प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत में ब्लैक सी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. साथ ही उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी भी शांति पहल का समर्थन करने की भारत की इच्छाशक्ति को दोहराया. दोनों नेताओं ने भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ाने पर भी सहमति जताई. इससे पहले किर्गिस्तान में पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से कहा था कि 'अंतहीन युद्ध' से 'युद्ध का अंत' करने की तरफ बढ़ने की जरूरत है.
यह बैठक राष्ट्रपति पुतिन के नई दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटों बाद हुई. पुतिन तीन दिन की यात्रा पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए थे.
बातचीत के बाद दोनों नेता भारत मंडपम परिसर के भीतर एक ही कार में बैठकर बिजनेस फोरम के कार्यक्रम स्थल तक गए.
इस मुलाकात के बारे में भारत की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक दोनों पक्ष अलग अलग क्षेत्र में सहयोग के अपने मजबूत संकल्प को दिखाते हुए 'भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को और मजबूत करने के प्रयासों में लगे रहने पर सहमति व्यक्त की.
भारत ने कहा कि यह साझेदारी "महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज कर रही है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद इसने मजबूती दिखाई है."
भारत-रूस व्यापार और निवेश संबंधों की समीक्षा करते हुए, दोनों पक्षों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा को मौजूदा 65 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लिया.
विदेश मंत्रालय (MEA) ने जानकारी दी कि PM मोदी ने दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन वार्ता के लिए रूस जाने का पुतिन का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. शिखर सम्मेलन की तारीखें आपसी सुविधा के अनुसार डिप्लोमैटिक चैनलों के ज़रिए तय की जाएंगी.
45 मिनट से अधिक चली बातचीत में, मोदी और पुतिन रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, नागरिक परमाणु ऊर्जा, उर्वरक आपूर्ति और लोगों के बीच आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने "आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए, जिनमें पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष शामिल हैं, जिनका समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है."
मंत्रालय ने कहा, "प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्षों को सुलझाने का सही रास्ता है और भारत शांति प्रयासों में मदद करने के लिए तैयार है."
विदेश मंत्रालय ने कहा, "दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता और लोगों के बीच आदान-प्रदान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की."
दोनों नेताओं ने भारत मंडपम में इनोप्रोम इंडिया एग्ज़िबिशन का दौरा भी किया और इसमें हिस्सा लेने वालों से बातचीत की.
बातचीत में व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने के तरीकों पर मुख्य रूप से चर्चा हुई. पता चला है कि भारतीय पक्ष ने रूस के पक्ष में बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए रूसी बाज़ार में भारतीय निर्यातकों की बेहतर पहुंच की वकालत की.
दोनों पक्षों ने अपने पहले से ही मज़बूत रक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर भी चर्चा की.
एनर्जी सेक्टर में, दोनों पक्षों ने मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति जताई.
औद्योगिक सहयोग का विस्तार, रेल और टनलिंग सेक्टर में सहयोग, स्टील वैल्यू चेन का विकास और रूसी बाज़ार में भारतीय निर्यातकों की पहुंच बढ़ाना भी बातचीत के अहम विषय रहे.