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24 साल, 45 बड़े पेपर लीक और प्रभावित करोड़ों छात्र... आखिर किसके भरोसे है युवाओं का भविष्य?

नीट पेपर लीक विवाद और CBSE के OSM सिस्टम में खामियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत से लेकर छात्रों द्वारा उजागर की गई तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों तक, सवाल यही है कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से कब तक खिलवाड़ होगा.

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नीट पेपर लीक से CBSE एग्जाम में खामियों तक, पूरी शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेर में है. (Photo: Representational)
नीट पेपर लीक से CBSE एग्जाम में खामियों तक, पूरी शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेर में है. (Photo: Representational)

छात्र और युवा किसी भी देश का भविष्य होते हैं. लेकिन इस साल पहले NEET पेपर लीक और फिर CBSE के OSM सिस्टम में सामने आई खामियों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या छात्रों के भविष्य के साथ सिस्टम खिलवाड़ कर रहा है? एक तरफ मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, तो दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े स्कूल शिक्षा बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगे. 

ऐसे में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है. इस पूरे विवाद के केंद्र में मध्य प्रदेश की आकांक्षा चतुर्वेदी की दर्दनाक कहानी भी है. आकांक्षा ने मानसिक दबाव के बीच अपनी जान गंवा दी. उसने अपने माता-पिता के लिए जो शब्द लिखे, उन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया. उसके शब्द सिर्फ निराशा नहीं, बल्कि मानसिक दबाव की कहानी हैं, जिससे लाखों परीक्षार्थी गुजरते हैं. 

आकांक्षा चतुर्वेदी ने लिखा था, "मम्मी... पापा... आपका मुझ पर भरोसा था कि आपकी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बन जाएगी. लेकिन दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर. पहले NEET के पेपर में मेरे अच्छे मार्क्स आ रहे थे, लेकिन अब दोबारा पेपर अच्छा जाए इसकी क्या गारंटी. सॉरी मम्मी... पापा... मैंने सब बर्बाद कर दिया आप दोनों का..." आकांक्षा की मौत सिस्टम पर करारे तमाचे जैसा है.

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सवाल अब भी वही है कि क्या कुछ दिनों के राजनीतिक हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के बाद शिक्षा तंत्र में मौजूद खामियों और पेपर लीक माफिया पर ठोस कार्रवाई होगी?

24 साल में 45 पेपर लीक, 3.86 करोड़ छात्र प्रभावित

NEET विवाद और CBSE OSM मामले के बीच सामने आए आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं. साल 2002 से 2025 के बीच 1 लाख से अधिक उम्मीदवारों वाली 45 भर्ती और शैक्षणिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए. यानी 24 साल में 45 बड़े पेपर लीक हो गए. इसकी वजह से करीब 3 करोड़ 86 लाख छात्र प्रभावित हुए. पेपर लीक से जुड़े मामलों में 1658 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 

इन मामलों में 925 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई. लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक केवल 2 मामलों में दोषसिद्धि हो सका, जिसमें 18 लोगों को दोषी ठहराया गया. फिलहाल 43 आरोपी जेल में बंद बताए जाते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि देश में पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है. साल दर साल परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठते रहे, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकती. 

NEET विवाद के बाद सरकार पर कार्रवाई का दबाव

NEET पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों, अभिभावकों और विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. विपक्ष का कहना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी चूक हुई है. वहीं सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेता लगातार यह भरोसा दिला रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा.

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विपक्ष की ओर से सवाल पूछे जा रहे हैं और जवाबदेही तय करने की मांग भी की जा रही है. लेकिन शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाले नेटवर्क के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उसकी जड़ें काफी गहरी और पुरानी हैं. NEET विवाद के समानांतर CBSE के OSM सिस्टम को लेकर उठे सवाल भी कम गंभीर नहीं हैं. कई छात्रों ने खुद आगे आकर खामियों की ओर ध्यान दिलाया.

हैकर का दावा- सुरक्षित नहीं है CBSE OSM पोर्टल

इस मामले में वेदांत श्रीवास्तव नाम के छात्र ने सबसे पहले OSM सिस्टम से जुड़े सवाल उठाकर CBSE का ध्यान आकर्षित किया. वहीं सार्थक सिद्धांत नाम के युवा ने OSM कंट्रोल को COEMPT नाम की कंपनी को दिए जाने की प्रक्रिया में टेंडर गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया. इसके अलावा निसर्ग अधिकारी एथिकल हैकर ने दावा किया कि OSM पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. उसमें कमियां मौजूद हैं.

इन खुलासों के बाद CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया, तकनीकी सुरक्षा और कॉन्ट्रैक्ट आवंटन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए. इस मामले ने राजनीतिक रंग भी लिया और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मौका मिल गया. आरोप यह भी लगते रहे हैं कि पेपर लीक माफिया और कुछ कोचिंग नेटवर्क के बीच सांठगांठ होती है. इस बार भी कुछ आरोपियों के तार कोचिंग सेंटर्स से जुड़े मिले हैं.

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यही वजह है कि विशेषज्ञ अब केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि परीक्षा आयोजन, डिजिटल सुरक्षा, मूल्यांकन प्रक्रिया, डेटा प्रोटेक्शन और जवाबदेही के पूरे ढांचे की समीक्षा किए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. आखिरकार छात्र तो अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए परीक्षा देते हैं. 

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