त्योहारी सीजन शुरू होने से ठीक पहले आम आदमी की रसोई पर महंगाई का दबाव बढ़ता दिख रहा है. पिछले एक महीने में गेहूं की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है, वहीं खाद्य तेलों के दाम में भी आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं. सावन के महीने में पड़ने वाले तीज-रक्षा बंधन जैसे त्योहारों में हर घर से पकवान की खुश्बू आती है. लेकिन इस बार इन त्योहारों में खाने का स्वाद लेने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.
दरअसल, मध्यवर्गीय परिवारों के लिए उत्सव का बजट पहले से ही तय बजट में सिमटा रहता है. ऐसे में इस बार गेहूं और खाने के तेल की कीमतों में आ रही तेजी इस बजट को हिलाने का संकेत दे रही है क्योंकि त्योहारी सीजन से ठीक पहले ही गेहूं महंगा हो गया है और खाद्य तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका है. इसका असर वैश्विक बाजार से लेकर देश की मंडियों तक साफ नजर आ रहा है.
गेहूं 8% से ज्यादा महंगा!
पिछले एक महीने के दौरान घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं हैं, जिसके चलते ग्लोबल मार्केट में गेहूं वायदा करीब 5 फीसदी तक उछलकर दो महीने के उच्चतम स्तर पर जा पहुंचा है. इस अंतरराष्ट्रीय हलचल का सीधा असर भारतीय मंडियों पर भी पड़ा है और इंदौर मंडी में पिछले एक महीने में गेहूं के दाम सबसे ज्यादा, करीब 8.44 फीसदी तक बढ़े हैं. वहीं दिल्ली, कानपुर और कोटा जैसी प्रमुख मंडियों में औसतन साढ़े 3 से 4 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है
एक महीने में मंडियों में गेहूं के भाव (प्रति क्विंटल)
दिल्ली: 2,688 से बढ़कर 2,785
कानपुर: 2,500 से बढ़कर 2,602
कोटा: 2,575 से बढ़कर 2,670
इंदौर: 2,476 से बढ़कर 2,685
राजकोट: 2,575 से बढ़कर 2,600
गेहूं की कीमतों में आई इस तेजी की वजह केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल भर नहीं है. मौसम का बदलता मिजाज भी देश में गेहूं उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है. बढ़ते तापमान और बेमौसम बारिश को लेकर बनी चिंताओं के बीच बाजार की निगाहें आने वाले रबी सीजन के उत्पादन अनुमान पर टिकी हुई हैं.
खाने के तेल पर मंडराया महंगाई का साया
महंगाई का असर केवल रोटी तक सीमित नहीं है. पूरी रसोई का स्वाद तय करने वाला खाने का तेल भी दबाव में नजर आ रहा है. कंपनियों और कारोबारियों को आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में तेजी बनी रह सकती है. बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक खाद्य तेल महंगा होने के पीछे मुख्य रूप से चार वजहें सामने आ रही हैं जिनमें पहली है इस साल सोयाबीन की बुवाई का रकबा घटने की आशंका, दूसरी वजह वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की सप्लाई और कीमतों को लेकर बनी चिंता, तीसरी वजह बायोफ्यूल की मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय वनस्पति तेल बाजार पर दबाव और चौथी रुपये में कमजोरी की वजह से खाद्य तेल आयात करने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ी है. जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
खाद्य तेलों के बाजार में फिलहाल सूरजमुखी तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. वहीं सोयाबीन तेल में भी मजबूती का रुख देखा जा रहा है जबकि पाम ऑयल में हाल के दिनों में खरीदारी बढ़ने के संकेत मिले हैं. यानी आने वाले दिनों में रसोई का बजट खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से ज्यादा दबाव में आ सकता है. साफ है कि वैश्विक बाजार की हलचल और मौसम से जुड़ी चिंताओं ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर असर डालना शुरू कर दिया है. ऐसे में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले आम ग्राहकों की नजर गेहूं और खाने के तेल के भाव पर टिकी रहेगी, क्योंकि इन दोनों की कीमतें ही तय करेंगी कि इस बार पूजा-पकवान और त्योहारी खरीदारी का बजट कितना बढ़ता है.