तमिलनाडु की टीवीके (TVK) सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसने तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों की चोटी पर स्थित पत्थर के खंभे पर पारंपरिक देव पूजन के लिए दीया जलाने के सिंगल जज बेंच के निर्देश को बरकरार रखा था. मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इसी साल 7 जनवरी को ये आदेश दिया था, जिसके तहत एक दरगाह से महज 15 मीटर की दूरी पर बने इस स्तंभ पर जिला प्रशासन को एक नियंत्रित तरीके से दीप जलाने की अनुमति दी गई थी. सरकार ने अब इस पारंपरिक आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की है.
मदुरै के तिरुपरनकुंद्रम में मुरुगन मंदिर की पहाड़ी पर सदियों से 'कार्तिकेय दीपम' के खास मौके पर 'दीपाथून' यानी पत्थर के खंभे पर अखंड दीप जलाने की बेहद पुरानी परंपरा है. ये दीप स्तंभ पहाड़ी के ऊपर स्थित प्रसिद्ध सिकंदर बादशाह दरगाह से महज 15 मीटर की दूरी पर बना हुआ है, जिसे लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ था.
तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर भगवान कार्तिकेय, मुरुगन और सरवणन को समर्पित है जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है. ये वही पवित्र पहाड़ी है, जहां भगवान कार्तिकेय और देवसेना का दिव्य विवाह हुआ था. संगम साहित्य में भी इस ऐतिहासिक मंदिर को अत्यंत प्राचीन और पवित्र माना गया है.
कार्तिक मास के दौरान बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में इस पहाड़ी पर एक विशाल दीपक (महादीपम) प्रज्वलित किया जाता है. ऐतिहासिक रूप से ये पवित्र दीपक पहले उचिपिल्लैयार मंदिर के पास जलाया जाता था, लेकिन हाल के दिनों में पहाड़ी पर स्थित दरगाह और मंदिर के बीच बने दीपथून (स्तंभ) पर दीपक जलाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था.