scorecardresearch
 

मराठी सीखने चले गए ड्राइवर? मुंबई में ऑटो-टैक्सी का हो गया शॉर्टेज, 'ऑउट ऑफ सिलेबस' सवाल का आरोप

मुंबई में ऑटो और टैक्सी चालकों के एक गुट ने तीन-दिवसीय हड़ताल शुरू की है. दरअसल वे, मराठी भाषा की अनिवार्यता के नियम का विरोध कर रहे हैं. आरटीओ अधिकारी चालकों की मराठी भाषा की जानकारी जांच रहे हैं. चालकों का कहना है कि ट्रेनिंग में शामिल नहीं सवाल पूछे जा रहे हैं. मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा.

Advertisement
X
मुंबई के ऑटो-रिक्शा चालकों के एक गुट ने सोमवार को मराठी भाषा की नई अनिवार्यता के विरोध में तीन दिन की हड़ताल शुरू की. (File Photo-Getty Images)
मुंबई के ऑटो-रिक्शा चालकों के एक गुट ने सोमवार को मराठी भाषा की नई अनिवार्यता के विरोध में तीन दिन की हड़ताल शुरू की. (File Photo-Getty Images)

महाराष्ट्र के मुंबई में ऑटो और टैक्सी ड्राइवर्स के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का मामला अब तूल पकड़ रहा है. लैंग्वेज टेस्ट के विरोध में ऑटो चालकों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है.

इसका असर मुंबई की सड़कों पर दिखने लगा है. यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में काफी परेशानी हो रही है. कई लोगों को 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा.

दरअसल, मुंबई में 21 अगस्त से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के अधिकारी ऑटो और टैक्सी चालकों की मराठी भाषा की जानकारी जांच रहे हैं. यह जांच दक्षिण मुंबई से लेकर उपनगरों तक कई जगहों पर चल रही है.

जिन चालकों को मराठी का कामचलाऊ ज्ञान नहीं है, उन्हें मेमो दिया जा रहा है. इसके बाद उन्हें मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय मिलता है. अगर एक महीने बाद भी ड्राइवर जरूरी जानकारी नहीं दिखा पाता है, तो उसका बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है. यह नियम ऑटो और टैक्सी के साथ ऐप आधारित कैब सर्विस के ड्राइवर्स पर भी लागू है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'यूपी चुनाव पर ध्यान दें, महाराष्ट्र की सियासत पर नहीं...', मराठी विवाद पर अखिलेश को मंत्री का जवाब

चालकों का आरोप, सवाल ट्रेनिंग से बाहर

इस पूरे मामले पर टैक्सी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने में कोई परेशानी नहीं है. उनका विरोध जांच के तरीके को लेकर है. उनका आरोप है कि आरटीओ अधिकारी ऐसे सवाल पूछ रहे हैं, जो उन्हें दी गई ट्रेनिंग में शामिल नहीं थे.

कांदिवली के टैक्सी ड्राइवर किसुन यादव ने कहा कि कई चालक कम पढ़े-लिखे हैं. कुछ चालक तो बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं हैं. ऐसे लोगों के लिए कम समय में नई भाषा सीखना मुश्किल है.

चालकों का यह भी कहना है कि मराठी की कक्षाओं में जाने से उनकी कमाई का नुकसान होता है. कई चालक रोज की कमाई पर निर्भर हैं. ऐसे में काम छोड़कर क्लास करना उनके लिए आसान नहीं है.

वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि यह नियम अचानक नहीं बनाया गया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि व्यावहारिक मराठी का ज्ञान रखने की शर्त महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है. हालांकि इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था. अब 2026 में नियमों में बदलाव के बाद इसे लागू किया जा रहा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में 1200 से ज्यादा ऑटो-टैक्सी चालकों को नोटिस, मराठी न आने पर एक्शन

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार हिंदी बोलने वाले लोगों को मराठी का स्पेशलिस्ट नहीं बनाना चाहती. चालकों को सिर्फ काम चलाने लायक मराठी आनी चाहिए. करीब 1.65 लाख चालकों को मराठी की ट्रेनिंग दी जा चुकी है. उन्हें सर्टिफिकेट भी दिए गए हैं.

पहले दौर में 1200 से ज्यादा नोटिस

परिवहन विभाग के मुताबिक, पहले दिन राज्यभर में 8,217 चालकों की जांच हुई. इनमें 1,268 चालकों को नोटिस दिया गया. मुंबई महानगर क्षेत्र में 3,995 चालकों की जांच हुई. इनमें 604 चालक मराठी का जरूरी ज्ञान नहीं दिखा सके. पूरे महाराष्ट्र में करीब 9.65 लाख ऑटो और टैक्सी चालक लाइसेंसधारी हैं. ऐसे में चालकों के बीच इस नियम को लेकर चिंता बनी हुई है.

कांदिवली में सोमवार को ऑटो और टैक्सी चालकों ने सड़क जाम भी किया था, चालकों ने भाषा नियम लागू करने के दौरान परेशान करने और धमकाने का भी आरोप लगाया.

यह भी पढ़ें: मराठी भाषा पर ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों का विरोध! फडणवीस ने संभाला मोर्चा, बोले- एक्सपर्ट बनाना मकसद नहीं

मुंबई में पहले से बारिश के कारण यातायात प्रभावित है. अब ऑटो और टैक्सी की कमी से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है. चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है. उनकी मांग है कि लैंग्वेज टेस्ट व्यावहारिक हो और उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement