आंध्र प्रदेश में कम्युनिटी के स्तर पर चलाई जा रही प्राकृतिक खेती (APCNF) को दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार मिला है. इस पुरस्कार का नाम '2026 फूड प्लैनेट प्राइज़' है. 15 लाख अमेरिकी डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) का यह पुरस्कार 2 जून, 2026 को स्वीडन के बास्ताद में दिया गया.
साल 2026 के 'फूड प्लैनेट प्राइज़' के लिए दुनिया भर से 1,000 से अधिक प्रोजेक्ट्स और नामांकन भेजे गए थे. कमेटी ने इनमें से 6 महाद्वीपों और 19 देशों के 35 बेहतरीन प्रयासों को शॉर्टलिस्ट किया. कड़ी स्क्रीनिंग के बाद, आखिरी पड़ाव में केवल 4 फाइनलिस्ट चुने गए, जिनमें से आंध्र प्रदेश की प्राकृतिक खेती के इस मॉडल ने दुनिया में पहला स्थान हासिल किया.
आंध्र प्रदेश सरकार के कृषि विभाग की संस्था ‘रैतु साधिकारा संस्था’ (RySS) द्वारा 2016 में शुरू किए गए APCNF की परिकल्पना किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने और उन्हें सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी. वर्षों के दौरान, इस आंदोलन ने यह प्रदर्शित किया है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली संस्थाओं, किसान-से-किसान सीखने की प्रक्रिया, सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों और सरकार की मज़बूत भागीदारी के माध्यम से प्राकृतिक खेती का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा सकता है.
दूसरे राज्यों के लिए भी सीखने का मौका
APCNF के अनुभव को अब भारत के 22 राज्यों और दो देशों श्रीलंका और ज़ाम्बिया में साझा किया जा रहा है. यह प्राकृतिक खेती की ओर संक्रमण को समर्थन देने वाले एक विस्तारयोग्य मॉडल के रूप में इसकी बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है. स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर सशक्त हुई ग्रामीण महिलाओं ने अपने परिवारों में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए बदलाव की मजबूत नींव रखी है.
इस महा-अभियान की असली ताकत ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले 'किसान गुरु' हैं. राज्य के 10,000 से अधिक अनुभवी किसान खुद गुरु बनकर 18 लाख अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती के गुर सिखा रहे हैं. साथ ही, 1,000 से अधिक सक्रिय मार्गदर्शक और 700 से ज्यादा किसान शोधकर्ता इसके वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं, जिन्हें राज्य सरकार के कृषि विभाग का पूरा सहयोग मिल रहा है.
इस बड़े बदलाव को मुमकिन बनाने में भारत सरकार के कृषि मंत्रालय, जर्मनी के KfW बैंक, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन (APF) और को-इम्पैक्ट फिलैंथ्रोपी जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का सहयोग रहा है.
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि ये पुरस्कार पूरे देश के लिए गर्व की बात है. भारत के इतिहास में यह गौरव पहली बार हासिल हुआ है, लेकिन आंध्र प्रदेश यहीं नहीं रुकेगा. हमारा संकल्प है कि वर्ष 2047 तक राज्य को 100 प्रतिशत प्राकृतिक खेती वाला प्रदेश बनाया जाए, जहां जमीन, पर्यावरण और किसान सभी समृद्ध हों. हम इस सफल मॉडल को भारत के अन्य राज्यों और पूरी दुनिया में पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'
इस जीत से उत्साहित होकर टीम ने अब राज्य के सभी 60 लाख किसानों तक पहुंचने और आंध्र प्रदेश को 100 प्रतिशत प्राकृतिक खेती वाला प्रदेश बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया है, जिसकी गवाही कुरुदा राधा जैसे छोटे किसान भी दे रहे हैं कि इस रसायन-मुक्त खेती ने न सिर्फ पर्यावरण को सुधारा है बल्कि उनके परिवारों की सेहत और सोच को भी बदल दिया है.