दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका अभी भी पुलिस हिरासत में हैं. तीनों को एहतियातन हिरासत (Preventive Detention) में रखा गया है. पुलिस सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि तीनों में से किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गई है. सूत्रों के अनुसार, तीनों को पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107/151 के तहत एहतियातन हिरासत में रखा गया है. उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के सामने पेश किया जाएगा. दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई एहतियात के तौर पर की गई है और इसे औपचारिक गिरफ्तारी नहीं माना जाना चाहिए.
हिरासत को लेकर क्या कहता है कानून?
पुलिस कानून की प्रक्रिया का पालन करते हुए किसी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती, और उसको अदालत में पेश करना जरूरी होता है. इस प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस हिरासत में रखे गए अभिजीत समेत अन्य नेताओं को कोर्ट में पेश कर सकती है.इसको ऐतिहातन गिरफ्तारी कहा जा सकता है.
अगर पुलिस को लगता है कि कोई व्यक्ति कोई बड़ा अपराध (cognizable offence) करने वाला है या शांति भंग कर सकता है, तो उसे अपराध करने से रोकने के लिए धारा 170 के तहत बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है.
समय सीमा: पुलिस इस धारा के तहत किसी को भी 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रख सकती.
आगे की प्रक्रिया: 24 घंटे के भीतर पुलिस को उस व्यक्ति को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) के सामने पेश करना होता है. वहां धारा 126 के तहत शांति बनाए रखने के लिए एक बांड (Bond/गारंटी) भरवाया जाता है, जिसके बाद व्यक्ति को छोड़ दिया जाता है.
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सीजेपी ने मांगी थी जानकारी
बता दें कि इससे पहले, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की स्थिति की जानकारी मांगी है. पत्र में कहा गया है कि तीनों को शनिवार सुबह मुंबई से नई दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था.
पार्टी का कहना है कि हिरासत में लिए जाने के 12 घंटे बाद भी उनके परिजनों को कोई सूचना नहीं दी गई है. इतना ही नहीं, वकीलों को भी जानकारी देने से इनकार किए जाने का आरोप लगाया गया है. CJP ने सवाल उठाया है कि तीनों नेताओं को कहां रखा गया है, उन्हें एक साथ रखा गया है या अलग-अलग और किस एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लिया है, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है.