पुणे के हाई-प्रोफाइल केतन अग्रवाल हत्याकांड में नित नए और चौंकाने वाले मोड़ आ रहे हैं. इस मर्डर मिस्ट्री के बीच अब उस रेस्क्यू टीम के सुनील गायकवाड़ का बेहद अहम बयान सामने आया है, जिन्होंने लोहगढ़ किले की गहरी खाई और पथरीली ढलानों के बीच से केतन अग्रवाल का शव बाहर निकाला था. सुनील गायकवाड़ ने न सिर्फ केतन के शव पर मौजूद क्रूर चोटों का आंखों देखा हाल बताया, बल्कि यह भी खुलासा किया कि वारदात के तुरंत बाद मौके पर मौजूद उसकी मंगेतर सिया गोयल का बर्ताव कितना अस्वाभाविक और संदेहास्पद था.
रेस्क्यू ऑपरेशन के खौफनाक मंजर को याद करते हुए सुनील गायकवाड़ ने बताया कि जब उनकी टीम लोनावला रूरल पुलिस स्टेशन की सूचना पर लोहगढ़ किले के ऊपरी हिस्से और संबंधित स्पॉट पर पहुंची, तो वहां का दृश्य विचलित करने वाला था.
'सिर पूरा दबा हुआ था, हाथ-पैर पर थे गहरी चोट के निशान'
गायकवाड़ ने कहा, ''किले पर ऊपर पहुंचने के बाद हमें दिखाई दिया कि एक लड़का नीचे गिरा हुआ है. उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी. उसके सिर पर बहुत बड़ी चोट आई हुई थी, उसका सिर बुरी तरह कुचला हुआ और दबा हुआ था. ऐसा लग रहा था जैसे सिर पर ही सबसे भारी वार किया गया हो या वह सिर के बल गिरा हो. इसके अलावा उसके हाथ और पैरों पर भी चोट के कई बड़े और गहरे निशान साफ दिखाई दे रहे थे."
खड़ी ढलान पर भारी मुश्किलों के बीच निकाला शव
सुनील गायकवाड़ ने बताया कि किले की भौगोलिक स्थिति के कारण शव को बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था. उन्होंने कहा, "हमें काफी ऊपर चढ़कर जाना था. चूंकि वहां का स्लोप यानी ढलान बहुत ज्यादा खड़ी और पथरीली थी, इसलिए केतन की बॉडी को सुरक्षित तरीके से बॉडी बैग में पैक करके नीचे उठा कर लाने में हमारी टीम को काफी दिक्कतों और मुश्किलों का सामना करना पड़ा."
तकनीकी टाइमलाइन की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि ग्रामीण पुलिस स्टेशन से रेस्क्यू टीम को सुबह 10:30 बजे कॉल मिला था. इसके बाद टीम तुरंत मौके पर पहुंची और भारी मशक्कत के बाद सुबह 11:30 बजे तक पूरा ऑपरेशन खत्म कर लिया गया. दोपहर करीब 12:30 से 1:30 बजे के बीच कानूनी कागजी कार्रवाई के बाद शव को एंबुलेंस के सुपुर्द कर दिया गया.
'पब्लिक चिल्ला रही थी, लेकिन मंगेतर सिया के आंसू नहीं टपके'
इस पूरे मामले में पुलिस को सबसे बड़ा सुराग सिया के उसी वक्त के हाव-भाव से मिला था, जिसकी पुष्टि अब रेस्क्यू टीम ने भी कर दी है. सुनील गायकवाड़ ने बताया कि जब खाई से केतन का शव निकाला जा रहा था, तब वहां काफी भीड़ जमा थी और केतन के जानने वाले व अन्य लोग दुख के मारे जोर-जोर से रो और चिल्ला रहे थे.
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गायकवाड़ ने खुलासा किया, "वह (सिया गोयल) भी वहीं मौके पर मौजूद थी.लेकिन हमारे ग्रुप मेंबर्स ने, जिन्होंने उसे करीब से देखा और बात करने की कोशिश की, बताया कि वह बाकी लोगों की तुलना में बेहद शांत थी. मंगेतर की ऐसी दर्दनाक मौत के बाद भी वह रो नहीं रही थी और न ही उसके चेहरे पर कोई खास भावुकता या घबराहट दिख रही थी. वह बेहद ठंडे दिमाग से सब कुछ देख रही थी."
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रेस्क्यू टीम का यह बयान पुलिस की उस थ्योरी को बेहद मजबूत करता है जिसमें दावा किया गया है कि सिया गोयल इस पूरे कत्ल की साजिश में अपने साथी शूटर चेतन चौधरी के साथ बराबर की हिस्सेदार थी.
पुलिस का मानना है कि कत्ल की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी, इसलिए शव को सामने देखकर भी सिया के चेहरे पर कोई शिकन या सरप्राइज नहीं था. फिलहाल लोनावला पुलिस इस बयान को भी अपनी चार्जशीट का अहम हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है.