मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूती से आगे बढ़ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत अगले 10 से 11 सालों में लगभग 500 गीगावाट (GW) अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है.
सोमवार को पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने देश के ऊर्जा भविष्य को लेकर कई बड़ी बातें कहीं.
PM मोदी ने कहा कि दुनिया ने कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक कई बड़े आर्थिक झटकों का सामना किया है. उन्होंने कहा, 'पश्चिम एशिया का संकट तो अभी भी जारी है, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों को इस बात पर गर्व है कि हमने अब तक इस संकट को बेहतर तरीके से संभाला है और इसके बावजूद भारत की ग्रोथ ऊंची बनी हुई है.'
उन्होंने बताया कि अगर भारत ने पिछले 10 सालों में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश नहीं किया होता और नई व्यवस्थाएं नहीं बनाई होतीं, तो भारत में ऊर्जा संकट दुनिया के दूसरे हिस्सों से भी ज्यादा गंभीर हो सकता था. उनके मुताबिक ऊर्जा सुरक्षा ही असल में आर्थिक सुरक्षा का आधार है.
समय से पहले हासिल किया पेरिस समझौते का लक्ष्य
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत की उपलब्धियों का ब्योरा दिया. उन्होंने बताया कि भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों पर आधारित है. पेरिस समझौते के तहत भारत ने 2030 तक इस लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन देश ने इसे समय से 5 साल पहले यानी 2025 में ही पूरा कर लिया.
फिलहाल भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 300 गीगावाट से ज्यादा हो चुकी है. पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हर हाल में हासिल किया जाएगा.
20 लाख करोड़ के निवेश के अवसर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत नीतिगत और राजनीतिक स्थिरता देता है, जो अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का सबसे बेहतरीन माहौल बनाता है. उन्होंने बताया कि इस दशक के अंत तक भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश के मौके उभरकर सामने आएंगे.
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत 50 लाख टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है. सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
प्रधानमंत्री ने किसानों और स्टार्टअप्स के लिए अपना विजन शेयर किया. उन्होंने कहा, 'मेरा विजन है कि हमारा अन्नदाता ही ऊर्जादाता बने. किसान अपनी खाली जमीन पर सोलर पैनल लगाएं, इसे हमें ज्यादा से ज्यादा गांवों में सुनिश्चित करना होगा.'
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उन्होंने IITs, स्टार्टअप्स और उद्यमियों से ऐसे इनोवेशन और मॉडल विकसित करने की अपील की, जिससे एक आम परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो सकें. पीएम ने बताया कि देश में अब तक 44,000 से ज्यादा सरकारी भवनों को सोलर एनर्जी से जोड़ा जा चुका है, जिससे सालाना लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है.