पश्चिम बंगाल के सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी के साथ 'खेला' हो गया है. टीएमसी के 80 में से 60 विधायक और 28 में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होकर अपनी अलग सियासी राह चुन ली है. टीएमसी मचे विद्रोह के बीच महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' की सियासी चर्चा से माहौल गर्म है और उद्धव ठाकरे अपने लोकसभा सांसदों को बचाने में जुट गए हैं.
उद्धव ठाकरे ने जून 2026 की तपती दोपहर में मुंबई के 'मातोश्री' में शिवसेना (यूबीटी) सभी 9 लोकसभा सांसदों की अचानक बैठक बुलाई, जिसमें पार्टी चार सांसद ही मीटिंग में पहुंचे जबकि पांच सांसद वर्चुअल (ऑनलाइन) तरीके से जुड़े.
उद्धव ठाकरे की मीटिंग में पांच सांसदों के न पहुंचने पर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई. ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी एक बार फिर से टूट की कगार पर खड़ी है?
महाराष्ट्र में'ऑपरेशन टाइगर' का खौफ
महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' का आगाज सबसे पहले 2022 में हुआ. उद्धव ठाकरे के अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिरने और शिवसेना के दो-फाड़ को 'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए अंजाम दिया गया था. उद्धव ठाकरे ने दोबारा जिस तरह मेहनत करके अपने पैर वापस जमाए थे, 'ऑपरेशन टाइगर' उस पूरी मेहनत पर पानी फेरने की एक कथित सियासी पटकथा माना जा रहा है.
'ऑपरेशन टाइगर' वह गुप्त रणनीति है, जिसके जरिए कथित तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और महायुति खेमा, उद्धव ठाकरे के सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है. महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से दबी जुबान में यह दावा किया जा रहा कि शिवसेना (यूबीटी) के ज्यादातर सांसद एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं. इसी दबाव को भांपते हुए उद्धव ठाकरे ने रविवार 14 जून को मातोश्री पर अपने सांसदों की मीटिंग बुलाई.
उद्धव के 5 सांसदों पर गहराया सस्पेंस
उद्धव ठाकरे डैमेज कन्ट्रोल में जुट गए हैं. उद्धव खुद और आदित्य ठाकरे इन 'नाराज' या 'सस्पेंस' वाले सांसदों से सीधे बातचीत कर रहे हैं ताकि उनकी शिकायतों को दूर किया जा सके. कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए उद्धव ठाकरे एक बार फिर संवाद शुरू किए हैं. हालांकि, उद्धव ठाकरे के द्वारा बुलाई गई बैठक में जो हुआ, उसने इस सस्पेंस को और गहरा कर दिया.
उद्धव ठाकरे के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं, लेकिन मातोश्री में केवल 4 लोकसभा सांसद ही हाजिर हुए. इसके अलावा बाकी 5 लोकसभा सांसदों ने वर्चुअल (ऑनलाइन) तरीके से बैठक में शिरकत किया. अब इन 5 सांसदों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है.
शिवसेना (यूबीटी) के पांच सांसद जो नहीं पहुंचे, उसमें ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर, संजय देशमुख और संजय जाधव है. इन सांसदों ने वर्चुअल शामिल हुए थे, लेकिन उनके नहीं पहुंचने से सियासी सस्पेंस गहरा गया है.
पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए सफाई दी कि सभी 5 सांसद निजी कारणों (जैसे बच्चों का इलाज,शादी समारोह, या एमएलसी चुनाव की व्यस्तता) से नहीं आ पाए. उन्होंने दावा किया कि सभी सांसद एकजुट हैं, लेकिन राजनीति में 'निजी कारण' अक्सर 'बहाने' माने जाते हैं. एकनाथ शिंदे खेमा पहले से ही दावा कर रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद 'संतुष्ट' नहीं हैं और जल्द ही बड़ा धमाका हो सकता है।
उद्धव ठाकरे के सामने फिर संकट खड़ा
उद्धव ठाकरे के लिए यह सिर्फ एक बैठक नहीं थी, बल्कि अपने राजनीति को बचाने की कोशिश थी.शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद (दो-तिहाई बहुमत) अलग होते हैं, तो दल-बदल विरोधी कानून का खतरा भी टल जाएगा. इसीलिए मातोश्री से बाहर आने वाली हर तस्वीर पर सबकी निगाहें टिकी थीं, जिसने उद्धव ठाकरे की चुनौती बढ़ा दी है.
संजय राउत ने पलटवार करते हुए 'ऑपरेशन टाइगर' की बात छेड़ी है, लेकिन मातोश्री के बाहर की हकीकत यह है कि उद्धव ठाकरे अपने किले को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव जतन कर रहे हैं. 5 सांसदों की गैर-मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि उद्धव के लिए 'टाइगर' अभी शांत नहीं हुआ है. एकनाथ शिंदे गुट की खामोशी इस बात की ओर इशारा करती है कि वे अभी भी सही मौके का इंतजार कर रहे हैं.
आने वाले दिन महाराष्ट्र की सियासत के लिए बेहद अहम होंगे. क्या ये 5 सांसद वाकई वफादार हैं या 'ऑपरेशन टाइगर'का शिकार होने वाले हैं, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि मातोश्री की दीवारों में इस समय तनाव साफ महसूस किया जा सकता है.