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रामनाथ गोयनका पुरस्कार में इंडिया टुडे ग्रुप का परचम, अरविंद ओझा और श्रेया चटर्जी ने जीता अवॉर्ड

इंडिया टुडे ग्रुप ने रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स में इतिहास रच दिया है. यह देश का इकलौता ऐसा न्यूज नेटवर्क बन गया है, जिसे खोजी पत्रकारिता के लिए ब्रॉडकास्ट (TV) और प्रिंट/डिजिटल, दोनों ही प्लेटफॉर्म पर सम्मानित किया गया है. ग्रुप की श्रेया चटर्जी और अरविंद ओझा को उनकी साहसी रिपोर्ट्स के लिए उपराष्ट्रपति ने इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा है.

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उपराष्ट्रपति से रामनाथ गोयनका अवॉर्ड लेते श्रेया चटर्जी और अरविंद ओझा (Photo: ITG)
उपराष्ट्रपति से रामनाथ गोयनका अवॉर्ड लेते श्रेया चटर्जी और अरविंद ओझा (Photo: ITG)

पत्रकारिता के क्षेत्र में गोल्ड स्टैंडर्ड माने जाने वाले 'रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड्स' में एक बार फिर इंडिया टुडे ग्रुप की धाक देखने को मिली है. शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को आयोजित भव्य समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने ग्रुप के कई पत्रकारों को उनकी साहसी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया.

इंडिया टुडे ग्रुप देश का इकलौता ऐसा न्यूज़ नेटवर्क बन गया है, जिसे खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) के लिए ब्रॉडकास्ट और डिजिटल, दोनों ही प्लेटफॉर्म पर यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिला है.

इंडिया टुडे टीवी की श्रेया चटर्जी को 'इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग - ब्रॉडकास्ट' कैटेगरी में विजेता चुना गया है. श्रेया ने अपनी खास रिपोर्ट 'ऑपरेशन इलीगल्स' के जरिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती घुसपैठ की जमीनी हकीकत को दुनिया के सामने रखा था. उनकी इस रिपोर्टिंग ने न केवल सीमा सुरक्षा के संवेदनशील मुद्दे को उठाया, बल्कि गहरी फील्ड वर्क और सटीक जानकारी के जरिए नीति-निर्माताओं का ध्यान भी इस ओर खींचा.

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वहीं, 'सिविक जर्नलिज्म - डिजिटल' कैटेगरी में श्रेया चटर्जी और अरविंद ओझा की जोड़ी को सम्मानित किया गया. इन दोनों पत्रकारों ने दिल्ली के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे अवैध वाटर एक्सट्रैक्शन और 'टैंकर माफिया' के खेल पर एक बड़ी रिपोर्ट की थी. indiatoday.in पर छपी इस रिपोर्ट ने सिस्टम की खामियों और पर्यावरण से जुड़े गंभीर खतरों को उजागर किया, जिसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ रहा था.

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सफलता की इस कड़ी में aajtak.in को भी 'इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग - डिजिटल' कैटेगरी में सम्मानित किया गया है. यह अवॉर्ड 'द सरोगेट मदर मार्केट' नाम की एक प्रभावशाली रिपोर्ट के लिए मिला. इस स्टोरी ने सरोगेसी के मानवीय, कानूनी और नैतिक पहलुओं को बहुत गहराई से पेश किया था, जिससे इस पूरे इकोसिस्टम की जवाबदेही तय करने में मदद मिली.

इंडिया टुडे ग्रुप की यह जीत उसकी निडर और विश्वसनीय पत्रकारिता का प्रमाण है. ग्रुप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चाहे प्रिंट हो, डिजिटल या ब्रॉडकास्ट, जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और सिस्टम को जवाबदेह बनाने में वह हमेशा सबसे आगे रहता है.

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