महाराष्ट्र के पुणे के मोशी इलाके में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में हुए भीषण हादसे में पुलिस ने आखिरकार बड़ी कार्रवाई की है. भोसरी MIDC पुलिस ने एंटोनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी के प्रोजेक्ट हेड और सेफ्टी ऑफिसर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. यह हादसा तब हुआ था जब कचरे का विशाल ढेर अचानक गिर गया, जिसमें 9 मजदूरों की जान चली गई थी और 12 लोग घायल हुए थे. अब इस केस के बाद पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है.
एंटोनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड अशोक कुमार सियाराम शरण गुप्ता और सेफ्टी ऑफिसर विजय रामराव सपकाल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. नगर निगम की शिकायत के बाद भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 125(ए), 125(बी) और 3(5) के तहत यह केस दर्ज हुआ है.
पुलिस के मुताबिक कंपनी की जिम्मेदारी थी कि कचरे के ढेर की नियमित जांच करे और एसआरएफ प्लांट में सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करे. लेकिन लापरवाही के चलते कचरे का बड़ा ढेर अचानक गिर गया. इस हादसे में 9 मजदूरों की मौत हो गई जबकि 12 लोग घायल हुए.
जान गंवाने वालों में भावेश मोहन वाणी, अक्षय राजू सावंत, नागेश सर्जेराव गायकवाड़, सुनील भारत कोरेके, महेश सुरेश कुमार, सनी अशोक माने, राहुल धोडीबा गायकवाड़, रणजीत जयवंत पाटिल और वामन दगडू कसबे शामिल हैं. वहीं घायलों में मुनेन्द्र कुमार सोमपाल सिंह, चंद्रशेखर श्रीबचन सिंह, दादासाहेब किसन आरडे, सोमनाथ तुकाराम शेळके, रणवीर महेंद्रप्रताप सिंह, रामप्रताप सिंह चव्हाण, सचिन रामदास दवडगांव, सुजाता संतोष शिंदे, महेश चंद्रकांत राजूत और भूषण अजय पाटिल के नाम शामिल हैं.
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हादसे के बाद अब सवाल सिर्फ कंपनी के अधिकारियों तक सीमित नहीं है. लोग उन सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही भी मांग रहे हैं जिन्होंने इस इमारत को खड़ा होने दिया. जानकारी के मुताबिक पर्यावरण विभाग ने इस प्रोजेक्ट को सिर्फ ग्राउंड फ्लोर बनाने की अनुमति दी थी, लेकिन इसके बावजूद इमारत पर दो अतिरिक्त मंजिलें बना दी गईं.
इससे यह सवाल उठता है कि मंजूर नक्शे से अलग निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी. क्या निर्माण के दौरान किसी सरकारी विभाग ने जांच नहीं की, और क्या नियमों के उल्लंघन को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों की मांग है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति पर, चाहे वह कंपनी का अधिकारी हो या सरकारी अधिकारी, सख्त कार्रवाई की जाए.
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है. मोशी के इस हादसे ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और सरकारी निगरानी की कमी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. नौ परिवारों ने अपने घर के कमाने वाले सदस्यों को खो दिया है, और अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में आगे क्या नए खुलासे होते हैं.