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सड़क पर करंट फैलने का जिम्मेदार कौन? नवी मुंबई हादसे के बाद ब्लेमगेम शुरू

मुंबई-नवी मुंबई में जलभराव के दौरान करंट से दो युवतियां घायल हो गईं. रिक्शा चालक की मदद से उनकी जान बच सकी. एमएसईबी ने स्ट्रीट लाइट वायर को जिम्मेदार बताया है.

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बारिश के दौरान जलभराव के बीच हादसा (Photo: Screengrab/ITG)
बारिश के दौरान जलभराव के बीच हादसा (Photo: Screengrab/ITG)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और नवी मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बीच लापरवाही की एक तस्वीर सामने आई. जलभराव के बीच स्कूटी से गुजर रही दो युवतियां करंट की चपेट में आ गईं और सड़क पर गिर पड़ीं. मौके पर मौजूद एक रिक्शा चालक ने अपनी जान जोखिम में डालकर दोनों की मदद की, जिससे उनकी जान बच सकी. 

एमएसईबी यानी महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जिस वायर की वजह से पानी में करंट फैला था, वह एमएसईबी का नहीं था जबकि वह स्ट्रीट लाइट का वायर था, जो नवी मुंबई महानगर पालिका ने लगाई थी.

घटना के बाद दोनों युवतियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. पीड़िता शुभांगी बालखंडे अब खतरे से बाहर हैं, लेकिन दूसरी लड़की उज्ज्वल बाग की हालत गंभीर बताई जा रही है.

प्रशासन पर उठ रहे सवाल...

मुंबई में हुए इस हादसे ने शहर की व्यवस्थाओं और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता गजानन काले पिछले दो दिनों से अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार की मदद और इलाज की निगरानी कर रहे हैं. उनका कहना है कि हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के लिए भी वे लगातार कोशिश कर रहे हैं. 

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गजानन काले ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नवी मुंबई के सांसद, पालक मंत्री, विधायक और स्थानीय नेताओं के पास उद्घाटन और समारोहों में शामिल होने का समय तो है, लेकिन सड़क पर हादसे का शिकार हुए गरीब परिवार का हाल जानने का वक्त नहीं है. 

यह भी पढ़ें: नवी मुंबई में अपार्टमेंट की छत गिरी, बेडरूम में सो रहे पिता-बेटी मलबे में दबे, एक की मौत

वहीं, पीड़ित परिवार का भी कहना है कि हादसे के बाद अब तक सत्ता पक्ष का कोई जनप्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा. परिवार का आरोप है कि नगर निगम आयुक्त भी राजनीतिक दबाव के बाद अस्पताल पहुंचे.

हालांकि, इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बारिश के बीच हुए इस हादसे ने एक बार फिर शहर की बिजली व्यवस्था, जलभराव और प्रशासनिक जवाबदेही पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित परिवार को कब तक इंसाफ मिल पाता है.

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