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गाली देकर बोले संजय राउत, काटना नहीं... बगावत पर महाराष्ट्र में संग्राम

उद्धव ठाकरे तमाम कोशिशों के बावजूद अपनी पार्टी में बगावत नहीं रोक पा रहे हैं. अब पार्टी के 9 में से 6 सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि उन्हें लोकसभा में अलग मान्यता दी जाए.

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संजय राउत ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले पहले इस्तीफा दें. (Photo: ITG)
संजय राउत ने कहा कि पार्टी छोड़ने वाले पहले इस्तीफा दें. (Photo: ITG)

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी में एक और बगावत हो रही है. इससे भड़के शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने उन बागी सांसदों पर तीखा और अपशब्दों से भरा हमला किया है. उद्धव ठाकरे  उन्होंने कसम खाई कि पार्टी "पीठ में छुरा घोंपने वालों" को नहीं बख्शेगी और उन्हें चुनौती दी कि वे इस्तीफा देकर खुलकर NDA में शामिल हो जाएं।

बागी सांसदों को खूब खरी-खोटी सुनाने और उन्हें 'बेईमान' (धोखेबाज़) बताने के बाद, मीडिया से बात करते हुए राउत ने पत्रकारों से कहा कि वे उनके अपशब्दों को 'बीप' न करें. न ही उनके बयान को काटें. 

संजय राउत ने कहा कि ये लोग बेइमान लोग हैं और बेइमानी उनके खून में है. ऐसा अब लगने लगा है. संजय राउत ने कहा कि वे किसी पार्टी या किसी व्यक्ति का नाम नहीं ले रहे हैं. 

संजय राउत ने पार्टी छोड़ रहे नताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे पहले इस्तीफा दें फिर पार्टी छोड़ें. उन्होंने कहा कि पार्टी के टिकट पर चुने गए लोगों को जनादेश के साथ विश्वासघात करने का कोई अधिकार नहीं है. 

संजय राउत ने अपशब्दों वाले बयानों का बचाव किया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने अपशब्दों वाले बयानों का बचाव करते हुए संजय राउत ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा, क्योंकि महाराष्ट्र और मराठी भाषा में ऐसी बातें आम तौर पर कही जाती हैं.

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उन्होंने साफ़ किया कि उन्होंने संसद में ऐसी कोई बात नहीं कही थी, लेकिन तर्क दिया कि गलत काम या भ्रष्टाचार की तारीफ नहीं होनी चाहिए. उन्होंने पूछा, "अगर कोई गलत काम करता है या भ्रष्टाचार करता है, तो क्या हम उन पर फूल बरसाएंगे?"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्धव सेना खेमे के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए 50 करोड़ रुपये की पेशकश की जा रही थी, क्योंकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं.

बता दें कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग अपना गुट बनाने का फैसला किया है.  शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अलग समूह माना जाए. शिवसेना UBT में टूट के लिए 6 सांसदों का अलग होना अनिवार्य है. 

पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से सिर्फ अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे. राउत ने बताया कि मंगलवार देर रात एक "अहम व्यक्ति" ने उन्हें जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र के सांसदों को "खरीदने" की कोशिशें चल रही हैं. राज्यसभा सांसद ने कहा, "मुझे बताया गया कि रेट 50 करोड़ रुपये है और आज रात तक हर सांसद को 15-15 करोड़ रुपये मिल जाएंगे। कहा जा रहा है कि वे पैसे मिले बिना विमान में सवार होने को तैयार नहीं थे."

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राउत ने कहा कि अगर इसी तरह राजनीतिक पार्टियों को तोड़ा जाता रहा, तो चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर 2022 में अविभाजित शिवसेना में फूट का कारण बनीं घटनाएं दोबारा हुईं, तो महाराष्ट्र और सेना (UBT) के कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे. 

UBT के सांसदों में असंतोष और नाराजगी

संजय राउत के बयान पर शिवसेना नेता संजय निरूपम ने कहा है कि शिवसेना UBT के सांसदों में एक असंतोष और नाराजगी है. उबाठा के विधायकों में भी असंतोष है. उनके नेतृत्व के प्रति जो अविश्वास है उसकी वजह से उनमें एक छटपटाहट और बेचैनी है.  संजय राउत कल तक अपने सांसदों के लिए प्रेम और आदर की भाषा का इस्तेमाल करते थे आज वे सांसदों को गाली देने लगे. कल शाम तक तो उन्होंने अपने सांसदों को बिकाऊ तक कह दिया. आपकी पूरी पार्टी का नेतृत्व खत्म हो चुका है. आपके नेतृत्व में काम करने की क्षमता नहीं है. 

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