अमेरिका का नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट शोध के बाद तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गई तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियों को भारत सरकार को वापस कर रहा है. इन कलाकृतियों में चोल काल (990 ईस्वी) की 'शिव नटराज', 12वीं शताब्दी की 'सोमास्कंद' और विजयनगर काल (16th सदी) की 'संत सुंदरर और परवई' की मूर्तियां शामिल हैं. यह वापसी बुधवार, 28 जनवरी 2026 को घोषित की गई, जब शोधकर्ताओं ने पुष्टि कर दी कि इन्हें 1956 से 1959 के बीच तमिलनाडु के मंदिरों में देखा गया था.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन नतीजों की समीक्षा करके मूर्तियों के अवैध निष्कासन की पुष्टि की है. म्यूजियम के निदेशक चेस रॉबिन्सन ने इसे नैतिक संग्रहालय प्रथाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बताया है.
समझौते के तहत शिव नटराज की मूर्ति लंबी अवधि के लोन पर म्यूजियम में प्रदर्शित रहेगी, जिससे इसके अवैध इतिहास और वापसी के सफर को दुनिया के सामने रखा जा सके. अमेरिका साल 2016 से अब तक भारत को 1500 सांस्कृतिक कलाकृतियां लौटा चुका है.
चोरी पकड़ने के लिए हुआ रिसर्च
म्यूजियम ने अपने दक्षिण एशियाई संग्रह की व्यवस्थित समीक्षा की. साल 2023 में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पांडिचेरी के फोटो आर्काइव्स की मदद से पता चला कि ये मूर्तियां मूल रूप से तमिलनाडु के तंजावुर जिले और अन्य गांवों के मंदिरों में थीं. जांच में पाया गया कि 'शिव नटराज' की मूर्ति को 2002 में न्यूयॉर्क की एक गैलरी से खरीदा गया था, जिसने बिक्री के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए थे.
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बेशकीमती मूर्तियों की ऐतिहासिक अहमियत...
ये मूर्तियां दक्षिण भारतीय कांस्य ढलाई की समृद्ध परंपरा का बेहतरीन उदाहरण हैं. शिव नटराज की मूर्ति तंजावुर के श्री भाव औषधेश्वर मंदिर से जुड़ी है, जबकि सोमास्कंद की मूर्ति अलात्तूर गांव के विश्वनाथ मंदिर की है. संत सुंदरर और परवई की मूर्ति को 1956 में वीरसोलपुरम गांव के शिव मंदिर में फोटो खींचा गया था. ये सभी मूर्तियां मूल रूप से पवित्र थीं और मंदिर के जुलूसों में इस्तेमाल की जाती थीं.
अमेरिका से कलाकृतियों की वापसी का सिलसिला
भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संपदा की वापसी में तेजी आई है. हाल ही में नवंबर 2024 में 10 मिलियन डॉलर मूल्य की 1,440 लूटी गई वस्तुएं लौटाई गईं. सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान 297 पुरावशेष वापस मिले थे. इसके अलावा अक्टूबर 2022 में सुभाष कपूर जैसे बदनाम डीलरों से जुड़ी 307 वस्तुएं और जून 2023 में 105 अन्य कलाकृतियां भारत वापस आईं.
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