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'सोनम वांगचुक को दोबारा मिले अनशन की इजाजत', पुलिस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी

सोनम वांगचुक को अनशन के 21वें दिन जंतर मंतर से हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. वकील नरेंद्र मिश्रा ने चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर इसे जनहित याचिका मानने की मांग की है. याचिका में NEET गड़बड़ी, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाए गए हैं. वांगचुक इन्हीं मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे.

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सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई को चिट्ठी लिखी गई है (Photo: ITG)
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई को चिट्ठी लिखी गई है (Photo: ITG)

सोनम वांगचुक को अनशन के 20 दिन बाद जंतर मंतर से हटाकर चिकित्सा सहायता दिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. वकील नरेंद्र मिश्रा ने चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनने का आग्रह किया है. इस याचिका में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई है.

याचिका में कहा गया है कि यह विरोध प्रदर्शन कई अहम मुद्दों से जुड़ा है. इनमें NEET परीक्षा में गड़बड़ी, बार-बार पेपर लीक होना, सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और मार्कशीट और शैक्षणिक रिकॉर्ड की सच्चाई जैसे मुद्दे शामिल हैं. याचिका के मुताबिक, पेपर लीक के अलावा ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां एक व्यक्ति परीक्षा देता है जबकि किसी और की कॉपी जांची जाती है. इन मुद्दों को लेकर लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा है और इसीलिए इन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत बताई गई है.

इस आंदोलन का नेतृत्व सोनम वांगचुक कर रहे थे और वे खुद भी भूख हड़ताल पर बैठे थे. पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटा दिया, जिसके बाद आंदोलन अपने मुख्य चेहरे के बिना रह गया. याचिका में यह भी बताया गया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी परीक्षाओं से जुड़ी इन गड़बड़ियों पर पहले सार्वजनिक तौर पर चिंता जता चुके हैं.

यह भी पढ़ें: मानव श्रृंखला, धक्का-मुक्की और नारेबाजी... सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के दौरान क्या-क्या हुआ? PHOTOS में देखें

याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का हवाला देते हुए कहा है कि प्रशासन को कोई भी कार्रवाई करते समय निष्पक्ष और संतुलित रवैया अपनाना चाहिए. साथ ही अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा का हवाला देते हुए यह आशंका जताई गई है कि भूख हड़ताल के दौरान अगर किसी की तबीयत बिगड़ती है तो वहां पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न होने से जान को खतरा हो सकता है.

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रखने की अनुमति देने का निर्देश दिया जाए. साथ ही प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टर, दवाएं और जरूरी मेडिकल इंतजाम करने और बेवजह सख्ती न करने को भी कहा गया है. अगर वांगचुक को किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं पाया जाता है तो उन्हें तुरंत रिहा कर प्रदर्शन स्थल पर वापस भेजने की मांग भी की गई है.

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