हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित मशहूर त्रियुंड ट्रैक पर लंबे वीकेंड के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली. भीड़ को लेकर सोशल मीडिया पर भी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें हजारों पर्यटक दिखाई दे रहे थे. इसके बाद वन विभाग ने त्रियुंड ट्रैक पर पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है. अब त्रियुंड ट्रैक पर एक दिन में अधिकतम 1000 पर्यटकों को ही जाने की अनुमति होगी. वन विभाग के मुताबिक यह संख्या त्रियुंड लैंडस्केप की निर्धारित कैरिंग कैपेसिटी के आधार पर तय की गई है.
DFO धर्मशाला अमित शर्मा ने बताया कि लंबे वीकेंड के दौरान त्रियुंड ट्रैक पर करीब 1700 पर्चियां काटी गई थीं. उन्होंने कहा कि वीकेंड के दौरान पर्यटकों की संख्या काफी ज्यादा देखने को मिली. ऐसे में अब तय कैरिंग कैपेसिटी को सख्ती से लागू किया जाएगा. सोशल मीडिया पर दिखी 3000 से 4000 की भीड़, लेकिन पूरी भीड़ त्रियुंड टॉप पर नहीं थी. त्रियुंड ट्रैक पर पर्यटकों की भीड़ को लेकर सोशल मीडिया पर 3000 से 4000 लोगों के पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो दिखाई गईं. हालांकि वन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह पूरी भीड़ त्रियुंड टॉप पर नहीं थी.
DFO अमित शर्मा के मुताबिक शुरुआती चेकपॉइंट पर पर्यटकों की संख्या ज्यादा दिखाई दी थी. यहां पर्यटकों की आधार संबंधी जानकारी दर्ज करने और पर्ची काटने में समय लग रहा था. इसी वजह से बड़ी संख्या में पर्यटक चेकपॉइंट पर एकत्रित हो गए थे. उन्होंने बताया कि त्रियुंड लैंडस्केप की स्वीकृत कैरिंग कैपेसिटी 1000 व्यक्ति प्रतिदिन है. अब इसी सीमा को सख्ती से लागू किया जाएगा.
ऑपरेटरों को मिलेंगी सिर्फ 1000 पर्चियां
आने वाले वीकेंड पर भी बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए वन विभाग ने चेकपॉइंट पर अपना स्टाफ तैनात करने का फैसला लिया है. ऑपरेटरों को एक दिन में सिर्फ 1000 पर्चियां जारी की जाएंगी. इन पर्चियों के आधार पर ही पर्यटकों को त्रियुंड की तरफ जाने की अनुमति दी जाएगी. बिना पर्ची किसी भी पर्यटक को ऊपर जाने नहीं दिया जाएगा. वन विभाग ने साफ किया है कि अगर कोई पर्यटक नियम तोड़कर बिना टिकट ऊपर जाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ निर्धारित प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा. DFO अमित शर्मा ने कहा कि यह फैसला पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लिया गया है. अगर तय क्षमता से ज्यादा पर्यटक ट्रैक पर पहुंचेंगे तो सभी पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध करा पाना मुश्किल होगा.
वन विभाग की ओर से त्रियुंड पहुंचने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए जल्द ही कुछ व्यवस्थाएं की जाएंगी. इनमें गजीबो, पानी और ड्राई टॉयलेट की सुविधा शामिल है. अमित शर्मा ने बताया कि पानी की व्यवस्था 31 दिसंबर से पहले करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका एक उद्देश्य यह भी है कि पर्यटकों को ऊपर प्लास्टिक की बोतलें ले जाने की जरूरत कम पड़े. वन विभाग का कहना है कि त्रियुंड को कंक्रीट और ग्रे इंफ्रास्ट्रक्चर से भरने की योजना नहीं है. विभाग की प्राथमिकता इस जगह के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना है.
बढ़ती भीड़ को देखते हुए वन विभाग ने पर्यटकों और ट्रैकिंग ऑपरेटरों से एडवांस बुकिंग को लेकर भी सावधानी बरतने की अपील की है. DFO अमित शर्मा ने कहा कि ट्रैकिंग ऑपरेटरों और पर्यटकों को एडवांस बुकिंग करने से पहले वन विभाग से जानकारी लेनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में 1000 से ज्यादा लोगों को एक दिन में त्रियुंड जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इस व्यवस्था का मकसद सिर्फ पर्यटकों की संख्या कम करना नहीं है, बल्कि त्रियुंड की निर्धारित क्षमता के हिसाब से ट्रैक पर आने वाले लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना और प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखना भी है.
डे हाइकिंग और कैंपिंग के लिए अलग शुल्क
त्रियुंड जाने वाले पर्यटकों के लिए डे हाइकिंग की पर्ची 100 रुपये निर्धारित है. वहीं कैंपिंग के लिए 275 रुपये शुल्क लिया जाता है. अमित शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क पर्यटकों को दी जाने वाली किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं है. यह शुल्क हाइकिंग और कैंपिंग की अनुमति के लिए लिया जाता है. वन विभाग अब 1000 पर्यटकों की दैनिक सीमा को लागू करने के साथ चेकपॉइंट पर निगरानी बढ़ाएगा. आने वाले वीकेंड में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्टाफ की तैनाती रहेगी और बिना पर्ची ऊपर जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.