scorecardresearch
 

EXCLUSIVE: फॉर्म-6 में चेंज, 97 वोटरों का प्रश्न... चुनाव आयोग ने आजतक के सवालों पर क्या-क्या कहा?

चुनाव आयोग ने आजतक के सवाल के जवाब में कहा है कि फॉर्म -6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसके साथ एक घोषणा पत्र जरूर जोड़ा गया है. इसके अलावा चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि ERO को चुनाव आयोग के प्लेटफॉर्म ER-net का पूरा एक्सेस है.

Advertisement
X
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार. (File photo: ITG)
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार. (File photo: ITG)

चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में बदलाव, ERO यानी कि Electoral Registration Officer  के अधिकारों को लेकर उठे सवालों पर सफाई दी है. आयोग का कहना है कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR के तहत उसके साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र (एनेक्सर D) जोड़ा गया है.  आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार अब भी ERO के पास है. आयोग के मुताबिक राज्यों का डेटा भी केंद्रीकृत नहीं किया गया है. 

आजतक ने तीन सवालों के जवाबों की मांग करते हुए चुनाव आयोग से सफाई मांगी थी. चुनाव आयोग पर इंडियन एक्सप्रेस के दावे बाद कई सवाल उठे थे. इसके बाद आजतक ने चुनाव आयोग से तीन प्रश्नों पर सफाई मांगी थी. 

ये सवाल हैं-

1). फ़ॉर्म 6 में बदलाव क्यों किया गया?
2). जब चुनाव आयुक्तों ने चिंताएं जताईं, तो उनकी चिंताओं के बावजूद आदेश क्यों दिए गए?
3). डेटा को सेंट्रलाइज़ क्यों किया गया?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. 

 फॉर्म नंबर 6 भारत में मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जब कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र पूरी कर लेता है या किसी अन्य कारण से उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह Form 6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है. इसे आमतौर पर नए मतदाता पंजीकरण (New Voter Registration) का फॉर्म कहा जाता है. 

Advertisement

चुनाव आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 में किसी तरह का चेंज नहीं किया गया है लेकिन इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जमा करना अनिवार्य है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्ति जताते हुए कहा था कि फॉर्म-6 में बदलाव किए गए हैं और दो सवाल जोड़े गए हैं. और ये बदलाव गैर कानूनी और अवैध हैं. 

लेकिन आयोग ने इसमें किसी तरह के बदलाव से इनकार किया है. लेकिन आयोग ये मान रहा है कि इस फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा पत्र जोड़ा गया है. इस घोषणा पत्र में आवेदक को जवाब देना होगा कि जब इससे पहले SIR हुआ था जो क्या आवेदक के माता-पिता या दादा दादी इसमें शामिल हुए थे या नहीं. 

यह आयोग के 24.6.2025 के SIR निर्देशों (पेज नंबर 6, पॉइंट नंबर 15) के अनुसार है. यही निर्देश 14.05.2026 के SIR आदेश में भी 'एनेक्ज़र A' के तौर पर शामिल हैं और इसमें कहा गया है:

"नए वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन या बिहार राज्य के बाहर से शिफ्ट होने के मामले में यह भी निर्देश दिया जाता है कि अब से फ़ॉर्म 6/फ़ॉर्म 8 के साथ आवेदक को उसमें की गई घोषणा के समर्थन में एक अतिरिक्त घोषणा फ़ॉर्म भी भरना होगा."

Advertisement

फ़ॉर्म 6 को 4 तरीकों से भरा जा सकता है:
1. ऑफ़लाइन
2. ऑनलाइन
3. BLO ऐप का इस्तेमाल करके BLO के ज़रिए
4. ECINET ऐप

फ़ॉर्म 6 को तभी स्वीकार किया जाएगा जब ये घोषणा पत्र भरकर दिया जाएगा. बता दें कि फॉर्म- 6 में बदलाव कानून मंत्रालय के द्वारा ही किया जा सकता है, चुनाव आयोग इसमें स्वयं बदलाव नहीं कर सकता है. इसलिए चुनाव आयोग पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए घोषणा पत्र को फॉर्म-6  के साथ जरूरी कर दिया.

आजतक ने चुनाव आयोग से तीसरा सवाल पूछा था कि डेटा को सेन्ट्रालाइज क्यों किया गया? 

इसी से जुड़ा मामला यह है कि ERO यानी कि Electoral Registration Officer को ERO net का एक्सेस क्यों नहीं दिया गया?

