पुणे के मोशी में हुए दर्दनाक हादसे की कहानी आखिरकार 83 घंटे बाद खत्म हुई. लेकिन इस कहानी का अंत किसी राहत के साथ नहीं, बल्कि 9 परिवारों के मातम के साथ हुआ.
रविवार तड़के करीब एक बजे मलबे और कचरे के पहाड़ के नीचे दबे आख़िरी लापता कर्मचारी वामन कसबे का शव बरामद हुआ. इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई और चार दिनों से लगातार चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया.
8 जुलाई को वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट की प्रशासनिक इमारत पर अचानक कचरे का विशाल पहाड़ टूटकर गिर पड़ा था. उस वक्त इमारत के अंदर 23 कर्मचारी मौजूद थे. पांच लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकल आए... नौ लोगों को रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाल लिया... लेकिन नौ कर्मचारियों की जिंदगी हमेशा के लिए मलबे में दफन हो गई.
चार दिनों तक सेना, एनडीआरएफ, दमकल, पुलिस और पिंपरी- चिंचवड़ महानगरपालिका की टीमें मौत और मलबे के बीच जिंदगी तलाशती रहीं. हर घंटे उम्मीद थी कि शायद कोई सांस लेता हुआ मिल जाए... लेकिन हर बार बाहर आया तो सिर्फ एक शव.
जहरीली गैस, लगातार खिसकता कचरा, टूटे हुए बीम और कंक्रीट के भारी पिलर... इन सबने राहत कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया. फिर भी जवान बिना रुके डटे रहे. आखिरकार शनिवार को इमारत का हिस्सा तोड़कर अंदर पहुंचने का रास्ता बनाया गया, जहां एक-एक कर सात शव मिले. और रविवार की सुबह आखिरी लापता कर्मचारी का शव मिलने के साथ यह दर्दनाक तलाश खत्म हुई.
इस हादसे ने नौ परिवारों से उनके अपने छीन लिए... किसी का बेटा, किसी का पति, किसी का पिता अब कभी घर नहीं लौटेगा. पीछे रह गई हैं सिर्फ यादें, अधूरे सपने और अपनों का इंतजार. देखें VIDEO:-
हादसे के बाद संबंधित कंपनी ने मृतक कर्मचारियों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है... क्या यह मुआवजा उन नौ जिंदगियों की भरपाई कर सकता है?
मृतकों के नाम
भावेश वाणी, अक्षय सावंत, सुनील कोरके, सन्नी माने, महेश कुंभार, नागेश गायकवाड, रणजीत पाटील, राहुल गायकवाड आणि वामन कसबे. देखें मृतकों की तस्वीरें:-
ठेकेदार पर कार्रवाई होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित ठेकेदार एंटोनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होगा? क्या उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, या फिर उसे किसी राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिलेगा?
क्या पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के आयुक्त विजय सूर्यवंशी उस पर कार्रवाई करेंगे या उसे बचाने की कोशिश होगी? आखिर नौ परिवार पूरी तरह उजड़ चुके हैं, ऐसे में किसी भी दोषी ठेकेदार को संरक्षण देना न्याय के साथ अन्याय होगा.
सबसे अहम बात यह है कि खुद एंटोनी कंपनी ने स्वीकार किया है कि मृत कर्मचारियों के परिवारों को दिए जाने वाले 25 लाख रुपये उसकी ओर से नहीं, बल्कि कर्मचारियों के बीमा (ग्रुप इंश्योरेंस) की राशि है. ऐसे में इस पूरे मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. देखें VIDEO:-
वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट ऑपरेटर को नोटिस
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC), मोशी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के ऑपरेटर और अपने ही पर्यावरण विभाग को नोटिस जारी करेगा. यह कार्रवाई कचरे के ढेर के ढहने से हुई नौ लोगों की मौत के मामले में की जाएगी.
PCMC कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने कहा कि अगर कोई खामी पाई जाती है, तो FIR दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
पत्रकारों से बात करते हुए सूर्यवंशी ने कहा कि नगर निगम ने खोज और बचाव अभियान पूरा कर लिया है और 8 जुलाई की घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई शुरू कर दी है.
सूर्यवंशी ने कहा, "प्लांट चलाने वाली कंपनी को नोटिस जारी करके सुविधा को चलाने के लिए ली गई मंजूरी और अपनाए गए सुरक्षा उपायों का विवरण मांगा जाएगा. हमने नगर निगम के पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है, जो इस प्रोजेक्ट की देखरेख करते हैं." देखें VIDEO:-
उन्होंने कहा कि नगर निगम ने अधिकारियों को कानूनी राय लेने और ठेकेदार 'एंथनी लारा रिन्यूएबल' के खिलाफ FIR दर्ज करने का भी निर्देश दिया है, अगर जांच में मंजुरी, सुरक्षा उपायों या प्रोजेक्ट के काम में कोई कमी पाई जाती है.