IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को लेकर मीडिया में चल रही खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है. फोरम ने कहा कि प्रो. दुल्ला को IIT बॉम्बे की सेवा से निलंबित नहीं किया गया है और वह संस्थान के फैकल्टी सदस्य बने हुए हैं.
फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि 18 सितंबर 2026 की घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रो. दुल्ला को डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) के पद की जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से मुक्त किया गया है.
हालांकि, इसका अर्थ संस्थान की सेवा से उनका निलंबन नहीं है. फोरम ने बयान में कहा, 'IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम अपने सहयोगी प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला के साथ मजबूती से खड़ा है.'
फोरम ने कहा- प्रोफेसर दुल्ला सम्मानित व्यक्ति
फोरम ने प्रो. दुल्ला को IIT बॉम्बे का प्रतिष्ठित फैकल्टी सदस्य बताते हुए कहा कि उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं. इनमें शिक्षण में उत्कृष्टता के लिए मिले दो पुरस्कार भी शामिल हैं, जो छात्रों की प्रतिक्रिया के आधार पर दिए जाते हैं.
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रो. दुल्ला लंबे समय तक डीन (स्टूडेंट अफेयर्स) भी रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कैंपस में छात्र समुदाय के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई.
फैकल्टी फोरम ने कहा कि वह प्रो. दुल्ला की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचाने वाली कथित झूठी और भ्रामक मीडिया रिपोर्टों से दुखी है. फोरम ने यह भी कहा कि 18 सितंबर की घटना में एक छात्र की मौत से पूरा समुदाय बेहद व्यथित और चिंतित है. फोरम ने बयान में कहा, 'IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम अपने सहयोगी प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला के साथ मजबूती से खड़ा है.'
फैकेल्टी फोरम में हैं 750 सदस्य
बता दें कि IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम संस्थान का एक औपचारिक निकाय है, जिसमें करीब 750 सदस्य हैं. इसके जरिए संस्थान के फैकल्टी सदस्य IIT बॉम्बे और अन्य निकायों के समक्ष अपनी राय रखते हैं.
इस समय आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हैं और लंबे समय से पढ़ाने के साथ-साथ कई अहम जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं. लेकिन साहिल की मौत से पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर मामला सामने आया था.
आईआईटी बॉम्बे के मुताबिक साहिल पर परीक्षा के सवालों को चैटजीपीटी पर डालकर जवाब लेने का आरोप था. इसी परीक्षा में प्रोफेसर डूला इनविजिलेटर थे. इसके बाद से ही साहिल के परिवार ने प्रोफेसर डूला पर जातिगत टिप्पणी, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए. शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाईं. हालांकि, ये आरोप अभी तक तय नहीं हुए हैं.
कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला?
सूर्यनारायण दुल्ला आईआईटी बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं. उनकी फैकल्टी प्रोफाइल के अनुसार, वह संस्थान में साल 2009 से जुड़े हुए हैं. वहीं, उनकी अकादमिक बैकग्राउंड की बात करें, तो उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और पावर सिस्टम से जुड़े हुए हैं.
उन्होंने साल 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद 2002 में आईआईटी बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद साल 2007 में आईआईटी दिल्ली से पावर सिस्टम्स में पीएचडी पूरी की. जिस संस्थान से उन्होंने पढ़ाई की, उसी फैकल्टी का हिस्सा बने.
पहले इन जगहों पर भी कर चुके हैं काम
आईआईटी बॉम्बे में आने से पहले दुूल्ला ने कई अकादमिक संस्थानों के साथ इंडस्ट्री में भी काम किया था. उनकी फैकल्टी प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने बेंगलुरु की पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स में भी काम किया है. इसके साथ ही उन्होंने हैदराबाद की मशीन टू मशीन से भी जुड़े रहे. उनका सफर यहीं पर खत्म नहीं होता है बल्कि उन्होंने आईआईटी दिल्ली एलुरु के सीआरआर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और काकीनाडा के जेएनटीयू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से भी रहा है.