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Exclusive: 'Re-NEET एग्जाम की पुख्ता तैयारी', शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया पूरा प्लान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पिछली बार नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण थी और सरकार इसे दोबारा नहीं होने देना चाहती. उन्होंने बताया कि इस बार परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं.

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धर्मेंद्र प्रधान बोले - पेपर लीक जैसी घटनाएं रोकने के लिए इस बार फुलप्रूफ सिस्टम तैयार (Photo: ITG)
धर्मेंद्र प्रधान बोले - पेपर लीक जैसी घटनाएं रोकने के लिए इस बार फुलप्रूफ सिस्टम तैयार (Photo: ITG)

नीट परीक्षा को लेकर इस बार केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दे रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि पिछली बार जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था और ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसके लिए सरकार पूरी ताकत के साथ तैयारी कर रही है.

आइए जानते हैं कि आजतक के साथ बातचीत में धर्मेंद्र प्रधान ने क्या-क्या कहा.

सवाल: नीट जो एग्जाम होना है, उसके लिए कैसी तैयारियां हैं? किस तरह के आप लोग बंदोबस्त कर रहे हैं कि जो पिछले महीने हुआ, वो दोबारा ना हो?

जवाब: पिछले महीने जो हुआ, वो दुर्भाग्यपूर्ण है. वो नहीं होनी चाहिए थी. हमारी चिंता बच्चों की मानसिक स्थिति के साथ जुड़ी हुई है और हम जिम्मेदारी लेते हैं. तब भी मैंने कहा था, पिछली बार जब मैंने आप लोगों से मुलाकात की थी, कि हम जिम्मेदारी लेते हैं और हम जिम्मेदारी लेते हैं परीक्षा को एरर-फ्री करने के लिए.

21 जून को नीट की तिथि तय हुई है. पिछले दिनों में भी नीट की एक प्रोटोकॉल है कि कैसे ये परीक्षा होगी. इसमें इस बार और मजबूती, स्पष्टता और सुरक्षा की व्यवस्था लाने की आवश्यकता है. ये सारे प्रबंधन के बाद इस बार जो घटना हुई, ये आगे कैसे ना हो, उसकी जिम्मेदारी हम सभी के ऊपर है.

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हम पूरी सरकार के सभी घटक मिलकर, 'व्होल ऑफ द गवर्नमेंट' के एक अप्रोच से, शुरू से नई अप्रोच के साथ काम कर रहे हैं. प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा होने तक और परीक्षा होने के बाद प्रश्न पत्र कैसे सुरक्षित केंद्र में लौटकर आए, इसकी फुलप्रूफ व्यवस्था की जा रही है.

राज्य सरकारों की मदद ली जा रही है. इसकी कोऑर्डिनेशन जिला स्तर तक होगी. ये स्टूडेंट-सेंट्रिक एग्जामिनेशन हो, इसीलिए हमने दायित्व लिया था कि बच्चों को थोड़ा तनाव मुक्त करने के लिए, बोझ मुक्त करने के लिए, पिछली बार की जो फीस थी, जो परीक्षा कैंसिल हुई थी, उसकी फीस हम लौटाएंगे. जो अभी की परीक्षा होगी, उसकी फीस माफ करेंगे, फीस नहीं लेंगे.

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बच्चों को हमने अवसर दिया था कि अगर वो अपना सेंटर बदलना चाहते हैं, तो वो भी हमने बच्चों को दिया. लगभग 2.5 से 3 लाख बच्चों ने अपना सेंटर बदला है और उसको भी हमने एकोमोडेट किया. राज्य सरकारों की मदद लेकर जो 5,400 केंद्र होंगे, ये कैसे सुरक्षित और सरकारी संस्थानों में हों, उसकी प्रोटोकॉल पूरी हो, उसकी एसओपी पूरी हो, उसकी सारी जिम्मेदारी हम लोग नए सिरे से तैयारी कर रहे हैं.

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सवाल: ये संभव कैसे होगा? क्योंकि ऐसा देखा गया कि घर के भीतर के लोग हैं, वो इसमें लिप्त पाए गए. जो पेपर सेट कर रहे थे, वो इसमें शामिल रहे.

जवाब: ये दुर्भाग्यजनक घटना है. ये नहीं होनी चाहिए थी. हमारे लिए भी ये बहुत चिंता का विषय है. पिछले 2024 के अनुभव के उपरांत राधाकृष्णन कमिटी बनी. राधाकृष्णन कमिटी ने जो सिफारिश किया, उसको हमने पूरा एंड-टू-एंड पालन करने का प्रयास किया. जो शॉर्ट टर्म सिफारिश थे, उनको लगभग पूरा पालन किया गया.

सवाल: विपक्ष आरोप लगा रहे हैं कि आपने पालन नहीं किया.

