पुणे के पिंपल सौदागर जिले से साइबर स्कैम का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रहने वाले एक 46 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल को कथित तौर पर 'मार्केट गुरु' बनकर ठगों ने अपना शिकार बनाया और दो हफ्तों के अंदर उनसे ₹4.43 करोड़ ऐंठ लिए. ठगों ने इसके लिए एक फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप और नकली ट्रेडिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया था. पीड़ित की शिकायत पर पिंपरी चिंचवड़ की साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखने के बाद उस पर प्रतिक्रिया दी थी. इसके बाद उसे एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया. ये ग्रुप खुद को शेयर बाजार की सलाह देने वाला प्लेटफॉर्म बताता था. ठगों ने युवक का भरोसा जीतने के लिए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संस्था के नाम इस्तेमाल किया.
जांचकर्ताओं ने बताया कि ग्रुप के एडमिन रोज सुबह 6:30 बजे ऑनलाइन सेशन करते थे. इनमें शेयर बाजार की जानकारी, निवेश की रणनीतियां और अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों की सलाह दी जाती थी. 'माइरा' नाम की एक महिला खुद को निवेश विशेषज्ञ बताती थी और सदस्यों से लगातार बातचीत करती थी. भरोसा बढ़ाने के लिए ग्रुप में निवेशकों को हुए बड़े मुनाफे के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए जाते थे.
इसके बाद पीड़ित को एक लिंक भेजकर ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया गया और निवेश खाता खुलवाया गया. ऐप में निवेश की रकम तेजी से बढ़ती हुई दिखाई जाती थी. दिख रहे मुनाफे से प्रभावित होकर पीड़ित ने करीब दो हफ्ते में 34 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 4.43 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए.
पुलिस के अनुसार, ये रकम कई बैंक खातों में भेजी गई है. पुलिस को शक है कि ये देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद म्यूल अकाउंट यानी धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले अकाउंट थे. ऐप में निवेश की रकम बढ़कर करीब 26.64 करोड़ रुपये दिखाई जा रही थी, लेकिन जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ठगों ने बहाने बनाकर और पैसे की मांग की. इसके बाद पीड़ित को स्कैम का एहसास हुआ और इस बारे में पुलिस से शिकायत की.
बता दें कि सीनियर इंस्पेक्टर रविकिरण नाले इस मामले की जांच की अगुवाई कर रहे हैं. अधिकारी का कहना है कि फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ी निवेश स्कैम के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. जालसाज आमतौर पर व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप, फर्जी मुनाफे के डैशबोर्ड, जाली एंडोर्समेंट और जानी-मानी फाइनेंशियल संस्थाओं के के नाम का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उनसे ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं.