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डिप्टी CM के बैनर से ढकी स्कूल की टूटी खिड़कियां... अब स्कूल 'ठीक' करने पहुंचे अभिजीत दिपके

शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर अभिजीत ने सरकार पर निशाना साधा है. अब सरकारी स्कूलों में पानी,शौचालय और बेंच जैसी जरूरी सुविधाओं पर दिपके सरकार से सीधा सवाल कर रहे हैं.

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कॉकरोच जनता पार्टी ने स्कूल ठीक करो अभियान शुरू किया (फाइल फोटो- PTI)
कॉकरोच जनता पार्टी ने स्कूल ठीक करो अभियान शुरू किया (फाइल फोटो- PTI)

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) फाउंडर अभिजीत दिपके अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे, और जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया. उन्होंने दावा किया की स्कूल के शौचालय में पानी की व्यवस्था वहीं थी. साथ ही कई खिड़कियां टूटी मिलीं, और बच्चों की संख्या के मुकाबले बेंच भी कम थी.

स्कूल की जर्जर हालत पर बात करते हुए दिपके ने कहा की अगर सरकारी स्कूलों में आज भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो देश के विकास की बात कैसे की जा सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पहुंचने से पहले स्कूल का शौचालय साफ कराया गया था.

इसी सवाल को लेकर अभिजीत दिपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली से स्कूल ठीक करो अभियान की शुरुआत की. उन्होंने सरकारी स्कूलों की सुविधाओं की जांच कर सरकार से जवाबदेही तय करने की बात कही.

दिपके ने दावा किया ठोंकते हुए कहा कि पिछले दस सालों में देश में 94 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हुए हैं.आखिर जब देश को सबसे ज्यादा स्कूलों की जरूरत है तो सरकारी स्कूलों को बंद क्यों किया जा रहा है. 

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यह भी पढ़ें: 'जंतर-अंतर का सीजन-2 जल्द शुरू...', CJP संस्थापक अभिजीत दिपके का बयान

उनका आरोप है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी के कारण गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा और सुविधाएं मिलेंगी, तो बच्चों को मजबूरी में महंगे प्राइवेट स्कूलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. 

'निजी स्कूलों की फीस की तय हो सीमा'

शिक्षा पर सवाल उठाते हुए दिपके ने कहा की प्राइवेट स्कूलों के फीस की एक सीमा तय होनी चाहिए.  कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए हर साल  1 से 1.5 लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं.  ऐसे में गरीब परिवारों के लिए अच्छी शिक्षा हासिल करना और  मुश्किल हो जाता है. 

शिक्षा के बाद अब सरकारी अस्पतालों पर भी नजर

स्कूल ठीक करो अभियान के बाद CJP सरकारी अस्पतालों की हालत को लेकर भी अभियान चलाने की तैयारी में है. दिपके ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों के फर्श पर सोने और जांच और  सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करने की बात कही उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण इलाकों के युवा भी सरकार से सवाल पूछेंगे और सरकारी योजनाओं और  बजट के इस्तेमाल का हिसाब मांगेंगे.  उनके मुताबिक राजनीति में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की भागीदारी भी बढ़नी चाहिए. दिपके ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार से सीधा सवाल करने से ही व्यवस्था में बदलाव की शुरुआत होगी. 

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