जवाब: राधाकृष्णन खुद एक लंबे इंटरव्यू में कह चुके हैं कि लगभग जो शॉर्ट टर्म सिफारिश थे, उनका पालन किया गया. उन्होंने तीन प्रकार की रिकमेंडेशन दी थीं - शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म. लगभग शॉर्ट टर्म की 70 से ज्यादा सिफारिश हमने पालन की हैं. उनका कुल 102 सिफारिश था. उसके बावजूद भी चूक हुई. इसके लिए हमारे मन में दुःख है, खेद है और हम बच्चों के प्रति उत्तरदायी भी हैं. हमारे पास उसके लिए क्षमा याचना के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है.

सवाल: जिस पैमाने पर आप लोग तैयारी कर रहे हैं, उसमें देख रहे हैं कि पीएमओ की तरफ से भी कहा जा रहा है कि हमारी नजर रहेगी इस पर. आपके बाकी कैबिनेट सहयोगियों के साथ भी बैठक हो रही है. यानी पूरा तंत्र इस समय लग गया है?

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जवाब: हमने कहा ना कि ये 'व्होल ऑफ द गवर्नमेंट' अप्रोच है. सरकार के किसी एक विभाग का दायित्व हो सकता है, लेकिन जिम्मेदारी तो सभी के ऊपर है. सरकार का पूरा नेतृत्व, स्वयं हमारे प्रधानमंत्री, हमारे नेता हैं. उनकी निश्चित जानकारी में सभी चीजें की जा रही हैं और उसकी मॉनिटरिंग भी हो रही है.

लेकिन मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार के सारे घटक, केवल केंद्र सरकार नहीं, राज्य सरकारों को भी साथ लेकर काम कर रहे हैं. आखिर ये 5,400 केंद्र होंगे, 1,00,000 क्लासरूम में परीक्षा होगी, 22,00,000 विद्यार्थी परीक्षा देंगे. ये सब एक कलेक्टिव अप्रोच और सामूहिक उत्तरदायित्व से पूरा काम किया जाएगा.

सवाल: एनटीए की भूमिका क्या चिंता का विषय बन रही है? इतनी सारी परीक्षाएं, लाखों छात्रों का भविष्य.

जवाब: एनटीए को एक बैकग्राउंड से बनाया गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एनटीए बनी थी. एनटीए अभी विकसित हो रही है, उसमें और भी काम बाकी है. अभी के जो एनटीए के नेतृत्व हैं, मुझे उन पर भरोसा है. वो लोग उसको और मजबूत बना पाएंगे. एनटीए एक स्वतंत्र ऑर्गेनाइजेशन है. एनटीए को हमने स्वतंत्रता दी है अपने बिल्ड-अप के लिए.

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मेरा पूरा भरोसा है कि जो अनुभव इन दिनों में हुए हैं, उसके बाद एनटीए भारत में टेक्नोलॉजी आधारित संस्था बनेगी. अभी भी एनटीए लगभग एक करोड़ विद्यार्थियों की सालाना परीक्षा कराती है. नीट हमारी एक चुनौती है. इसीलिए हमने इस बार शुरू से कहा था कि नीट को हम आने वाले सालों में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट में कन्वर्ट करेंगे. ये पेन एंड पेपर की एक नई चुनौती बन जाती है. इसके अलावा एक मत ये भी चल रहा है कि नीट को विकेंद्रीकरण किया जा सकता है. ये भी समाज में एक सोच है. देखते हैं आने वाले दिनों में क्या होगा.

लेकिन एनटीए केवल नीट नहीं, अनेक परीक्षाएं कराती है. सीयूईटी करती है, जेईई करती है, यूजीसी नेट और जेआरएफ की परीक्षाएं कराती है. ये सारी परीक्षाएं एरर-फ्री तरीके से हों, इसके लिए आने वाले दिनों में और मजबूती लाने की आवश्यकता है.

सवाल: क्योंकि आपने कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम की बात की, तो यहां सीबीएसई का जिक्र आ जाता है. इस बार जिस तरीके से परीक्षा हुई है, बताया जा रहा है कि 4 में से एक छात्र को आपत्ति हुई है और रिटेस्ट के लिए उन्होंने आवेदन किया.

जवाब:  नहीं-नहीं, आपत्ति नहीं हुई है. देखिए, इस बार सीबीएसई ने एक मूलभूत परिवर्तन किया. ऑन-स्क्रीन मार्किंग की व्यवस्था की गई. 17 लाख विद्यार्थी परीक्षा देते हैं. लाखों क्वेश्चन सेट्स हैं, लाखों आंसर शीट्स हैं. 

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इसको पारदर्शी तरीके से करने के लिए इसको डिजिटल करके ऑन-स्क्रीन मार्किंग करने की व्यवस्था की जा रही है. ये एक आधुनिक व्यवस्था है. भारत में अनेक यूनिवर्सिटी और संस्थाएं अपने परीक्षा सिस्टम को ऑन-स्क्रीन में कन्वर्ट कर चुकी हैं.

सीबीएसई ने इस प्रयोग को इस बार किया. आपत्ति इसमें आई है कि उसको थोड़ा और पूर्व तैयारी करनी चाहिए थी. हम उसको देख रहे हैं कि इसमें तथ्य कितना है और क्या किया जा सकता था. ये अब आफ्टर-थॉट चर्चा आ रही है.

