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Save Soil: सद्गुरु की नई किताब में 'सेव सॉयल' अभियान की अनकही कहानियां

सद्गुरु के 100 दिवसीय 'सेव सॉयल' अभियान की अनदेखी कहानियां और छुपे हुए पहलू अब एक विशेष पुस्तक में संजोए गए हैं. इस किताब में उनकी 27 देशों की मोटरसाइकिल यात्रा, स्वयंसेवकों के अनुभव और मिट्टी संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयासों की जीवंत झलक मिलती है. राधे जग्गी ने इसे संकलित कर अभियान की भावना को नई पहचान दी है.

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ये किताब भरतनाट्यम नृत्यांगना और सद्गुरु की बेटी राधे जग्गी द्वारा संकलित है. (Photo: ITG)
ये किताब भरतनाट्यम नृत्यांगना और सद्गुरु की बेटी राधे जग्गी द्वारा संकलित है. (Photo: ITG)

मिट्टी बचाओ (सेव सॉइल) अभियान के पीछे की अनकही कहानियों, अनदेखे पलों और वैश्विक ऊर्जा को दर्शाने वाली एक नई बुक रिलीज़ हुई है. सद्गुरु ने वैश्विक 'सेव सॉइल' अभियान की शुरुआत की है. 'सेव सॉइल: 100 डेज़ दैट मूवेड द वर्ल्ड' शीर्षक वाली इस किताब को भरतनाट्यम नृत्यांगना और कलाकार राधे जग्गी द्वारा संकलित किया गया है. वो सद्गुरु की बेटी हैं.

दृश्यों से भरपूर यह पुस्तक सद्गुरु की 27 देशों की उस ऐतिहासिक 100-दिवसीय और 30 हजार किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा की प्रभावशाली कहानियों, पर्दे के पीछे के पलों और अनदेखी तस्वीरों को संजोती है, जो मिट्टी की बचाने की तत्काल आवश्यकता के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी. अभियान के साथ यात्रा करने वाले स्वयंसेवकों और आयोजकों के प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से यह पुस्तक पाठकों को इस अभियान के पीछे के असाधारण प्रयास, ऊर्जा और चुनौतियों की एक आत्मीय झलक दिखाती है.

राधे जग्गी भी 'सेव सॉइल' अभियान में सक्रिय रूप से शामिल थीं. उन्होंने यात्रा के दौरान कई स्थानों पर अपने शास्त्रीय नृत्य ग्रुप 'प्रोजेक्ट संस्कृति' के साथ प्रस्तुतियां दीं. मिट्टी की कहानी पर आधारित उनके सामूहिक प्रदर्शनों ने दर्शकों को आकर्षित किया और अभियान के संदेश को व्यापक बनाने में मदद की. अभियान के बारे में और पुस्तक लिखने की प्रेरणा पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ''यह यात्रा ऐसे अनगिनत क्षणों से भरी थी, जिन्हें अधिकांश लोगों ने कभी नहीं देखा. विभिन्न महाद्वीपों के स्वयंसेवकों ने असाधारण प्रतिबद्धता दिखाई. मिट्टी संरक्षण के संदेश को करोड़ों लोगों तक पहुंचाने के लिए अक्सर पर्दे के पीछे रहकर काम किया. मुझे लगा कि इन आवाजों और अनुभवों को दर्ज करना महत्वपूर्ण है, ताकि लोग उस मानवीय ऊर्जा को समझ सकें, जिसने वास्तव में इस अभियान को सफल बनाया. 'सेव सॉइल: 100 डेज दैट मूवेड द वर्ल्ड' उन कहानियों और उस जज्बे को संजोने का एक प्रयास है, जिसने हमारी मिट्टी के भविष्य के लिए लोगों को एकजुट किया.''

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radha jaggi

राधे जग्गी ने आगे कहा, ''इस यात्रा का हिस्सा बनने का अर्थ सद्गुरु की अटूट प्रतिबद्धता को करीब से देखना भी था. मात्र 100 दिनों में 27 देशों की यात्रा करना शारीरिक रूप से कठिन था, फिर भी हम जहां भी गए, हमें उन लोगों का भरपूर प्यार और समर्थन मिला, जिन्होंने अपनी मिट्टी के संरक्षण के महत्व को समझा.'' 6 अध्याय और 464 पृष्ठों में व्यवस्थित, यह पुस्तक 'सेव सॉइल' यात्रा के अनावरण और शुरुआत से लेकर यूरोप और मध्य पूर्व के तूफानी अभियान और भारत में मिले शानदार एवं उत्साहपूर्ण स्वागत तक का विवरण देती है.

इसमें शामिल कई आवाजों में से एक जोरान की है, जो उत्तरी मैसेडोनिया के एक स्वयंसेवक हैं. वे याद करते हैं कि कैसे उनकी मां ने, 45 वर्षों तक खेती करने के बाद, एक बार उन्हें खेती शुरू करने से हतोत्साहित किया था, क्योंकि मिट्टी अब पहले जैसी फसल पैदा नहीं कर रही थी. कई वर्षों के बाद 'सेव सॉइल' यात्रा के दौरान उन्हें अहसास हुआ कि उनकी मां की चिंता खेती योग्य मिट्टी के सामने आने वाले एक बहुत बड़े वैश्विक संकट का प्रतिबिंब थी. यात्रा के उन भावुक करने वाले क्षणों को भी यह पुस्तक साझा करती है, जहां स्वयंसेवकों ने बताया कि कैसे समाज के हर वर्ग के लोग घंटों तक, कभी-कभी देर रात तक, सद्गुरु की केवल एक झलक पाने या एक पल के लिए उनका अभिवादन करने के लिए इंतजार करते थे.

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वे मिट्टी बचाने के मुद्दे की गंभीरता और तत्काल आवश्यकता के कारण वहां खिंचे चले आए थे. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित 'सेव सॉयल: 100 डेज़ दैट मूव्ड द वर्ल्ड' अमेजन पर उपलब्ध है. 29 अप्रैल से फ्लिपकार्ट, ईशा लाइफ और देशभर के प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं पर भी उपलब्ध होगी.

गौरतलब है कि मिट्टी के क्षरण के वैश्विक संकट के समाधान के लिए सद्गुरु द्वारा साल 2022 में 'सेव सॉइल' अभियान की शुरुआत की गई थी. इसका उद्देश्य ऐसी नीतियों का समर्थन करना है, जो कृषि योग्य मिट्टी में जैविक अंश को न्यूनतम 3-6 प्रतिशत तक बढ़ा सकें. यह अभियान सरकारों, वैज्ञानिकों, किसानों, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और नागरिकों को एक साथ लाता है, ताकि खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा, जैव विविधता और जलवायु स्थिरता के आधार के रूप में मिट्टी का संरक्षण करने की आवश्यकता को रेखांकित किया जा सके. 

पिछले चार वर्षों में यह दुनिया भर में 4.1 अरब से अधिक लोगों तक पहुंचा है. इससे मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करने के महत्व की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित हुआ है. यह अभियान मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करने वाले उपायों को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माताओं, संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ काम करना जारी रखे हुए है, विशेष रूप से कृषि योग्य मिट्टी में जैविक तत्वों को बढ़ाकर और टिकाऊ भूमि प्रबंधन प्रणालियों को बढ़ावा देकर. यह उन किसान-केंद्रित कार्यक्रमों को भी सहारा देता है, जो जल धारण क्षमता में सुधार करने, सिंथेटिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी के अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करते हैं.

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