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अयोध्या मंदिर चंदा चोरी की जांच के लिए CJI को लिखा गया पत्र, स्वतंत्र जांच की मांग

राम मंदिर दान हेराफेरी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में पत्र याचिका दाखिल की गई है. इसमें स्वतंत्र जांच और एफआईआर की मांग की गई है.

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राम मंदिर दान हेराफेरी मामले में चीफ जस्टिस से लगाई गई गुहार (File Photo: ITG)
राम मंदिर दान हेराफेरी मामले में चीफ जस्टिस से लगाई गई गुहार (File Photo: ITG)

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे यानी दान की चोरी के मामले मे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र याचिका भेजी गई है. सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले अनूप अवस्थी ने चीफ जस्टिस से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की गुजारिश की है. 

पत्र याचिका में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान, चढ़ावे की हेराफेरी से जुड़े आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे स्वतंत्र जांच कराए जाने की गुहार लगाई गई है.

पत्र याचिका मे कहा गया है कि लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए एफआईआर दर्ज करने और एक स्वतंत्र एजेंसी से कोर्ट की निगरानी में जांच के लिए निर्देश जारी किया जाए.

अखिलेश के आरोप के बाद बाहर आया मामला...

अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. इस मामले में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, उनके पास से लाखों रुपये की बरामदगी भी कई है. मामला बढ़ने के बाद जांच तेज कर दी गई है.

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इस मामले पर चिंता जताने वाले नेताओं में अब ,सीनियर बीजेपी नेता और राम जन्मभूमि आंदोलन के अनुभवी नेता विनय कटियार भी शामिल हो गए हैं. रविवार को अपने घर पर पत्रकारों से बात करते हुए कटियार ने कहा कि अगर ट्रस्टी खुद ही गड़बड़ी में शामिल पाए जाते हैं, तो इससे मंदिर प्रोजेक्ट का मकसद ही खत्म हो जाएगा. उन्होंने कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सीनियर पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे यह पक्का करें कि जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर चंदा विवाद: विनय कटियार और चंपत राय में हॉट-टॉक! लगा गंभीर आरोप

कटियार ने कहा कि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में एसआईटी गठित की गई है और अब दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा क्योंकि प्रधानमंत्री खुद इस पर नजर रख रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि चंपत राय को बर्खास्त करना ही पड़ेगा क्योंकि मंदिर का चढ़ावा निवास स्थान पर ले जाना अपराध है और इसका जवाब उन्हें देना होगा. 

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