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LoC के आर-पार दो तस्वीरें: POK में बवाल, भारत में जोजिला टनल का जश्न

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रावलकोट में हिंसा का माहौल था, जबकि भारतीय हिस्से में जोजिला टनल का अंतिम ब्रेकथ्रू कर विकास का जश्न मनाया गया. इस तरह LoC पर दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं.

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9 जून को जोजिला का ब्रेकथ्रू पूरा हुआ. (Photo- ITG)
9 जून को जोजिला का ब्रेकथ्रू पूरा हुआ. (Photo- ITG)

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के दोनों तरफ 9 जून 2026 को दो बिल्कुल अलग तस्वीरें देखने को मिलीं. एक तरफ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (POK) के रावलकोट, मुजफ्फरराबाद और मीरपुर जैसे शहर हिंसा, धरपकड़ और मौतों से दहल रहे हैं. वहां लोग सड़कों पर उतरकर इस्लामाबाद की हुकूमत को चुनौती दे रहे हैं. 

वहीं दूसरी तरफ, एलओसी से महज सौ किलोमीटर पूर्व में भारतीय हिस्से में माहौल बिल्कुल अलग है. वहां विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि विकास और तरक्की का जश्न मनाया जा रहा है. 

हिमालय की गहराइयों के बीच बलताश, सोनमर्ग और मीनामर्ग में जुटे इंजीनियरों और मजदूरों ने 'जोजिला टनल' का अंतिम ब्रेकथ्रू कर इतिहास रच दिया है. पूरी तरह तैयार होने के बाद ये सुरंग एशिया की सबसे लंबी दोतरफा (बाय-डायरेक्शनल) सुरंग बन जाएगी. 

LoC के आर-पार दो तस्वीरें

मंगलवार को जब एक तरफ रावलकोट की सड़कों पर प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल आमने-सामने थे, ठीक उसी वक्त जोजिला दर्रे के हजारों फीट नीचे भारतीय इंजीनियर और मजदूर एक ऐतिहासिक कामयाबी का जश्न मना रहे थे. कश्मीर के दोनों हिस्सों से आई ये दो तस्वीरें यह बताने के लिए काफी हैं कि दोनों तरफ के लोग आज किस हकीकत में जी रहे हैं.

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हर मौसम में खुली रहने वाली ये जोजिला सुरंग जम्मू-कश्मीर को सीधे लद्दाख से जोड़ने का काम करेगी. एलओसी के दोनों तरफ लगभग एक ही समय पर हुई ये घटनाएं कश्मीर के दोनों हिस्सों की दो अलग-अलग हकीकतों को बयां करती हैं. साल 1947 में पाकिस्तान की नापाक हरकतों की वजह से यह क्षेत्र दो अलग-अलग रास्तों पर चल पड़ा था. 

भारत हमेशा से इस बात पर कायम रहा है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और शक्सगाम घाटी भारत के अभिन्न अंग हैं और देश की संप्रभुता के केंद्र में हैं, जबकि पाकिस्तान ने 1947 से इसके कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा कर रखा है.

पीओके में इंटरनेट बंद और भारी सेना तैनात

मंगलवार का दिन दो बड़ी सुर्खियों के नाम रहा. पीओके में प्रशासन ने प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के लॉन्ग मार्च को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी. इससे पहले रावलकोट में हुई हिंसक झड़पों में दर्जनों लोग मारे गए थे. 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस हिंसा में 11 लोगों की मौत हुई है, हालांकि स्थानीय कार्यकर्ताओं और कई रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है. तनाव को देखते हुए पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है और सुरक्षाबलों को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है.

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दूसरी तरफ भारत में, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में 13.15 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग का अंतिम ब्रेकथ्रू हुआ. कश्मीर और लद्दाख दोनों छोर से खुदाई कर रहे मजदूर और इंजीनियर आखिरकार जमीन के नीचे एक-दूसरे से मिल गए. समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर बन रही ये सुरंग दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब दोतरफा सड़क सुरंगों में से एक होगी. 

ये सुरंग बर्फबारी के दिनों में भी कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क को बहाल रखेगी. जबकि पहले भारी बर्फबारी के कारण जोजिला पास महीनों बंद रहता था और लद्दाख देश से पूरी तरह कट जाता था. ये सुरंग साल 2028 तक पूरी तरह चालू हो सकती है.

POK का पुराना दर्द: हर साल महंगाई और हक के लिए उठती आवाजें

वहीं, POK में भड़का ये गुस्सा कोई नया नहीं है. पिछले कई सालों से वहां के लोग बिजली के भारी बिलों, कमरतोड़ महंगाई, आटे जैसी बुनियादी चीजों की कमी और शासन में पाकिस्तानी हुकूमत की दखलअंदाजी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलन की अगुवाई कर रही 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) का जन्म ही इन आर्थिक दिक्कतों के खिलाफ हुआ था.

ये गुस्सा तब और बढ़ गया जब पाकिस्तान की पंजाब लॉबी समर्थित प्रशासन ने गैर-निवासियों के लिए 12 सीटें आरक्षित कर दीं. इसके विरोध में रावलकोट, मुजफ्फरराबाद और मीरपुर से शुरू हुआ ये आंदोलन अब पास के गिलगित-बाल्टिस्तान तक फैल चुका है. इससे पहले साल 2025 में भी जेएएसी के आह्वान पर पूरे क्षेत्र में चक्का जाम और शटर-डाउन हड़ताल हुई थी, जिसमें पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में कम से कम 12 लोग मारे गए थे. 

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भारत ने तब इस स्थिति को पाकिस्तान की शोषक नीतियों का स्वाभाविक नतीजा बताया था. साल 2024 में भी ऐसे ही प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलियों और आंसू गैस के गोलों के कारण चार कश्मीरियों की जान गई थी और तब प्रदर्शनों में पाकिस्तान से 'आजादी' के नारे भी गूंजे थे.

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