लेकिन सीबीएसई की पुरानी प्रक्रिया में भी परीक्षा के बाद विद्यार्थी को अवसर मिलता था कि वो अपने पेपर का रिवैल्यूएशन कर सके. वो भी डिजिटल ही होता था. इसमें पहली बार डिजिटल हो रहा है, ऐसा नहीं है.

इस बार इवैल्यूएशन ऑन-स्क्रीन हुआ है. पहले भी ऑन-स्क्रीन इवैल्यूएशन के बाद विद्यार्थियों के मन में शंका आती थी कि मेरे और मार्क्स होने चाहिए थे. वो अपना पेपर देख पाते थे. पिछले दिनों में भी लाखों की संख्या में लोग पेपर देखते थे.

इस बार थोड़ा ज्यादा हुआ है. हमारी टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म में ज्यादा संख्या आने से लोड बढ़ा. उसको संभाला गया. पेमेंट गेटवे की कुछ चुनौती थी, लेकिन हमने उसमें हस्तक्षेप किया.

अब आंसर शीट बच्चों के हाथ में जा चुकी है. लगभग 11 लाख आंसर शीट बच्चों तक पहुंची है. अमूमन हमारा अनुमान है कि 15-20% बच्चे फिर रिवर्ट करेंगे कि क्या इसमें सुधार हो सकता है.

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इसलिए प्लेटफॉर्म की रोबस्टनेस को और मजबूत बनाया जा रहा है. हमने 4 पीएसयू बैंकों को जोड़ा है - स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, कैनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा. आज शाम को मेरी उनके साथ बैठक हुई थी. उनका प्लेटफॉर्म और सीबीएसई का प्लेटफॉर्म इंटीग्रेट हो चुका है.

आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास को दायित्व दिया गया है कि वो उसकी रोबस्टनेस, सिक्योरिटी फीचर और लोड फैक्टर को चेक करें.

सवाल: एक स्टूडेंट ने हैक करके सिस्टम में वार्निंग भेजी थी और बाद में जब ये बात सामने आई, उसने कहा कि कोई एक्शन नहीं लिया गया. क्या आपको लग रहा है कि इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लेना चाहिए था?

जवाब: मैंने जानकारी ली है. सीबीएसई उसकी एक एक्सप्लेनेशन देता है, लेकिन उसके ऊपर भी मैंने एक आईआईटी की विशेषज्ञ टीम लगाई है. सारे आरोपों को एंड-टू-एंड वेरिफिकेशन करना पड़ेगा.

हमारा कोई भी नागरिक जब प्रश्न उठाता है, तो लोकतंत्र में हमारा दायित्व बनता है कि उसको संतुष्टिपूर्ण उत्तर दें. आगे चलकर ग्लिच भी हुई, पेमेंट गेटवे में भी चैलेंज आया. इन सबको कोरिलेट करके हमने एक हाई लेवल इंक्वायरी कमिटी बैठाई है. हम तह तक जाएंगे और जो जिम्मेदार लोग होंगे, उनसे बात करेंगे.

सवाल: अब राहुल गांधी जो आरोप लगा रहे हैं और रोज सीबीएसई के मुद्दे को उठा रहे हैं, वो कहते हैं कि जिस कंपनी की भूमिका रही, वो पहले से संदिग्ध थी.

जवाब: सीबीएसई ने अपनी प्रक्रिया अपनाई है. मैंने आज सीबीएसई जाकर कहा है कि इस पूरे विषय को पारदर्शी तरीके से देखने की आवश्यकता है. उसकी प्रोक्योरमेंट पॉलिसी, उसकी डिसीजन मेकिंग - ये सब पारदर्शी होना चाहिए.

अगर कहीं आपत्ति आ रही है, कहीं आरोप आ रहे हैं, तो उसका अनुसंधान किया जाएगा. उसमें किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. चाहे वो कंपनी हो, सीबीएसई के अंदर का कोई व्यक्ति हो, बाहर का कोई हो या सरकार के अंदर से कोई हो अगर कोई गड़बड़ी हुई है, तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा.

बाकी राहुल गांधी के आरोपों की बात करें, तो उन्हें एक आदत हो गई है. भारत में किसी भी परिवर्तन को वो सहज नहीं कर पाते. उन्होंने ईवीएम का विरोध किया, डिजिटल इंडिया का विरोध किया. ये एक दिवालिया मानसिकता के लक्षण हैं.

जहां तक उस कंपनी की बात है, मेरे पास शाम तक जो जानकारी है, उसी संस्था के साथ कर्नाटक और तेलंगाना में भी काम हो रहा है. उनकी वेबसाइट और सॉफ्टवेयर पोर्टल चल रहे हैं.

राहुल गांधी जी बिना फैक्ट चेक किए बातें कहते हैं. जिस कंपनी के बारे में वो प्रश्न उठा रहे हैं, वही कंपनी उनके शासित राज्यों में भी काम कर रही है.

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