महंगाई की एक और झटका धीरे से लगा है. सोमवार यानी एक जून से 5 kg वाले छोटू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत ग्यारह रुपये बढ़ गई हैं. दिल्ली में अब 5kg वाले FTL यानी फ्री ट्रेड एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत 821.50 ₹ हो गई है. हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. इतना ही नहीं 19kg वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी ₹42 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है, जिसकी वजह से होटल ढाबों में खाना पीना महंगा हो सकता है. साथ ही उद्योग जगत में भी इसका प्रभाव पड़ेगा.
राजधानी दिल्ली में अब 19 kg LPG सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये हो गई है. आप सोच रहे होंगे कि 14.2kg घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है और बाजार में इसकी कीमत 913₹ है तो फिर पांच किलो वाले सिलेंडर की कीमत दोगुने से ज्यादा क्यों है.
घरेलू और छोटू सिलेंडर की कीमतों में बड़ा अंतर
दरअसल, घरेलू एलपीजी सिलेंडर जो कि 14.2 kg का होता है, उसकी वास्तविक कीमत के ऊपर सरकार उज्जवला जैसी भारी सब्सिडी देती है. जबकि छोटू सिलेंडर पर किसी तरह की सब्सिडी नहीं मिलती. यानि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत अगर आज 3113.50 रुपये है तो इस दर पर 5 किलो वाले छोटू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 820₹ के आस पास होती है. बाजार में कमर्शियल एलपीजी की दर पर मिलने की वजह से ही छोटू सिलेंडर की कीमत घरेलू सिलेंडर से ज्यादा है. अब छोटू सिलेंडर पर पिछले 2 महीने में 323 रुपये बढ़ाए गए हैं.
पहले भी हो चुकी है बढ़ोतरी
इससे पहले अप्रैल 2026 में 51 रुपये, एक मई 2026 को 261 रुपए और 1 जून 2026 को 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. 5 महीने में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दोगुनी हो गई है. भले ही सिलेंडर भरने की व्यवस्था छोटू और घरेलू की एक समान हो, लेकिन बहुत सारे लोग बाज़ार में ब्लैक में ख़रीद रहे हैं और आय में उन्हें प्रति किलो के लिए ढाई सौ रुपये से भी ज़्यादा चुका पड रहा है. मजदूरों और छात्रों के लिए छोटू सिलिंडर भरना बेहद महंगा और मुश्किल भरा हो गया है, जिसका सीधे असर उनका कमाई और खर्च को असंतुलित कर रहा है.
मजदूरों ने घर में खाना बनाना किया बंद
पहाड़गंज के लेबर चौक पर मिले मजदूरों से हमने बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें हर किलो गैस के लिए 200 रुपये से भी ज्यादा देने पड़ रहे हैं तो कई मजदूरों ने ढाबे पर खाना शुरू कर दिया जो सस्ता पड़ रहा है. बिहार के कुछ मज़दूरों ने हमें बताया कि कई लोगों ने सिलेंडर महंगा होने के चलते घर में खाना बनाना बंद कर दिया है और छोटे ढाबे पर खाना खा रहे हैं जो सस्ता पड़ता है. नाम से छोटू, लेकिन बड़े काम होता है ये फ्री ट्रेड एलपीजी सिलिंडर. ज्यादातर इसका इस्तेमाल छोटे कारोबार में, छोटे शहरों में, होटल ढाबा चलाने वाले, फूड स्टॉल चलाने वाले, यहां तक की यात्रा में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों और के साथ साथ किराए की मकान लेकर रखने वाले छात्रों द्वारा किया जाता है, क्योंकि इसकी कीमत कम होती है, वजन कम होता है और इसे लाना ले जाना भी आसान होता है. घरों से दूर मजदूरी या पढ़ाई करने वालों के लिए 5KG वाला छोटू सिलेंडर बड़ा सहारा होता है.
छात्रों ने मेस की ओर किया रुख
मुखर्जी नगर से कुछ छात्रों से हमने बात की तो उन्होंने कहा कि सिलेंडर महंगा होने से उनके बजट पर काफी फ़र्क पड़ा है. कुछ छात्रों ने सिलेंडर छोड़ पास के मेस या कैंटीन में खाने की सुविधा ले ली है तो कुछ लोगों के लिए सिलेंडर की महंगाई पढ़ाई का खर्च बढ़ा रही है.
शुरुआत कैसे हुई- इंडियन ऑयल के मुताबिक, साल 2020 में इंडियन आयल कार्पोरेशन ने एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) उपयोगकर्ताओं की बढ़ती मांगों को पूरा करने और ग्राहकों की सुविधा में सुधार करने के लिए एक छोटा रसोई गैस सिलेंडर शुरू किया गया, जिसे छोटू के नाम से भी जाना जाता है. 5 किलोग्राम एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडर, इस प्रकार अपने ग्राहकों की सुविधा के लिए पास की दुकानों से रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के अंतरराष्ट्रीय मॉडल को दोहराने वाली देश की पहली पीएसयू तेल कंपनी बन गई है. छोटू, एक मिनी रसोई गैस सिलेंडर, विशेष रूप से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रवासी आबादी के खानपान के लिए शुरू किया गया है, जिनके पास स्थानीय पता प्रमाण नहीं है, कम गैस खपत वाले लोग और सीमित स्थान वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं.
झंडेवालन इलाके के एक गैस एजेंसी पर हमने बात की उन्होंने बताया कि ग्राहक केवल पहचान प्रमाण जमा करके नया छोटू गैस कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं. देश भर में किसी भी पॉइंट ऑफ सेल या डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर जाकर रिफिल प्राप्त किया जा सकता है. ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी शहर में छोटू गैस सिलेंडर का उपयोग कर सकते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि गैस की कमी नहीं है और एजेंसियों पर रिफिल भी सरकारी रेट पर है, लेकिन लोग एजेंसी पर आने की जगह ताले बाज़ार से गैस भरवा रहे है. छोटू सिलेंडर के बढ़े दाम ने चाय की कीमत बढ़ा दी.
छोटे पटरी रेडी वाले चाय वालों ने चाय की चुस्की की कीमत बढ़ा दी है. नई दिल्ली में चाय की दुकान चलाने वाले संजय जी कहते हैं कि 5 किलो का सिलेंडर उन्हें 1200 का मिलता है, इसलिए 10 की चाय अब 15 की हो गई है, इसलिए बचत घट रही है. छोटे मोटे दुकान चलाने वाले अपना सिलेंडर छोटे शहरों से लाते हैं, लेकिन फिर भी कमाई पर असर पड़ा है. कहीं कीमत बढ़ी है तो कहीं कमाई कम हो गई है. हालांकि, मजदूर या छात्र या दुकानदार अक्सर बाहर से सिलेंडर खरीदते हैं और रिफिल के लिए भी बाहर के ब्लैक मार्केट पर निर्भर हो जाते है, जहां बढ़ी कीमतों से भी कहीं ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ती है.
पश्चिम एशिया संकट के बाद से ही दुनिया भर में गैस की कीमतों पर इसका असर देखने को मिला है. भारत सरकार कहना है कि उसके बाद पेट्रोल डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार है. भारत अपनी जरूरत के 90% प्रतिशत एलपीजी खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है, लेकिन संकट के चलते सप्लाई लाइन में आई बाधा के चलते असर कीमतों पर पड़ा है. भारत रिफाइनरी कंपनियां 50 हज़ार से 52 हज़ार टन एलपीजी का उत्पादन रोज़ करती हैं, जबकि रोज़ की मांग औसतन 60 हज़ार टन से ज़्यादा है. सरकार ने गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं.