महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के दो पत्रों के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि 1948 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे इन पत्रों में हिंदू महासभा और आरएसएस की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की गई थी.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि ये पत्र नेहरू ने महात्मा गांधी की हत्या से दो दिन पहले मुखर्जी को लिखा था. फिर 18 जुलाई 1948 को सरदार पटेल ने भी मुखर्जी को ऐसा ही एक पत्र भेजा था, जिसमें आरएसएस पर सवाल खड़े किए गए थे.
रमेश ने ऑल इंडिया रेडियो पर नेहरू के संबोधन का लिंक भी शेयर किया, जो उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या के बाद 30 जनवरी, 1948 की रात को दिया था.
बीजेपी सांसद के विवादित बयान पर की टिप्पणी
रमेश ने बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय के 2024 के विवादास्पद बयान का जिक्र करते हुए कहा, 'दोनों ही पत्र राष्ट्रवाद के स्वघोषित संरक्षकों पर तीखा हमला हैं. ये सोचकर हैरानी होती है कि एक लोकसभा सांसद उसी विचारधारा से जुड़ा हुआ है और जिसे खुद प्रधानमंत्री का आशीर्वाद भी मिला हुआ है, जिसने कहा था कि वो गांधी और गोडसे में से किसी एक को नहीं चुन सकता. उनकी मानसिकता ही सब कुछ बयां करती है.'
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नेहरू के पत्र में RSS को लेकर क्या लिखा था?
कांग्रेस नेता के मुताबिक, श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे पत्र में नेहरू ने बताया था कि हिंदू महासभा ने पुणे, अहमदनगर और दिल्ली में प्रतिबंध आदेश की अवहेलना करते हुए वहां सभाएं की थीं. रमेश ने मुखर्जी को लिखे पत्र का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया
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नेहरू ने अपने पत्र में कहा था, 'इस सभा में हिंदू महासभा के नेताओं ने कहा कि महात्मा गांधी बाधा हैं और जितनी जल्दी उनकी मौत हो जाए उतना ही देश के लिए अच्छा होगा. आरएसएस का बर्ताव तो और भी बुरा रहा है. हमने संस्था की बेहद आपत्तिजनक गतिविधियों के बारे में बड़ी मात्रा में जानकारी मिली है.'