मणिपुर में छह नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया. इसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. मणिपुर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लुंगौलाल वैफेई, और लुनमिनथांग सितलहौ उर्फ जैक के रूप में हुई है. दोनों आरोपी कांगपोकपी जिले के रहने वाले हैं.
पुलिस के मुताबिक, एनआईए, मणिपुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने फॉलो-अप इंवेस्टिगेशन के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया. एजेंसियों ने कहा कि मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है. इससे पहले 10 जुलाई को संयुक्त टीम ने इसी मामले में वाथम प्रदीप (42) और उनकी पत्नी वाथम ओंगबी आयिंगबी उर्फ मंगाइग (44) को गिरफ्तार किया था. दोनों कांगपोकपी जिले के लेलोन वैफेई गांव के रहने वाले हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में कांगपोकपी जिले के एक पुलिसकर्मी से भी पूछताछ की गई है. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अपहरण और हत्या में उसकी भूमिका की अभी पुष्टि नहीं हुई है.
क्या है पूरा मामला?
13 मई 2026 को मणिपुर के कांगपोकपी और नोनेय जिलों में हुए दो अलग-अलग घात लगाकर किए गए हमलों में चार लोगों की मौत हो गई थी. इनमें तीन चर्च नेता और एक नागा नागरिक शामिल थे. इन हमलों के बाद कांगपोकपी जिले के लेलोन वैफेई गांव में यात्रा कर रहे 20 नागा नागरिकों का कथित तौर पर अपहरण कर उन्हें बंधक बना लिया गया. उसी शाम नागा समूहों ने 28 कुकी समुदाय के लोगों को भी कथित रूप से बंधक बना लिया.
मणिपुर सरकार और विभिन्न संगठनों की अपील के बाद 15 मई को दोनों पक्षों ने 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया. हालांकि, 14 कुकी और छह नागा नागरिक अब भी बंधक बने रहे. बाद में 9 जून को नागा समूहों ने 14 कुकी नागरिकों को सुरक्षित रिहा कर दिया, लेकिन अगले दिन 10 जून को छह नागा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव खाराम वैफेई गांव के पास बरामद हुए.
KZC अध्यक्ष ने जताया था अफसोस
कुकी-जो काउंसिल (KZC) के अध्यक्ष हेनलिएंथांग थांगलेट ने 25 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में छह नागा नागरिकों की हत्या पर अफसोस जताते हुए कहा था कि यह भावनाओं में बहकर की गई बड़ी गलती थी. हालांकि, अगले दिन KZC ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि अध्यक्ष का बयान केवल मानवीय संवेदना और नैतिक जिम्मेदारी के तहत दिया गया था. इसका उद्देश्य पूरे कुकी-जो समुदाय को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना नहीं था.
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा बाद में अन्य समुदायों तक भी फैल गई. इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. करीब एक वर्ष तक राष्ट्रपति शासन रहने के बाद इस वर्ष फरवरी में राज्य में नई सरकार का गठन किया गया, जिसमें जातीय संतुलन बनाए रखने के लिए तीनों प्रमुख समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. वहीं, छह नागा नागरिकों की हत्या के मामले में एनआईए की जांच अभी भी जारी है और एजेंसियां अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हैं.