पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. जांच की कड़ी में गुरुवार को पुलिस आरोपी सिया गोयल को पुणे के लुल्लानगर स्थित उस स्पॉट पर भी लेकर पहुंची, जहां जांच एजेंसियों के अनुसार उसने और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देने की प्रैक्टिस की थी. पुलिस ने वहां घटनाक्रम को जोड़ने और दोनों आरोपियों की एक्टिविटी की कड़ियां समझने की कोशिश की.
सिया को उसके घर ले गई पुलिस
इसके बाद पुलिस आरोपी सिया को उसके ही घर लेकर पहुंची, जहां से 18 तारीख को घटना के दिन पहने गए उसके कपड़े जब्त किए गए. लोणावला ग्रामीण पुलिस की टीम करीब डेढ़ घंटे तक उसके घर पर मौजूद रही. जांच में सबसे गंभीर खुलासा यह हुआ है कि सिया और चेतन चौधरी ने केतन को लोहगढ़ किले से धक्का देने की कथित योजना का अभ्यास (रिहर्सल) सिया के घर से महज पांच मिनट की दूरी पर किया था. पुलिस जांच के अनुसार, इस जानकारी से यह संकेत मिलता है कि केतन की हत्या कथित तौर पर पहले से सुनियोजित थी. मामले की जांच जारी है और पुलिस इस संबंध में अन्य सबूत भी जुटा रही है.
सिया गोयल का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट
दूसरी ओर अब पुणे ग्रामीण पुलिस ने वडगांव मावल अदालत में सिया गोयल का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने की अनुमति भी मांगी है. पुलिस का कहना है कि अब तक दोनों आरोपियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन जांच को आगे बढ़ाने के लिए इस परीक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है.
दूसरी ओर अदालत में पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए दाखिल आवेदन में पुलिस ने कहा कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है, जो यह स्पष्ट कर सके कि कथित तौर पर केतन अग्रवाल को खाई में किसने धक्का दिया. पुलिस का यह भी कहना है कि अब तक के सबूत फिलहाल इस सवाल का जवाब नहीं दे रहे कि केतन को धक्का दिया किसने. ऐसे में पॉलीग्राफ टेस्ट से जांच को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है.
नए सुराग तक पहुंचाएगा लाई डिटेक्टर टेस्ट
हालांकि, जांच अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजों को अदालत में स्वतंत्र और अंतिम साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है. इस तरह के टेस्ट का मोटिव केवल जांच एजेंसियों को संभावित दिशा और नए सुराग तक पहुंचाना होता है. अगर टेस्ट के दौरान कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है तो उसके आधार पर स्वतंत्र साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है.
इस बीच सिया गोयल के वकील विपुल दुशिंग ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि पुलिस ने अदालत से पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति मांगी है. उन्होंने बताया कि ऐसा टेस्स कराने से पहले कई कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी आरोपी का पॉलीग्राफ टेस्ट उसकी इजाजत के बिना नहीं कराया जा सकता. अब इस मामले में अदालत के फैसले और आरोपी की सहमति पर आगे की जांच की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी.