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सालेहा खातून और सरबानू बेगम को बांग्लादेश डिपोर्ट करने पर अंतरिम रोक, SC का निर्देश

असम में विदेशी घोषित की गई दो महिलाओं को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके बांग्लादेश निर्वासन पर अंतरिम रोक लगा दी है. सालेहा खातून और सरबानू बेगम मार्च से गोलपारा डिटेंशन सेंटर में बंद हैं. अदालत ने केंद्र और असम सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक दोनों को डिपोर्ट न करने का निर्देश दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ग्रीष्मावकाश के बाद 22 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट ग्रीष्मावकाश के बाद 22 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा (फाइल फोटो)

असम के फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित की गई दो महिलाओं को वापस उनके देश बांग्लादेश भेजे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. सालेहा खातून और सरबानू बेगम नाम की इन महिलाओं की तरफ से दाखिल याचिओं में आरोप लगाया गया है कि उन्हें असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल से विदेशी घोषित किए जाने के बाद हिरासत में लिया गया है.

दोनों महिलाओं को मार्च 2026 से गोलपारा डिटेंशन सेंटर में बंद रखा गया है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी एस मोहना की वेकेशन बेंच ने केंद्र सरकार और असम सरकार को नोटिस जारी कर उन महिलाओं की याचिकाओं पर जवाब मांगा, जिन्हें फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया है.

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ग्रीष्मावकाश के बाद 22 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा. इस बीच, कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर सालेहा खातून और सरबानू बेगम हिरासत में रहती हैं, तो उन्हें सुनवाई की अगली तारीख तक डिपोर्ट नहीं किया जाएगा.

बता दें कि असम फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल एक विशेष अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो यह तय करता है कि किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक माना जाए या विदेशी. अगर किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह होता है, तो उसका मामला Foreigners Tribunal में भेजा जा सकता है. ट्रिब्यूनल दस्तावेजों और सबूतों की जांच करके फैसला देता है कि वह व्यक्ति भारतीय है या नहीं.

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असम में अवैध प्रवास और नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है. इसी वजह से यहां फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है.

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