ईरान जंग शुरू हुए 21 दिन गुजर चुके हैं. 28 फरवरी 2026 के बाद दुनिया पहले जैसी नहीं रही. भारत समेत दुनिया के बड़े देश इस युद्ध से प्रभावित हुए. इस जंग ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट, व्यापार मार्ग और अर्थव्यवस्थाओं को हिला दिया है. भारत जो मध्य पूर्व से 85% से अधिक कच्चा तेल और गैस का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है.
जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोजाना 100 से ज्यादा तेल टैंकर गुजरते थे और इस तेल की वजह से देशों की जिंदगानी और कहानी चलती थी. अब वह होर्मुज लगभग ठप पड़ा है. इसकी वजह से कच्चे तेल कीमतें 100 बैरल प्रति डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं. इससे मुद्रास्फीति, रुपये की कमजोरी और सप्लाई चेन में गंभीर दिक्कत पैदा हो रही है.
आइए हम देखते हैं कि युद्ध के 21 दिनों में भारत पर क्या 21 प्रमुख असर पड़े हैं.
1. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं: ईरान वॉर की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल हुआ है. युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमतें ब्रेंड क्रूड के लिए 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल थीं. अब ये कीमतें 108 से 110 डॉलर प्रति बैरल के आस पास हैं. इससे भारत का ऑयल बिल प्रभावित हुआ है.
2. प्रीमियम पेट्रोल महंगा हुआ: मिडिल ईस्ट में जंग के बीच भारत में इस प्रीमियम पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 2.30 रुपये बढ़ गई है.
3. इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें भी बढ़ी: तेल कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है. इसकी कीमतें 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई हैं.
4.रसोई गैस की किल्लत: भारत अपने गैस खपत का ज्यादातर हिस्सा गल्प से मंगाता है. जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित है और गैस फील्ड पर ईरान हमले कर रहा है. कई खाड़ी के देशों ने भारत को गैस की सप्लाई बंद कर दी है. एलएनजी कीमतों में उछाल, आपूर्ति बाधाएं और शिपिंग लागत बढ़ने की वजह से भारत में गैस की किल्लत हो गई है.
5. कमर्शियल और घरेलू रसोई गैस भी महंगा: ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत में 7 मार्च 2026 से रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा हुआ है वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये का इजाफा हुआ है.
6. खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ीं: गैस सप्लाई में किल्लत की वजह से भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली-मुंबई, लखनऊ में चाय, समोसे जैसे खाने-पीने की खुदरा चीजों की कीमतें बढ़ गईं हैं.
7. ऑनलाइन खाना मंगाना हुआ महंगा: ईरान जंग का असर ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाले आउटलेट पर भी पड़ा है. जोमैटो ने 20 मार्च 2026 से प्लेटफॉर्म फीस 12.50 से बढ़ाकर 14.90 प्रति ऑर्डर कर दिया है.
8. खाद की दिक्कत: दुनिया भर में यूरिया की जितनी बिक्री होती है. इसमें से अकेले कतर पूरी दुनिया की सप्लाई के 10 फीसदी हिस्से का उत्पादन करता है. लेकिन ईरानी हमले की वजह से कतर के कई प्लांट बंद हैं. इस वजह से कुछ दिनों बाद भारत में भी खाद की किल्लत हो सकती है.
9. ढलान पर रुपया: ईरान युद्ध के 21वें दिन भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले तेजी से ढलान पर है. युद्ध शुरू होने से पहले रुपया लगभग 90.9-91 प्रति डॉलर पर था, लेकिन अब यह ऑल-टाइम लो के करीब पहुंच गया है. 20 मार्च को एक डॉलर की कीमत 93 रुपये 70 पैसे थी.
10. शेयर मार्केट में अरबों का घाटा: ईरान जंग की वजह से भारत के शेयर बाजार में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है. भारत के शेयर बाजार में पिछले 3 सप्ताह में ईरान युद्ध के कारण भारी नुकसान हुआ है. सेंसेक्स में लगभग 6,000-6,750 अंकों की गिरावट हुई है. जबकि निफ्टी 2000 अंक तक गिरा है. युद्ध शुरू होने से अब तक 30-34 लाख करोड़ रुपये तक निवेशकों की संपत्ति घटी है.
11. विदेशी निवेशकों ने पैसा खींचा: ईरान जंग के बाद भारत के पूंजी बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारत से भारी पैसा निकाला है. पिछले 3 सप्ताह में लगभग ₹52,000 करोड़ से अधिक की निकासी हुई.
12. सोना-चांदी की कीमतों में उथल-पुथल: जंग शुरू होने के बाद सोने चांदी की कीमतें भी अस्थिर बनी हुई हैं और इसमें ट्रेंड से विपरित भारी उतार चढ़ाव देखा जा रहा है. 19 मार्च को सोना और चांदी दोनों की कीमतें गिरी थीं.
