्य मजबूत हैं तो आवाज ऊंची करने की कोई ज़रूरत नहीं है. मुझे उम्मीद है कि संसद में चर्चाएं तर्क और तथ्यों के आधार पर होंगी. हर आवाज़ को सुने जाने का मौका मिलना चाहिए.