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मणिपुर में सड़कों पर उतरे हजारों लोग, केंद्र को दिया अल्टीमेटम

मणिपुर में मैतेई, नागा समेत आदिवासी समुदायों के हजारों लोगों ने लंबे समय से जारी हिंसा और संकट के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र से SoO समझौता खत्म करने, असम राइफल्स को हटाने, 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC लागू करने और विस्थापित परिवारों को उनके घर लौटाने की मांग की

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मणिपुर में हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर केंद्र से अपनी मांगें पूरी करने का दिया अल्टीमेटम.(Photo-ITG)
मणिपुर में हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर केंद्र से अपनी मांगें पूरी करने का दिया अल्टीमेटम.(Photo-ITG)

मणिपुर में लंबे समय से जारी संकट के बीच शनिवार को इम्फाल, सेनापति और चंदेल में आदिवासी समुदायों ने बड़े स्तर पर रैलियां निकालीं. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से राज्य में जारी संकट को खत्म करने, आदिवासी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हिंसा के कारण विस्थापित हुए हजारों परिवारों की सुरक्षित घर वापसी की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने इसे केंद्र सरकार के लिए 'आखिरी चेतावनी' बताया और कहा कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रदर्शनकारियों ने कुकी-जो उग्रवादी समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी SoO समझौते को खत्म करने, राज्य से असम राइफल्स को हटाने, 1951 को आधार वर्ष मानकर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी NRC लागू करने और राज्य सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा सरकार के इस्तीफे की भी मांग की. उनका आरोप है कि सरकार आदिवासी समुदायों की सुरक्षा करने में नाकाम रही है.

मुख्य रैली का आयोजन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI), नागा संगठनों और अन्य आदिवासी समुदायों के संगठनों ने मिलकर किया. रैली इम्फाल के टिडिम ग्राउंड से शुरू हुई और थाऊ ग्राउंड तक पहुंची, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर अपनी मांगें रखीं. मार्च में मैतेई समुदाय के लोगों के साथ 21-22 नागा जनजातियों और कई अन्य जातीय समूहों के प्रतिनिधि शामिल हुए. नागाओं की शीर्ष संस्था यूनाइटेड नगा काउंसिल ने भी इस रैली को समर्थन दिया. वहीं, सेनापति और चंदेल के पहाड़ी जिलों में कई नागा संगठनों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए.

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एकजुटता का प्रदर्शन 

रैली को संबोधित करते हुए COCOMI के पूर्व संयोजक और उसकी सलाहकार समिति के सदस्य खुराइजाम अथौबा ने इसे आदिवासी समुदायों की एकजुटता का प्रदर्शन बताया. उन्होंने कहा कि मैतेई, नागा और अन्य आदिवासी समुदायों ने साढ़े तीन साल से हिंसा, लोगों की मौत और संपत्ति के नुकसान का सामना किया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जब तक उनकी चिंताओं को दूर नहीं करती और मणिपुर की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप, चार प्रमुख मांगें रखीं

अथौबा ने केंद्र सरकार पर आदिवासी समुदायों की जान और संपत्ति की सुरक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ एक तरह की प्रॉक्सी वॉर चलाई जा रही है और कथित नार्को-टेररिज्म में शामिल समूहों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की.

उन्होंने चार प्रमुख मांगें गिनाईं. इनमें आदिवासी समुदायों के खिलाफ कथित प्रॉक्सी वॉर को तत्काल खत्म करना और नार्को-टेररिस्ट समूहों के खिलाफ कार्रवाई, मणिपुर से असम राइफल्स की पूरी तरह वापसी, विस्थापित आदिवासी परिवारों को उनके मूल घरों और गांवों में वापस बसाने के लिए समयबद्ध रोडमैप और 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC लागू करना शामिल है. अथौबा ने कहा, 'ये हमारी चार स्पष्ट मांगें हैं. यह हमारी ओर से आखिरी अपील है. अब बहुत हो चुका.' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो लोग आगे और कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे.

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रैली में छह प्रस्ताव पारित

रैली के अंत में प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने सामूहिक रूप से छह प्रस्ताव पारित किए. इनमें भारत सरकार की कथित प्रॉक्सी वॉर और मणिपुर में नार्को-टेररिज्म को समर्थन देने को तत्काल खत्म करने की मांग की गई. संगठनों ने कुकी सशस्त्र समूहों के साथ SoO समझौते को आगे नहीं बढ़ाने की मांग भी की. यह समझौता 24 सितंबर 2026 को समाप्त हो गया था. इसके अलावा आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों यानी IDPs की सुरक्षित वापसी, पुनर्वास और पुनर्स्थापन, असम राइफल्स की वापसी और प्रभावी एवं तटस्थ सीमा प्रबंधन व्यवस्था बनाने की मांग की गई.

प्रदर्शनकारियों ने 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC लागू करने की मांग भी दोहराई. इसके साथ ही राज्य कैबिनेट से उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को तत्काल हटाने की मांग की गई. संगठनों की सामूहिक घोषणा में कहा गया कि मणिपुर के लोग समुदाय, जातीय पहचान, क्षेत्र या भौगोलिक स्थिति से अलग होकर न्याय, आपसी सम्मान, समान गरिमा और आदिवासी समुदायों की सुरक्षा के आधार पर शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं.

पहाड़ी जिलों में भी नागा संगठनों का प्रदर्शन

सेनापति जिले में नगा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन, सेनापति डिस्ट्रिक्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन और सेनापति डिस्ट्रिक्ट वूमेन्स एसोसिएशन ने COCOMI की रैली के समर्थन में प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने SoO समझौते को तत्काल खत्म करने और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के इस्तीफे की मांग की.

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यूनाइटेड नगा काउंसिल के अध्यक्ष एनजी लोरहो ने कहा कि पहाड़ी जिलों के नागा अपने पैतृक जमीन की रक्षा के लिए एकजुट हुए हैं. उन्होंने कहा, 'हम अनादि काल से अपनी जमीन के मालिक और संरक्षक हैं. हम अपने पैतृक अधिकार को नहीं छोड़ेंगे.' चंदेल जिले में भी इसी तरह की रैली हुई. यहां भी प्रदर्शनकारियों ने SoO समझौता खत्म करने और नेमचा किपगेन के इस्तीफे की मांग की.

14 मैतेई लोगों पर हमले के बाद बढ़ा आक्रोश

ये प्रदर्शन 14 मैतेई लोगों पर उग्रवादियों के घात लगाकर किए गए हमले के कुछ दिनों बाद हुए हैं. इस हमले में तीन लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद राज्य में प्रदर्शन शुरू हुए. मणिपुर मई 2023 से जातीय हिंसा से प्रभावित है.राज्य में घाटी क्षेत्र के मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी समुदायों के बीच लंबे समय से जातीय संघर्ष जारी है. इस हिंसा में कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं. वहीं, इस साल फरवरी से कुकी और नागा समूहों के बीच हुई झड़पों में करीब 50 लोगों की मौत हुई है.

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