ईरान में जारी जंग का आज 26वां दिन हैं. ईरान जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले ही राज्यसभा में बयान दिया था. पीएम ने कहा था कि युद्ध लंबा चला तो इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे. पीएम मोदी ने कोविडकाल की तरह ही टीम इंडिया बनकर इस चुनौती का सामना करने का आह्वान किया था. इसे लकर अब सरकार एक्टिव मोड में आ गई है. सरकार में बैठकों का दौर शुरू हो गया है.
सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक भी बुला ली है. सर्वदलीय बैठक बुधवार की शाम सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. पहले खबर आई थी कि बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह करेंगे. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में होने जा रही इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ही सरकार की ओर से पांच से छह मंत्री शामिल होंगे.
इस बैठक में सभी दलों के नेताओं को विदेश सचिव विक्रम मिसरी पश्चिम एशिया के ताजा हालात के संबंध में जानकारी देंगे. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले ही यह कह चुके हैं कि वह इस बैठक में भाग नहीं लेंगे. राहुल गांधी के सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होने के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद जगदंबिका पाल ने तल्ख टिप्पणी की है.
जगदंबिका पाल ने कहा कि पीएम मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है और राहुल गांधी उसमें मौजूद नहीं होंगे. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें (राहुल गांधी को) सांसद बनाया है, लेकिन सदन में उनकी रुचि नहीं है. जगदंबिका पाल ने कहा कि राहुल गांधी सदन में मौजूद नहीं रहते हैं. सदन की कार्यवाही के दौरान कभी हरियाणा, तो कभी केरल चले जाते हैं.
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या ऐसे में वह विपक्ष का नेता बनने के योग्य हैं? दूसरी तरफ, सर्वदलीय बैठक से पहले सरकार के अलग-अलग विभाग भी एक्टिव हो गए हैं. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम एशिया के हालात को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की.
शिवराज ने अधिकारियों के साथ की हाईलेवल बैठक
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से बुलाई गई इस बैठक में वैश्विक संकट के कारण उर्वरक, खाद्य और अन्य आवश्यक सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता के साथ ही उनका सही वितरण सुनिश्चित करने को लेकर चर्चा की गई. अधिकारियों ने कृषि मंत्री को इस समय बने वैश्विक हालात से निपटने के लिए इन सभी के साथ ही विभिन्न पहलुओं पर तैयारियों के संबंध में भी जानकारी दी.
पेट्रोल-डीजल पर आया पेट्रोलियम कंपनियों का बयान
देश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर पेट्रोलियम कंपनियों का भी बयान आया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है. कंपनी ने यह भी कहा है कि ऑनलाइन फैल रही अफवाहें गैरजरूरी चिंता पैदा कर सकती हैं और सामान्य आपूर्ति को बाधित कर सकती हैं. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने यह भी कहा है कि कंपनी के सभी आउटलेट्स पर पर्याप्त स्टॉक है और सभी आउटलेट्स पूरी तरह से काम कर रहे हैं.
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इंडियन ऑयल ने लोगों से केवल ऑफिशियल जानकारी पर यकीन करने और पैनिक में खरीदारी नहीं करने की अपील की है. भारत पेट्रोलियम ने भी पेट्रोल और डीजल की कमी से जुड़े सूचनाओं को अफवाह बताया है. कंपनी ने दावा किया है कि देश के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति सामान्य है. भारत पेट्रोलियम ने यह भी दावा किया है कि पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है. कंपनी के सभी पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं.
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भारत के पास 53 लाख टन से अधिक रिजर्व
भारत के पास 53 लाख टन से अधिक क्षमता वाले स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम भंडार हैं. इनको बढ़ाकर 65 लाख टन तक पहुंचाने पर सरकार काम कर रही है. रिफाइनिंग कैपेसिटी को भी बढ़ाया गया है. भारत ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं. देश ने कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक किया है. सरकार एलपीजी के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को भी बढ़ावा दे रही है.
देश में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने पर जोर
देश में एलपीजी के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए भी सरकार प्रयास कर रही है. विदेशी शिपिंग और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये का मेक इन इंडिया शिप बिल्डिंग मिशन भी शुरू किया गया है. इसके तहत जहाज निर्माण, जहाज तोड़ने और रखरखाव की क्षमता बढ़ाई जा रही है. रक्षा क्षेत्र को भी मजबूत किया गया है, जिससे ज्यादातर हथियारों का निर्माण देश में ही हो सके.