देश में मतदाता सूची बनाने का काम ERO करते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखविंदर सिंह संधु ने सवाल उठाया था कि कई ERO शिकायत कर रहे हैं कि उनके पास ERO net का एक्सेस नहीं है. 

ERO-Net चुनाव आयोग का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए Electoral Registration Officers (ERO) मतदाता सूची से जुड़े काम करते हैं. जैसे नए मतदाता का नाम जोड़ना, नाम हटाना, सुधार और स्थानांतरण. 

इस सवाल के जवाब में चुनाव आयोग ने कहा है कि ERO-Net का एक्सेस ERO के पास है. 

Advertisement

चुनाव आयोग ने कहा:-

ERO के पास ERONET का पूरा और बिना किसी रोक-टोक के एक्सेस है.

1. RP एक्ट, 1950 की धारा 13B के अनुसार, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) देश में वोटर लिस्ट तैयार करने और उनमें सुधार करने के लिए जिम्मेदार कानूनी अधिकारी होता है. इसलिए ERO को उनकी कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद करने के लिए ECINET पोर्टल का पूरा और बिना किसी रोक-टोक के एक्सेस दिया गया है.

2. ECINET प्लेटफॉर्म को लागू करने में लागू कानूनी और रेगुलेटरी नियमों का पालन किया गया है.

3. कानूनों, उनके तहत बने नियमों और ECI के निर्देशों के अनुसार संबंधित स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के सभी अधिकारों और कार्यों को ECINET में शामिल किया गया है और इस कानूनी ढांचे से कोई बदलाव नहीं किया गया है.

4. किसी वोटर को स्वीकार करने या अस्वीकार करने से जुड़े सभी फैसले ERO के स्पष्ट आदेश और CEO की देखरेख में, पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही लिए जाते हैं.

5. वोटर लिस्ट सिर्फ ERO द्वारा ही तैयार की जाती है. ECINET सिर्फ एक सुविधा देने वाला प्लेटफॉर्म है, और कुछ नहीं. 

आजतक ने चुनाव आयोग से गोवा के 97 वोटरों पर सवाल पूछा. 

गोवा के 97 वोटरों का मामला क्या है?

Advertisement

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला ECINET सिस्टम में मतदाता नाम हटाने के बाद उसे दोबारा बहाल करने की तकनीकी सुविधा को लेकर विवाद से जुड़ा है. SIR प्रक्रिया के दौरान इन मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई हुई थी. बाद में दस्तावेजों और सुनवाई के आधार पर संबंधित ERO ने माना कि ये मतदाता नाम शामिल किए जाने के योग्य हैं. लेकिन सिस्टम में पहले दर्ज किए गए deletion को वापस लेने यानी rollback का विकल्प उपलब्ध नहीं था. 

गोवा के CEO कार्यालय ने ECI से इस तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए कई बार अनुरोध किया. इसके बावजूद 21 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में ये 97 नाम शामिल नहीं हो सके. 

इसके बावजूद 21 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई और ये 97 नाम उसमें शामिल नहीं थे. 

आजतक के इस सवाल पर चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में इन सभी के नाम शामिल थे, लेकिन कुछ विसंगतियां मिलने के बाद उन्हें नोटिस भेजा गया. संबंधित ERO के सामने पेश होने पर उन्हें लगा कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, जिसके बाद उन्होंने इन 97 नामों को मतदाता सूची से हटा दिया. 

बाद में ERO ने जब दोबारा जांच की तो इन नामों को वापस जोड़ना चाहा और इसके लिए ECINET में rollback का विकल्प उपलब्ध कराने के लिए IT विभाग को ईमेल किया. आयोग के अनुसार IT विभाग के पास खुद नाम जोड़ने का अधिकार नहीं है और सिस्टम में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं थी. 

Advertisement

चुनाव आयोग के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अयोग्य पाया जाता है, तो ERO को नाम हटाने के लिए 'फॉर्म 7' पर क्लिक करना होता है. हालांकि, एक बार जब ERO नाम हटाने के लिए 'फॉर्म 7' पर क्लिक कर देता है, तो इसे वापस पलटने (रोलबैक) का कोई प्रावधान नहीं होता है. और गोवा के मामले में ठीक यही हुआ था.

हालांकि आयोग का कहना है कि इन 97 लोगों का मतदान का अधिकार खत्म नहीं हुआ है. वे Form 6 भरकर दोबारा मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकते हैं. 

हालांकि चुनाव आयोग ने आजतक के इस प्रश्न का कोई जवाब नहीं है कि चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद आदेश कैसे जारी हुए.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement