
देश के सबसे प्रख्यात और भरोसेमंद इंडिया टुडे–सी वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे के आंकड़े जारी किए गए हैं. इसमें लोगों से भारत में चुनावों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर किए गए एक सर्वे में लोगों की राय सामने आई है. इसी सर्वे में एसआईआर प्रक्रिया और जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी लोगों से सवाल पूछे गए.
क्या आप मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं?
सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि क्या आप मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं? इस पर जो लोगों ने राय इस साल रखी है वह चिंताजनक है.
जब यह साल पिछले साल अगस्त 2025 में पूछा गया था तो 64 फीसदी लोगों ने कहा था कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं. वहीं, जब यही सवाल इस साल जनवरी में पूछा गया तो 57 फीसदी लोगों ने माना कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं.

यानि कि साफ़ है कि अगस्त में जो 32 फीसदी लोगों ने 'ना' कहा था वो अब 37 फीसदी जनवरी में पहुंच चुका है. वहीं, अगस्त 2025 में इस सवाल के जवाब में चार फीसदी लोगों ने कहा कि 'कह नहीं सकते' और जनवरी 2025 में छह फीसदी लोगों ने कहा कि 'कह नहीं सकते'.
क्या SIR की प्रक्रिया राजनीतिक पक्षपात से मुक्त है?
सर्वे के दौरान जब लोगों से पूछा गया कि क्या SIR की प्रक्रिया राजनीतिक पक्षपात से मुक्त है तो जवाब चुनाव आयोग के पक्ष में दिखा. 50 फीसदी लोगों का मानना है कि SIR की प्रक्रिया राजनीतिक पक्षपात से मुक्त है. नहीं कहने वाले करीब 38 फीसदी रहे. वहीं, 12 फीसदी लोगों ने कहा कि 'कह नहीं सकते.'

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क्या बीजेपी एजेंसियों का ग़लत इस्तेमाल दूसरी सरकारों के मुकाबले ज्यादा करती है?
एक सवाल जो कि बीते कई सालों से चर्चाओं में रहा है कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. अब इसे लेकर सर्वे में सवाल पूछा गया कि क्या बीजेपी एजेंसियों का ग़लत इस्तेमाल दूसरी सरकारों के मुकाबले ज्यादा करती है?

इस पर 41 फीसदी लोगों ने 'हां' में जवाब दिया. 47 फीसदी लोगों का मानना है कि बीजेपी एजेंसियों का ग़लत इस्तेमाल दूसरी सरकारों के मुकाबले नहीं करती है. वहीं, 12 फीसदी लोगों ने कहा कि 'कह नहीं सकते.'
क्या राहुल गांधी का 'वोट चोरी' का आरोप मुद्दा है?
सर्वे में लोगों से पूछा गया, "क्या राहुल गांधी का 'वोट चोरी' का आरोप मुद्दा है?". इस पर 40 फीसदी लोगों ने कहा कि 'हां' राहुल का वोट चोरी का आरोप मुद्दा है. 14 फीसदी लोगों ने कहा कि कुछ हद तक. 27 फीसदी लोगों ने कहा कि ये मायने नहीं रखता. वहीं, 10 फीसदी लोगों का कहना है कि इसे बड़े मुद्दे मौजूद हैं.
