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अगला 36 घंटा तय करेगा कि मुंबई का बॉस कौन? BMC के लिए वोटिंग कल, 25 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

महाराष्ट्र की 29 नगर महानगरपालिकाओं के लिए प्रचार अभियान मंगलवार को थम गया है. मुंबई में बीएमसी (BMC) की सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी नीत महायुति और एकजुट ठाकरे मोर्चे के बीच कांटे की टक्कर है. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच गुरुवार को मतदान और शुक्रवार को नतीजों का ऐलान होगा.

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शुक्रवार को आएंगे बीएमसी चुनाव के नतीजे (File Photo: ITG)
शुक्रवार को आएंगे बीएमसी चुनाव के नतीजे (File Photo: ITG)

मुंबई में 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव में महायुति गठबंधन और फिर से एक हुए ठाकरे चचेरे भाइयों के बीच कड़ी टक्कर है. यह चुनाव मराठी बनाम गैर-मराठी पहचान की राजनीति से लबालब भरा हुआ है, जिसमें मेयर पद पर बहस और मुंबई की ग्लोबल पहचान पर विवादित टिप्पणियां शामिल हैं. मुख्य मुद्दों में अवैध प्रवासियों को हटाने का वादा, शिवसेना के गुटों, बीजेपी, कांग्रेस और MNS के बीच सीटों के लिए कड़ी टक्कर और कल्याणकारी योजनाओं पर कानूनी चुनौतियां शामिल हैं. 

मुंबई सहित महाराष्ट्र की 29 नगर महानगरपालिकाओं के 2,869 सीटों के लिए मतदान गुरुवार, 15 जनवरी को सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगा. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की 227 सीटों और अन्य निकायों के चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुंबई में 25 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं. सुरक्षा घेरे में 10 एडिशनल कमिश्नर, 33 डीसीपी और 84 एसीपी सहित होमगार्ड्स, एसआरपीएफ और क्विक रिस्पॉन्स टीमें शामिल हैं. 

राज्य के कुल 3.48 करोड़ मतदाता 15,931 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे, जिनमें अकेले मुंबई से 1,700 और पुणे से 1,166 प्रत्याशी मैदान में हैं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति के लिए कमान संभाली, जबकि उद्धव और राज ठाकरे 20 साल बाद एकजुट होकर मराठी वोटों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. 16 जनवरी को होने वाली मतगणना से तय होगा कि देश की सबसे अमीर निकाय संस्था पर किसका कब्जा होने जा रहा है.

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ठाकरे भाइयों की एकजुटता और महायुति की रणनीति

इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प है क्योंकि करीब दो दशक बाद उद्धव और राज ठाकरे मराठी अस्मिता के नाम पर एक साथ आए हैं. साल 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला बीएमसी चुनाव है, जहां एकनाथ शिंदे गुट असली शिवसेना के रूप में चुनाव लड़ रहा है. वहीं, महायुति गठबंधन में रणनीतिक रूप से अजीत पवार की एनसीपी को अलग रखा गया है, जिससे 'गैर-हिंदू' मतदाताओं को मिलाया किया जा सके. मुख्यमंत्री फडणवीस ने हिंदू और मराठी मेयर का वादा कर चुनाव को भावनात्मक मोड़ दे दिया है.

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महिलाओं के लिए वादों की झड़ी और अन्य चुनावी मुद्दे

दोनों खेमों ने अपने घोषणापत्रों में महिलाओं के लिए लोकलुभावन वादे किए हैं. महायुति ने बेस्ट (BEST) बसों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी रियायत का वादा किया है, तो वहीं ठाकरे भाइयों ने घरेलू कामगार महिलाओं के लिए 1,500 रुपये मासिक भत्ते और 700 वर्ग फुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स माफी का आश्वासन दिया है. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने प्रदूषण नियंत्रण और मुंबई की वित्तीय स्थिति सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया है.

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सीटों का गणित और प्रमुख दावेदार

मुंबई में सीटों के बंटवारे में बीजेपी 137 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि अजीत पवार की एनसीपी 94 सीटों पर अलग चुनाव लड़ रही है. विपक्ष में शिवसेना (UBT) ने 163, एमएनएस (MNS) ने 52, कांग्रेस ने 143 और वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) ने 46 उम्मीदवार उतारे हैं. कांग्रेस ने राज्य स्तर पर भी 1,263 प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जो महाविकास अघाड़ी के सहयोगियों से हटकर अपनी अलग छवि बनाने की कोशिश में हैं.

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मेयर पद पर छिड़ी जुबानी जंग

प्रचार के दौरान मेयर पद को लेकर जमकर बहस हुई. बीजेपी ने आरोप लगाया कि अगर शिवसेना (UBT) सत्ता में आई तो मुंबई को मुस्लिम मेयर मिलेगा. इसके जवाब में उद्धव ठाकरे की पार्टी ने मराठी मेयर का वादा किया. आखिरकार, मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी गारंटी दी है कि मेयर 'हिंदू और मराठी' ही होगा. इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी, इमरान प्रतापगढ़ी और मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे दिग्गजों ने भी अपनी पार्टी के लिए स्टार कैंपेनर के रूप में जोर लगाया है.

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

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