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'आप दीजिए ना समय...', धर्मेंद्र यादव की स्पीच के दौरान खड़े होकर क्यों बोले अमित शाह

लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस समस्या का समाधान मुलायम सिंह यादव के बताए रास्ते पर चलकर ही हो सकती है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों का शोषण होगा तो हम समाजवादी लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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गृह मंत्री ने बढ़वाया धर्मेंद्र यादव का समय (Photo: Screengrab)
गृह मंत्री ने बढ़वाया धर्मेंद्र यादव का समय (Photo: Screengrab)

लोकसभा में सोमवार को नियम 193 के तहत नक्सलवाद पर चर्चा हुई. इस चर्चा के दौरान लोकसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव बोल रहे थे. धर्मेंद्र यादव की स्पीच के दौरान ही एक मौका ऐसा भी आया, जब सदन में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह अपनी जगह खड़े हुए और चेयर से आग्रह किया कि आप दीजिए ना समय इनको. इसके बाद चेयर ने धर्मेंद्र यादव को और समय दिया और सपा सांसद ने अपनी बात जारी रखी.

दरअसल, धर्मेंद्र यादव ने बोलते समय हाथों में पन्नों का गुच्छा लेकर उनको पलटते हुए यह कहा कि बहुत सारे सुझाव हैं, लेकिन आप उतना समय नहीं दे पाएंगे सभापति जी. इस पर सदन में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह अपनी जगह खड़े हुए और आसन को संबोधित करते हुए कहा कि आप दीजिए ना समय. अमित शाह की इस बात के लिए सपा सांसद ने भी उनका धन्यवाद किया. चेयर पर तब डिप्टी स्पीकर पैनल की कुमारी शैलजा थीं.

कुमारी शैलजा भी अमित शाह की बात पर मुस्कराती दिखीं. इसी दौरान किसी सदस्य ने यह टिप्पणी की- 15 मिनट में हो जाएगा. इस पर गृह मंत्री शाह भी मुस्कराते नजर आए. धर्मेंद्र यादव ने अपनी बात जारी रखी और छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र समेत नक्सल प्रभावित राज्यों के नक्सल प्रभावित इलाकों की समस्याएं गिनाईं और यह कहा कि इनका समाधान नीति आयोग, कैग की 2023 की रिपोर्ट में है.

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धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आदिवासी हमारे भाई हैं. कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए आदिवासियों को उजाड़ने का प्रयास ना कीजिए. उनको भी मूलभूत सुविधाएं, सम्मान के साथ जीने का हक दीजिए. इससे पहले, सपा सांसद धर्मेंद यादव ने कहा कि हम सरकार के इस दावे से सहमत नहीं हैं कि नक्सलवाद समाप्त करा दिया. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस बात को जरूर स्वीकार करेंगे कि नक्सलवाद में बहुत कमी आई है.

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उन्होंने कहा कि नवंबर 2004 में सोनभद्र में पीएसी के जवानों से भरे ट्रक को नक्सलियों ने उड़ा दिया. तब यूपी में नेता जी (मुलायम सिंह यादव) की सरकार थी. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि नेता जी चाहते तो नक्सलियों पर जवाबी हमला कर सकते थे, बड़ा ऑपरेशन चलवा सकते थे. लेकिन उन्होंने ये रास्ता नहीं चुना. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव तीन दिन बाद तमाम इंटेलिजेंस इनपुट और अधिकारियों के मना करने के बावजूद घटनास्थल पर गए. नक्सलियों के साथ बातचीत की.

यूपी आज नक्सलमुक्त- धर्मेंद्र यादव

धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस बातचीत का नतीजा ये हुआ कि हजारों हजार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. वह जगह चंदौली जिले का मझगांवा था, जो सोनभद्र के सांसद का गांव है. उन्होंने कहा कि यह घटना इसलिए बता रहा हूं, क्योंकि यूपी आज नक्सल मुक्त है. नेता जी का मानना था कि नक्सलवाद का हल बातचीत से निकाला जाना चाहिए. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि अपने चहेते लोगों को खनिज संपदा देने के लिए आदिवासियों, वनवासियों का शोषण होगा तो हम समाजवादी लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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आदिवासियों को मिले उनका हक- धर्मेंद्र यादव

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान कहा कि तेंदूपत्ता, खनिज पर बाहर के लोगों की लूट चल रही है. बच्चों में नाटापन है, ड्रॉपआउट दर ज्यादा है. भूमि के विवाद हैं. उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का प्रॉपर वितरण नहीं है. बजट बहुत बढ़ गया है, लेकिन जब दस्तावेज झांकेंगे, बहुत कम खर्च हुआ है. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल फोर्स की वजह से नहीं है. फोर्स तो अपना काम कर रही है. अगला बिल आएगा, हम बात करेंगे.

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उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनका हक मिले. सोशल इम्पैक्ट का एनालिसिस होना चाहिए. जब तक यह नहीं करेंगे, इसका स्थायी समाधान नहीं हो सकता. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पैरामिलिट्री फोर्सेज को सम्मान देने का काम हर देशवासी करता है. आज इस मौके पर गृह मंत्री की मौजूदगी में कहता हूं, बहुत अफसोस होता है जब इस फोर्स के लोग आकर कहते हैं कि हमारा जवान जब किसी ऑपरेशन में बलिदान देता है, आप उसको शहीद का दर्जा भी नहीं देते.

कोर्ट से न्याय मिला, तो बिल लेकर आ गए- धर्मेंद्र यादव

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सपा सांसद ने आगे कहा कि कोर्ट से सीएपीएफ को न्याय मिला, तब आप उसे बदलने के लिए बिल लेकर आए हैं. उन्होंने कहा कि न्यायालय ने छोटा सा अधिकार दिया है, आप उसे भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं.धर्मेंद्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नाटापन की समस्या है. कुपोषण हो रहा है, खराब टीकाकरण की वजह से. मृत्यु दर, भूमि विवाद बढ़े हुए हैं. कमजोर कल्याणकारी योजनाए, वितरण की समस्या, ये समस्याएं छत्तीसगढ़ में हैं.

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