13. हवाई यात्रा महंगी: ईरान युद्ध के बाद मध्य-पूर्व का हवाई क्षेत्र अस्थिर हो गया. जिससे एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े. कई उड़ानें अब ईरान और आसपास के संवेदनशील इलाकों से बचकर लंबा रास्ता ले रही हैं. इससे ईंधन खपत, फ्लाइट समय और बीमा लागत बढ़ गई है. परिणामस्वरूप भारत से यूरोप, खाड़ी और अमेरिका जाने वाली उड़ानों के टिकट महंगे हो गए हैं. कई एयरलाइंस जैसे इंडिगो, एअर इंडिया, अकासा एयर ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है.
14. दर्जनों फ्लाइट कैंसिल: मध्य-पूर्व का एयरस्पेस असुरक्षित होने से कई एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कर दीं. ईरान और आसपास के इलाकों में बढ़ते खतरे के कारण दर्जनों अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स कैंसिल हुईं. इससे यात्रियों को भारी परेशानी, टिकट रिफंड में देरी और वैकल्पिक उड़ानों की कमी का सामना करना पड़ा. भारत से यूरोप और खाड़ी देशों के बीच यात्रा खास तौर पर प्रभावित हुई, जहां कई कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी बाधित हो गईं. गल्फ से भारत आने वाले नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा.
15. पेट्रोकेमिकल सप्लाई पर असर: इस जंग का भारत में पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है. पॉलिमर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने से ओडिशा सहित कई राज्यों में प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग लगभग ठप होने की स्थिति में आ गया है. उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पॉलिप्रॉपलीन (पीपी), हाई डेंसिटी पॉलिएथिलीन (एचडीपीई), लिनियर लो-डेंसिटी पॉलिएथिलीन (एलएलडीपीई), पॉलिविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) और पीईटी रेजिन जैसे प्रमुख पॉलिमर की कीमतों में 68 से 78 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हुई है.
16. प्लास्टिक उद्योग हो सकता है ठप: अगर पश्चिम एशिया में जंग चलती रहती है और तेल की सप्लाई बाधित होती है तो अप्रैल की शुरुआत से प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में 50 से 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की आशंका है. कच्चे तेल और गैस से बनने वाली पॉलीमर्स की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में 50 से 60% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है.
17. इलेक्ट्रिक कूकर, इंडक्शन चूल्हा की बिक्री बढ़ी: ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और रसोई गैस महंगी होने के बाद इलेक्ट्रिक कूकर और इंडक्शन चूल्हों की बिक्री तेजी से बढ़ी है. शहरी क्षेत्रों में लोग एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए इन विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं. बिजली से चलने वाले ये उपकरण अपेक्षाकृत किफायती और सुरक्षित माने जा रहे हैं. खुदरा बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इनकी मांग में स्पष्ट उछाल देखा जा रहा है, जिससे किचन उपकरण उद्योग को भी बढ़ावा मिला है.
18. गल्फ से भारतीयों को वापस लाने की चुनौती: ईरान और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती बन गया है. हवाई क्षेत्र बंद होने, उड़ानें रद्द होने और समुद्री रास्तों पर खतरे के कारण निकासी अभियान जटिल हो गया है. लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, भोजन और अस्थायी ठहराव की व्यवस्था करना भी कठिन है. सरकार को विशेष उड़ानों और नौसैनिक मदद के जरिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ सकता है. गल्फ देशों में 90 लाख भारतीय रहते हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर के अनुसार अबतक मिडिल ईस्ट से 67 हजार भारतीयों को निकाला गया है.
19. बंद हो जाएगा खाड़ी से आने वाला पैसा: ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने से वहां काम कर रहे भारतीयों की आय और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं. इससे भारत आने वाला रेमिटेंस घटने का खतरा है. गल्फ में रहने वाले प्रवासी भारतीय हर साल 51-52 अरब डॉलर पैसा भारत भेजते हैं. खाड़ी देशों में निर्माण, तेल और सर्विस सेक्टर में मंदी आने पर लाखों प्रवासी भारतीयों की कमाई पर असर पड़ेगा, जिससे भारत की विदेशी मुद्रा आय और घरेलू खर्च क्षमता भी कमजोर हो सकती है.
20. UAE/गल्फ को निर्यात बाधित: युद्ध के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से भारत का निर्यात प्रभावित हुआ है. UAE और अन्य खाड़ी देशों तक जाने वाले समुद्री मार्ग महंगे और जोखिमपूर्ण हो गए हैं. शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और डिलीवरी समय बढ़ने से व्यापार धीमा पड़ा है. खासकर जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, खाद्य उत्पाद और मशीनरी निर्यात पर असर पड़ा है. सिर्फ UAE ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है,अगर पूरे खाड़ी क्षेत्र को मिला दें तो भारत निर्यात 100 अरब डॉलर का है.
21. चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट जोखिम में: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग की वजह से ईरान में भारत का चाबहार प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ है. भारत ने फिलहाल यहां काम बंद कर दिया है.