कर्नाटक में बस किराया बढ़ाने को लेकर जारी विरोध के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम कर देता है, तो राज्य सरकार भी उसी हिसाब से बस किराये में कटौती करने को तैयार है. शिवकुमार ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उन्हें सरकारी सहायता की जरूरत है.
डीके शिवकुमार ने विरोध प्रदर्शन करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ दिन पहले परिवहन कंपनियों के पास डीजल भरवाने तक के पैसे नहीं थे. उस समय सरकार को उन्हें आर्थिक मदद देनी पड़ी थी. उन्होंने कहा कि सरकार ने मुफ्त सहायता दी, लेकिन इसके बावजूद परिवहन कंपनियां घाटे में चल रही हैं.
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मुख्यमंत्री के मुताबिक, अलग-अलग चरणों में बस किराये में 2 और 3 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसकी मुख्य वजह डीजल की बढ़ती कीमतें हैं. उन्होंने सवाल किया कि जब ईंधन के दाम बढ़ रहे थे, तब विरोध करने वाले लोगों ने आवाज क्यों नहीं उठाई? अब किराया बढ़ने पर ही प्रदर्शन क्यों किया जा रहा है?
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर केंद्र पर निशाना
शिवकुमार ने महंगाई के दूसरे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि जब रसोई गैस के दाम बढ़े, तब विरोध क्यों नहीं हुआ? उन्होंने बीजेपी नेता शोभा का जिक्र करते हुए कहा कि वह दूध के बर्तन लेकर प्रदर्शन कर रही थीं, लेकिन जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी पर किसी ने सवाल नहीं उठाया.
उन्होंने दवाइयों, कीटनाशकों और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर भी सवाल खड़े किए. शिवकुमार ने कहा कि खाद और सीमेंट के दाम बढ़ने पर किसी ने आवाज नहीं उठाई. वहीं, जब दवाइयां कम कीमत पर खरीदी जाती हैं और उन्हें महंगे दामों पर बेचा जाता है, तब भी कोई सवाल नहीं करता.
उन्होंने कहा कि महंगाई का असर सिर्फ परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है. आम लोगों के साथ-साथ किसानों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में हर जरूरी क्षेत्र की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए.
किसानों और परिवहन कंपनियों की मदद की जरूरत
डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में करीब 25 लाख किसान हैं. उन्हें भी अपना जीवन चलाना है. उन्होंने सूखे की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि किसान इस समय बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं. सूखे के कारण उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं.
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में परिवहन कंपनियों को भी सरकारी सहयोग की जरूरत है. सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए, क्योंकि ईंधन की बढ़ती कीमतों ने उनके संचालन पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है.
मोदी सरकार से की पेट्रोल-डीजल पर सेस घटाने की मांग
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे उनकी बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाएं. उन्होंने केंद्र सरकार से पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले सेस को कम करने की मांग की. शिवकुमार ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ईंधन पर सेस घटाकर कीमतें कम करती है, तो कर्नाटक सरकार भी उसी अनुपात में बस किराया कम कर देगी.
उन्होंने साफ कहा कि बस किराया घटाने में राज्य सरकार को कोई परेशानी नहीं है, लेकिन इसके लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी जरूरी है. उनके मुताबिक, केंद्र की ओर से ईंधन के दाम कम किए जाने पर परिवहन कंपनियों को राहत मिलेगी और यात्रियों को भी किराये में कटौती का फायदा दिया जा सकेगा.