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प्रोटोकॉल की बड़ी चूक, राहुल गांधी नाराज... कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम' विवाद की इनसाइड स्टोरी

स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम को लेकर हुए विवाद के पीछे खराब समन्वय और शीर्ष नेताओं को पूरी जानकारी न दिए जाने की बात सामने आई है. कांग्रेस के भीतर इस घटना को लेकर नाराजगी है, जबकि पार्टी ने सोनिया गांधी द्वारा राष्ट्रीय गीत पर आपत्ति जताने के आरोपों को खारिज किया है.

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वंदे मातरम विवाद को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी. (Photo- ITG)
वंदे मातरम विवाद को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी. (Photo- ITG)

स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर पैदा हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जिसमें कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने के आरोप लगाए जा रहे हैं. 15 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम के दौरान बनी इस स्थिति के पीछे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रोटोकॉल अधिकारियों के बीच खराब समन्वय और संवाद को वजह माना जा रहा है.

एक सीनियर नेता के अनुसार, कार्यक्रम से कुछ दिन पहले जयराम रमेश और कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय के बीच वंदे मातरम को लेकर बातचीत हुई थी. इस दौरान चर्चा हुई थी कि कानून पारित होने के बाद राष्ट्रीय गीत को पूरा गाया जाना चाहिए.हालांकि, ऐसा लगता है कि यह जानकारी कांग्रेस के शीर्ष तीन नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक नहीं पहुंचाई गई. इसी वजह से कार्यक्रम के दौरान तीनों नेता इस स्थिति के लिए तैयार नहीं थे.

पूर्व भारतीय युवा कांग्रेस अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास को हाल ही में सेवा दल का प्रमुख नियुक्त किया गया है और वे इस जिम्मेदारी में अपेक्षाकृत नए हैं. कार्यक्रम के दौरान पूर्व सेवा दल प्रमुख लालजी देसाई को सोनिया गांधी से बात करते हुए देखा गया. इसी दौरान वंदे मातरम का गायन तीसरे अंतरे तक जारी रहा और सोनिया गांधी इशारा करती नजर आईं.

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इस बात की जानकारी नहीं थी

इंडिया टुडे को यह भी पता चला है कि कार्यक्रम से एक दिन पहले आयोजन के क्रम और पूरे इवेंट फ्लो की रिहर्सल भी की गई थी. हालांकि, नेताओं को कार्यक्रम के अहम विवरण और क्रम में हुए बदलावों के बारे में जानकारी नहीं दी गई.

प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारी मनीष चतरथ इंदिरा भवन में इस तरह के कार्यक्रमों को सुचारु रूप से आयोजित कराने के लिए नामित अधिकारी हैं. इंदिरा भवन के सभी मामलों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास है. जब सोनिया गांधी ने इशारा किया, उस समय मनीष चतरथ भी पीछे दिखाई दिए.  पार्टी मुख्यालय से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों और मामलों की देखरेख कोषाध्यक्ष और महासचिव (संगठन) करते हैं. कोषाध्यक्ष अजय माकन राहुल गांधी के दाईं ओर खड़े थे, जबकि महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल उस समय केरल में थे.

यह भी पढ़ें: 'मैं खड़ा हो जाऊंगा, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाऊंगा', कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने साफ किया रुख

कांग्रेस के भीतर नाराजगी

घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर नाराजगी है, क्योंकि इससे शीर्ष नेतृत्व को अनावश्यक और टाली जा सकने वाली असहज स्थिति का सामना करना पड़ा. एक सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया कि राहुल गांधी इस घटना और उन्हें इसकी जानकारी  न दिए जाने को लेकर नाराज हैं इसकी जानकारी न दिए जाने से नाराज थे. हालांकि, इस मामले पर उनका रुख क्या था, यह स्पष्ट नहीं है.

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कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि सोनिया गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं. पार्टी का कोई नेता इस मामले पर आधिकारिक रूप से कुछ बोलने को तैयार नहीं था. कांग्रेस नेताओं ने उन सुझावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय गीत को लेकर कोई आपत्ति जताई थी. जयराम रमेश ने कहा है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सिफारिश के बाद 1937 में कांग्रेस कार्य समिति ने वंदे मातरम के पहले दो अंतरे गाने का प्रस्ताव पारित किया था.

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