महाराष्ट्र सरकार के मराठी भाषा से जुड़े अभियन के तहत भारी जुर्माने की अफवाहों से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों में बहुत डर फैल गया. इस फैसले के विरोध में सोमवार को राज्य के कई इलाकों में ड्राइवरों ने विरोध प्रदर्शन किया. हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को हस्तक्षेप कर अफवाहों पर विराम लगाना पड़ा.
सोमवार को राज्य में टैक्सी, ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने दूसरे ड्राइवरों को यात्रियों को ले जाने से रोकने की कोशिश की. इससे सुबह के व्यस्त समय में यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा. राज्य सरकार का कहना है कि मराठी भाषा को लेकर किया गया फैसला ड्राइवरों में मराठी भाषा की समझ विकसित करना है. इसका मकसद उन्हें मराठी भाषा का एक्सपर्ट बनाना नहीं है.
सोमवार को ऑटो-रिक्शा, टैक्सी ड्राइवर्स के विरोध के वीडियो भी सोशल मीडिया पर आए हैं. कांदिवली, मलाड वेस्ट, दहिसर, अंधेरी समेत कई इलाकों में यह प्रदर्शन देखने को मिले. बोरीवली RTO के एक सीनियर रीजनल ट्रांसपोर्ट अधिकारी ने बताया कि विभाग को पता चला है कि ड्राइवरों के बीच भ्रामक जानकारी फैलाई गई थी. अफवाहें फैलाई जा रही थी कि अगर उन्हें कामकाजी रूप में मराठी नहीं आती होगी तो उन पर 5 हजार से 20 हजार तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
अफवाहें जब बढ़ती गई और इस पर विरोध प्रदर्शन होने लगा तो खुद CM को आकर इसपर सफाई देनी पड़ी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को बताया कि राज्य में मराठी की कामकाजी समझ को अनिवार्य करने के पीछे सरकार का मकसद उन्हें एक्सपर्ट बनाना नहीं था. सीएम ने बताया कि इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ड्राइवर मराठी भाषा में आसानी से बातचीत कर सकें.
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फडणवीस ने कहा कि सरकार ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए पहले ही बहुत समय दे चुकी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी ड्राइवर का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है. फडणवीस ने कहा, "उन्हें मराठी में एक्सपर्ट बनाने की कोई वजह नहीं है. उन्हें काम चलाऊ मराठी आनी चाहिए, बस यही आग्रह किया गया है. इसमें कोई सख्ती नहीं है, उन्हें बस सीखाने का प्रयास किया जा रहा है."
फडणवीस ने कहा कि पहले भी समय बढ़ाया गया है और अगर आगे भी ड्राइवर्स समय बढ़ाने की मांग करते हैं तो समय बढ़ाया जाएगा.
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने इस संबंध में बताया कि अगर RTO अधिकारी मराठी सीखने के लिए ड्राइवर्स को जो समय दिया गया है, उससे पहले ही जुर्माना लगाते हैं तो उन अधिकारियों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाएगी. उनका कहना है कि अगर एक महीने में ड्राइवर्स काम चलाऊ मराठी नहीं सीखते तो उनका लाइसेंस और बैज सस्पेंड कर दिया जाएगा और उन्हें मराठी सीखने के लिए और तीन महीने का मसय दिया जाएगा. अगर तीन महीने बाद भी वे नहीं सीख पाए तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा.
बता दें, कुछ समय पहले शिवसेना नेता संजय निरुपम ने प्रताप सरनाइक से मुलाकात की थी और उनसे जुर्माना न लगाने की अपील की थी. निरुपम ने भी यही आरोप लगाया था कि ड्राइवरों को एक महीने का नोटिस दिए बिना ही उनपर 25 हजार का जुर्माना लगाया जा रहा है.