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स्पीकर ओम बिरला के AI वीडियो पर कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस, सुप्रिया श्रीनेत समेत 8 से मांगा जवाब

कांग्रेस के मीडिया विभाग पर लोकसभा अध्यक्ष का आपत्तिजनक कैरिकेचर और एआई वीडियो साझा करने के आरोप में शिकंजा कस गया है. बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने सुप्रिया श्रीनेत सहित 8 पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिनों के अंदर जवाब तलब किया है.

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सुप्रिया श्रीनेत. (File photo: ITG)
सुप्रिया श्रीनेत. (File photo: ITG)

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के AI वीडियो प्रकाशित करने के आरोप में लोकसभा विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस मीडिया सेल को नोटिस जारी किया है. नोटिस में तीन दिनों के अंदर सभी नेताओं के अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा सदन की अवमानना और विशेषाधिकार उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करने की बात कही गई है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीजेपी सांसद विष्णु दत्त शर्मा की शिकायत के आधार पर लोकसभा के विशेषाधिकार विभाग ने कांग्रेस सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत और एआईसीसी के आठ अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस जारी किया है.

सचिवालय ने ये कदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ एक अपमानजनक कैरिकेचर और एआई वीडियो प्रकाशित करने के बाद उठाया गया है. लोकसभा सचिवालय के निदेशक बाला गुरु जी ने 11 फरवरी को ये आधिकारिक पत्र भेजकर सभी आरोपियों से स्पष्टीकरण मांगा है.

लोकसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए इस पत्र में सुप्रिया श्रीनेत और अन्य पदाधिकारियों को अपनी सफाई पेश करने के लिए तीन दिनों का वक्त दिया गया है. नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि इस संचार की प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर अपना जवाब प्रस्तुत करें. ये जवाब लोकसभा अध्यक्ष के विचारार्थ पेश किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. सचिवालय ने प्राप्तकर्ता से पत्र की प्राप्ती (Receipt) भी तुरंत भेजने का अनुरोध किया है, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके.

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क्या मामला

आपको बता दें कि ये पूरा विवाद सोशल मीडिया पर साझा की गई एक सामग्री से जुड़ा है, जिसे लोकसभा अध्यक्ष की गरिमा के खिलाफ माना गया है. शिकायतकर्ता विष्णु दत्त शर्मा का आरोप है कि कांग्रेस के मीडिया विभाग ने जानबूझकर भ्रामक एआई वीडियो और अपमानजनक तस्वीरों का सहारा लिया. इस मामले को सदन की अवमानना की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि ये सीधे तौर पर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के सम्मान से जुड़ा है.

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